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Rohtak News: डॉ. विनय की बगिया के 300 पौधों से हर तरफ छाई हरियाली

Mon, 01 Jun 2026 05:28 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक Updated Mon, 01 Jun 2026 05:28 AM IST
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Dr. Vinay's garden is full of greenery with 300 plants everywhere.
01-बगिया में पौधों की देखभाल करतीं सेक्टर-14 निवासी डॉ. विनय गौड़। संवाद
रतन चंदेल
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रोहतक । घर-आंगन में लगाई बगिया हर किसी को आकर्षित करती है। यह न केवल घर की शोभा बढ़ाती है बल्कि मानसिक शांति और ताजी हवा भी देती है। 300 पेड़-पौधों वाली ऐसी ही बगिया सेक्टर 14 निवासी डॉ. विनय गौड़ ने बनाई है जिसकी हरियाली हर तरफ छाई हुई है।
एमबीबीएस, एमडी डॉ. विनय बताती हैं कि उन्होंने 22 साल पहले आंगन में बगिया लगाई थी। इसमें अब 300 से ज्यादा फूलदार, फलदार, औषधि व सजावटी पौधे हैं। उनका मानना है कि बगिया में जितने ज्यादा पेड़-पौधे और हरियाली होगी उतना ही सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहेगा। संवाद
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ये हैं यादगार पौधे
उनका कहना है कि बोगनवेलिया व आंवला के पौधे उनके लिए यादगार हैं। 2010 में एक बार आंधी आने पर बोगनवेलिया का पौधा टूट गया था। उसे दोबारा दूसरी जगह रोपा और लगातार उनकी देखभाल की। आज उस पर फूल लगे रहते हैं। बेटी इशानी की शादी में 2018 में घर में लगाया आंवले का पौधा भी यादगार है। उस पर भी फल लगते हैं।
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बगिया में इन प्रजातियों के पौधे
उनके गेट के बाहर से लेकर छत तक सैकड़ों पौधे हैं। इनमें बोगनवेलिया, गुलाब, गेंदा, लिली, गुलदाउदी, डेलिया, बेल फ्लावर्स की बेल, गुड़हल, विंका फ्लावर्स के अलावा विभिन्न प्रकार के मौसमी फूलों के पौधे हैं।
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पिता से मिली पौधे लगाने की प्रेरणा
पौधे लगाने की प्रेरणा उन्हें अपने पिता कैप्टन वीके शर्मा से मिली जो आर्मी ऑफिसर थे। उनको भी पौधों से बहुत लगाव था। मूलरूप से अंबाला की बेटी विनय बचपन में अपने पिता के साथ बगिया में पौधे लगाती थीं। तभी से उनकी रुचि पौधरोपण में हुई जो आज भी कायम है।
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इंग्लैंड में भी किया पौधरोपण
बेटी इशानी इंग्लैंड में अधिवक्ता हैं। वे जब बेटी के पास जाती हैं तो उनके घर में पौधरोपण करती हैं। अलग-अलग रंग और आकारों के पत्तों वाले पौधों को बगिया में लगाने का उन्हें बहुत शौक है। इसी कारण जब भी वे कहीं बाहर जाती हैं तो कोई पौधा लेकर आती है और उसे आंगन लगा देती हैं।

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देसी खाद का इस्तेमाल करती हैं
बगिया के पेड़-पौधों में वे देसी खाद का ही इस्तेमाल करती हैं। आंगन में गिरने वाले पत्तों के अलावा फल-सब्जियों के छिलके को भी खाद के रूप में इस्तेमाल करती हैं। घर-आंगन में लगे बड़े पौधों से ही छोटे पौधे भी तैयार करती हैं। उन्हें वे अपने जानकारों और रिश्तेदारों को गिफ्ट भी करती हैं।
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