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खेल-खेल में होगा नन्हे-मुन्नों का विकास

Sat, 17 Apr 2021 12:16 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 17 Apr 2021 12:16 AM IST
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Elective surgery stopped in PGI, preparations to stop OPD
अब खेल-खेल में नन्हे-मुन्नों का विकास होगा। परंपरागत शिक्षा के बजाय दूसरे प्रभावशाली माध्यमों से बच्चों को आवश्यक चीजें सिखाई जाएंगी। इसके लिए जिले के 50 आंगनबाड़ी केंद्रों में प्ले-स्कूल खोले जाएंगे।
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राज्य सरकार ने तीन से छह साल के बच्चों के विकास के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों में प्ले-स्कूल खोलने की योजना बनाई थी। इसके तहत जिले के 50 केंद्र चुने गए हैं। इस प्रोजेक्ट के लिए पहले मास्टर ट्रेनर को प्रशिक्षण दिया, जिन्होंने आगे सभी सुपरवाइजर और सीडीपीओ को 22-26 मार्च तक ट्रेनिंग दी। अब उनकी 15 दिन की प्रैक्टिस क्लास शुरू की गई हैं। इनमें वे ट्रेनिंग के दौरान सिखाई गई बातों के आधार पर बच्चों के विकास का प्रयास कर रही हैं। प्रैक्टिस सेशन खत्म होने के बाद सुपरवाइजरों और सीडीपीओ की दो दिन की ट्रेनिंग होगी। उसके बाद ये आंगनबाड़ी वर्कर्स को प्रशिक्षण देंगी। प्ले-स्कूल में बच्चों के विकास की सीधी जिम्मेदारी उन पर ही होगी।
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लाइब्रेरी कॉर्नर, पोटली का खेल और गपशप
परियोजना अधिकारी व मास्टर ट्रेनर योगेंद्रा ने बताया कि इसमें शारीरिक, भाषा, गणित और बौद्धिक विकास समेत कई मानक तय किए गए हैं। लेकिन परंपरागत तरीके के बजाय बच्चों को दूसरे ढंग से सिखाया जाएगा। उन्हें रंगों की पहचान करना सिखाया जा रहा है, लाइब्रेरी कॉर्नर है, जहां बच्चों को पढ़ने को प्रेरित किया जाता है। पोटली का खेल है, जिसमें अलग-अलग चीजें निकाल कर बच्चों से उनके बारे में पूछा जाता है। अलग-अलग गंध की वस्तुएं रख कर उनमें गंध की पहचान विकसित की जा रही है। खेल-खेल में बच्चे अपना पसंदीदा खेल खेलते हैं। गपशप में बच्चों को खुला छोड़ दिया जाता है, वे आपस में बात करते हैं। स्टोरी टेलिंग भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि वह आसंद और बालंद गई थीं, वहां बच्चों के अभिभावक उनके प्रदर्शन से बहुत खुश थे। उनका कहना था कि बच्चे सीख कर बोलने लगे हैं।
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बच्चों में सुधार की होगी मॉनीटरिंग
परियोजना अधिकारी योगेंद्रा ने बताया कि इसमें नियमित रूप से बच्चों में कितना सुधार हुआ है, इसकी मॉनीटरिंग होगी। इसके लिए प्रोफार्मा बनाया गया है। जैसे बच्चो को पहले सीधी लाइन पर चलाते हैं, फिर एक गोला बना देते हैं। वह पहले दिन कैसे चला था और 15 दिन बाद कैसे चला, इसका आकलन किया जाएगा।

जिले में 1004 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिनमें से 50 में प्ले-स्कूल शुरू किए जाएंगे। सुपरवाइजरों और सीडीपीओ की ट्रेनिंग हो चुकी है, अब 41 केंद्रों पर उनकी प्रैक्टिस क्लास चल रही है। इसके बाद फिर दो दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। फिर ये आंगनबाड़ी वर्कर्स को ट्रेनिंग देंगे।
- बिमलेश कुमारी, जिला परियोजना अधिकारी
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