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Rohtak News: अब मरीजों की पर्ची पर पढ़ने योग्य दवा लिखेंगे चिकित्सक
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19जेएनडी17-नागरिक अस्पताल के एक चिकित्सक द्वारा लिखी गई दवा और उपचार। संवाद
जींद। जिला मुख्यालय स्थित नागरिक अस्पताल में कार्यरत चिकित्सकों को अब मरीजों की पर्ची पर पढ़ने योग्य दवा का नाम लिखना होगा। पर्ची पर मरीजों के साथ-साथ केमिस्टों को भी चिकित्सकों की लिखी दवा समझ नहीं आती।
स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सकों को निर्देश दिए हैं कि वे मरीजों की पर्ची पर दवा का नाम साफ और पढ़ने योग्य (बड़े अक्षरों में) लिखना अनिवार्य करें।
अधिकारियों के पास शिकायतें पहुंच रही थी कि चिकित्सकों द्वारा ओपीडी स्लिप पर जो दवा लिखी जाती हैं वो अस्पताल में न मिलने पर जब मरीज बाहर से दवा लेने जाते हैं तो केमिस्टों को समझ नहीं आती। ऐसे में स्वास्थ्य अधिकारियों ने शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए सभी चिकित्सकों को साफ और स्पष्ट दवा और उपचार लिखने के लिए कहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं कि मरीज की पर्ची पर दवा साफ शब्दों में लिखी होनी चाहिए ताकि खराब लिखावट की वजह से गलत दवा या उपचार से बचा जा सके।
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चिकित्सकों को बड़े अक्षरों में दवा का नाम लिखना होगा जिसे मरीज या केमिस्ट आसानी से पढ़ सकें। इसका उद्देश्य है कि मरीजों के स्वास्थ्य का अधिकार (अनुच्छेद 21) को सुरक्षित किया जाए और गलत दवा के जोखिम को खत्म किया जाए। यह नियम न केवल सरकारी बल्कि निजी चिकित्सकों पर भी लागू किए गए हैं ताकि खराब लिखाई से होने वाली मेडिकल गलतियों को रोका जा सके।
नागरिक अस्पताल में रोजाना आते हैं 1700 मरीज
जिला मुख्यालय स्थित नागरिक अस्पताल में रोजाना करीब 1700 मरीज पहुंचते हैं। लगभग 50 चिकित्सक ओपीडी को देखते हैं। कई बार जल्दबाजी में चिकित्सक दवा शॉर्ट फॉर्म में लिख देते हैं जो न तो फार्मासिस्ट समझ पाते हैं और न किसी और को समझ आती है। ऐसे में मरीज को यह बोल दिया जाता है कि दवा उपलब्ध नहीं है। निजी केमिस्ट दुकानों पर भी मरीज को यही सुनने को मिलता है।
स्वास्थ्य महानिदेशक ने दिए स्पष्ट निर्देश
मरीजों को यह जानने और समझने का अधिकार है कि उन्हें कौन सी बीमारी है। किस दवा से उपचार किया जा रहा है। मरीजों को इस परेशानी को देखते हुए महानिदेशक ने निर्देश जारी किए हैं कि चिकित्सक ओपीडी पर्ची पर साफ और बड़े अक्षरों में दवा एवं जांच लिखेंगे।
वर्जन
महानिदेशक ने पत्र जारी कर सभी चिकित्सकों को हिदायत दी हैं। आदेशों का सख्ती से पालन करवाया जाएगा। सभी चिकित्सकों को मरीजों की पर्ची पर दवा का नाम व उपचार साफ और पढ़ने योग्य लिखने के निर्देश जारी किए हैं। -डॉ. राजेश भोला, डिप्टी एमएस, नागरिक अस्पताल जींद
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स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सकों को निर्देश दिए हैं कि वे मरीजों की पर्ची पर दवा का नाम साफ और पढ़ने योग्य (बड़े अक्षरों में) लिखना अनिवार्य करें।
अधिकारियों के पास शिकायतें पहुंच रही थी कि चिकित्सकों द्वारा ओपीडी स्लिप पर जो दवा लिखी जाती हैं वो अस्पताल में न मिलने पर जब मरीज बाहर से दवा लेने जाते हैं तो केमिस्टों को समझ नहीं आती। ऐसे में स्वास्थ्य अधिकारियों ने शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए सभी चिकित्सकों को साफ और स्पष्ट दवा और उपचार लिखने के लिए कहा है।
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स्वास्थ्य विभाग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं कि मरीज की पर्ची पर दवा साफ शब्दों में लिखी होनी चाहिए ताकि खराब लिखावट की वजह से गलत दवा या उपचार से बचा जा सके।
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चिकित्सकों को बड़े अक्षरों में दवा का नाम लिखना होगा जिसे मरीज या केमिस्ट आसानी से पढ़ सकें। इसका उद्देश्य है कि मरीजों के स्वास्थ्य का अधिकार (अनुच्छेद 21) को सुरक्षित किया जाए और गलत दवा के जोखिम को खत्म किया जाए। यह नियम न केवल सरकारी बल्कि निजी चिकित्सकों पर भी लागू किए गए हैं ताकि खराब लिखाई से होने वाली मेडिकल गलतियों को रोका जा सके।
नागरिक अस्पताल में रोजाना आते हैं 1700 मरीज
जिला मुख्यालय स्थित नागरिक अस्पताल में रोजाना करीब 1700 मरीज पहुंचते हैं। लगभग 50 चिकित्सक ओपीडी को देखते हैं। कई बार जल्दबाजी में चिकित्सक दवा शॉर्ट फॉर्म में लिख देते हैं जो न तो फार्मासिस्ट समझ पाते हैं और न किसी और को समझ आती है। ऐसे में मरीज को यह बोल दिया जाता है कि दवा उपलब्ध नहीं है। निजी केमिस्ट दुकानों पर भी मरीज को यही सुनने को मिलता है।
स्वास्थ्य महानिदेशक ने दिए स्पष्ट निर्देश
मरीजों को यह जानने और समझने का अधिकार है कि उन्हें कौन सी बीमारी है। किस दवा से उपचार किया जा रहा है। मरीजों को इस परेशानी को देखते हुए महानिदेशक ने निर्देश जारी किए हैं कि चिकित्सक ओपीडी पर्ची पर साफ और बड़े अक्षरों में दवा एवं जांच लिखेंगे।
वर्जन
महानिदेशक ने पत्र जारी कर सभी चिकित्सकों को हिदायत दी हैं। आदेशों का सख्ती से पालन करवाया जाएगा। सभी चिकित्सकों को मरीजों की पर्ची पर दवा का नाम व उपचार साफ और पढ़ने योग्य लिखने के निर्देश जारी किए हैं। -डॉ. राजेश भोला, डिप्टी एमएस, नागरिक अस्पताल जींद