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4 महीने में खराब हुई इलेक्ट्रानिक स्कूटी, कंपनी को लागत मूल्य लौटाने के निर्देश

Sun, 01 Mar 2020 01:18 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 01 Mar 2020 01:18 AM IST
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Electronic scooty broke down in 4 months, instructions to return cost price to company
जिला उपभोक्ता फोरम लगातार आम आदमी को राहत दे रही है। फोरम के चेयरमैन नगेंद्र कादयान ने चार माह में ही इलेक्ट्रानिक स्कूटी की बैटरी खराब होने पर गुजरात के गांधी नगर की कंपनी को लागत मूल्य 45 हजार 500 रुपये की राशि लौटने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कंपनी उपभोक्ता को 5 हजार रुपये कानूनी खर्च भी देगी।
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मामले के अनुसार भालौठ गांव निवासी सुभाषचंद्र ने मार्च 2019 में फोरम में याचिका दायर की कि उसने छोटूराम चौक स्थित एजेंसी से इलेक्ट्रानिक स्कूटी खरीदी थी, लेकिन चार माह बाद स्कूटी की बैटरी जवाब दे गई। चार्जिंग के बावजूद बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होने लगी। उसने एजेंसी मालिक व वर्कशाप में शिकायत की। एक बार बैटरी बदल दी गई, लेकिन दो दिन बाद वहीं हालत हो गई। उसने कंपनी को ई-मेल करके कंपनी को शिकायत की, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। आखिर में उसने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। फोरम ने कंपनी को नोटिस भेजा। मामले की सुनवाई करते हुए अब फोरम ने कंपनी को निर्देश दिए हैं कि उपभोक्ता को 45 हजार 500 रुपये लौटाए जाएं। साथ ही उपभोक्ता कंपनी को स्कूटी वापस कर दे। इसके अलावा कंपनी को पांच हजार रुपये कानूनी खर्च के तौर पर भी उपभोक्ता को देने होंगे।
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उपभोक्ता के बैंक अकाउंट से किस्त कटी, हाउसिंग बोर्ड 9 प्रतिशत ब्याज समेत लौटाए राशि
प्रदेश सरकार के हाउसिंग बोर्ड को फ्लैट सरेंडर करने वाले मायना गांव निवासी रामधन गोयल को 88 हजार रुपये नौ प्रतिशत ब्याज सहित देने होंगे। क्योंकि गोयल के अकाउंट से किश्त कटी हुई है। इसका रिकार्ड बैंक में उपलब्ध है। फोरम की तरफ से यह निर्णय सुनाया गया है।
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मामले के अनुसार जनवरी 2019 में रामधन गोयल ने फोरम में याचिका दायर की कि उसने मार्च 2013 में हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में फ्लैट के लिए आवेदन किया था। इसके लिए पंजाब नेशनल बैंक के माध्यम से पहली किस्त 44 हजार रुपये जमा करवाई। इसके बाद पांच माह बाद 44 हजार रुपये की दूसरी किस्त भी जमा करवाई। इसके लिए ड्राफ्ट दिया गया। उसे मई 2018 में फ्लैट आवंटित कर दिया गया, लेकिन इसके लिए एक माह में 2 लाख 96 हजार रुपये 508 रुपये जमा कराने के लिए कहा। इसमें उसकी दूसरी किस्त 44 हजार को नहीं जोड़ा गया। कहा गया कि किश्त नहीं मिली, जबकि उसके अकाउंट से हाउसिंग बोर्ड पंचकूला के अकाउंट में राशि जमा हो चुकी थी। इसके चलते उसने फ्लैट सरेंडर कर दिया। मामले की सुनवाई करते हुए उपभोक्ता फोरम ने हाउसिंग बोर्ड को निर्देश दिए हैं कि फ्लैट के लिए आवेदन करने वाले रामधन गोयल को 88 हजार रुपये 9 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाए जाएं। साथ ही उसे पांच हजार रुपये कानूनी खर्च के तौर पर दिए जाएं।
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