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Rohtak: दो माह पहले किशोरी ने निगल ली थी पिन, PGIMS के PCCM विभाग ने तीन घंटे का सफल ऑपरेशन कर निकाली

Sun, 18 Dec 2022 09:01 AM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sun, 18 Dec 2022 09:01 AM IST
सार

पिन फेफड़े के निचले हिस्से में पहुंच गई। इस कारण वह खांसी से परेशान थी। किशोरी के फेफड़े से तीन घंटे के ऑपरेशन के बाद पिन निकाली गई। PGIMS के PCCM विभाम में  इलाज हुआ।

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Doctors of PGI Rohtak removed the pin from the lungs of the teenager after three hours of operation
रोहतक पीजीआई में बच्ची के फेफडे़ से पिन निकालने वाली चिकित्सकों की टीम। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फेफड़े में दो माह से फंसी नुकीली पिन का दर्द और खांसी से परेशान किशोरी को आखिर राहत मिल ही गई। हरियाणा के रोहतक में पीजीआई के डॉक्टरों की टीम ने बच्ची का ऑपरेशन कर पिन निकाल दी है। ऑपरेशन के बाद दो दिन वेंटिलेटर पर रही किशोरी अब स्वस्थ व खतरे से बाहर है। संस्थान के पल्मनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में किशोरी का इलाज किया गया। 
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पीजीआईएमएस के पल्मनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पवन ने बताया कि करीब दो माह पहले 13 वर्षीय लड़की ने गलती से पिन निगल ली थी। यह उसके सांस के रास्ते फेफड़े में चली गई। पिन फेफड़े के निचले हिस्से में पहुंच गई। इस कारण वह खांसी से परेशान थी। खांसी बढ़ने के साथ उसे बुखार भी रहने लगा। सांस लेने में दिक्कत आने पर वह पिछले सप्ताह पीजीआइएमएस में जांच के लिए पहुंची। 
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डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच में पाया कि लड़की का ऑक्सीजन लेवल कम हो रहा था। विभागाध्यक्ष डॉ. ध्रुव चौधरी के निर्देशन में लड़की का सिटी स्कैन कराया गया। इसमें बाएं फेफड़े के नीचे वाले हिस्से में पिन फंसी नजर आई।
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इस पर मांस की परत भी जम गई थी। उसकी जान बचाने के लिए निश्चेतन विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेश सिंघल की टीम व ईएनटी विभाग के चिकित्सकों के साथ मिलकर टीम तैयार की गई। टीम ने लड़की का ऑपरेशन शुरू किया। 


ऑपरेशन कर निकाली पिन।

डॉ. पवन ने बताया कि ऑपरेशन की शुरुआत में काफी कठिनाई आई। ब्रोंकोस्कॉपी के माध्यम से पिन निकालने की कोशिश करने पर लड़की का ऑक्सीजन लेवल अचानक गिर जाता। ऐसे में निश्चेतन विभाग के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। इसलिए लड़की का जीवन बचाने के लिए चिकित्सकों ने ऑपरेशन का फैसला लिया।

इसके बाद वेंटिलेटर पर लेकर उसे पूर्ण रूप से बेहोश करने के बाद रिजीड ब्रोंकोस्कॉपी ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन करीब तीन घंटे चला। इस दौरान फेफड़े से पिन निकाली गई। ऑपरेशन के बाद लड़की दो दिन वेंटिलेटर पर रही। अब वह पूर्ण रूप से स्वस्थ है।

उसे शनिवार को घर भेज दिया गया। इस जटिल ऑपरेशन में डॉ. अमन आहूजा, डॉ. अनामिका, डॉ. ममता जैन, टेक्नीशियन अशोक कुमार व सुनील ने अपना योगदान दिया। बैकअप के तौर पर ईएनटी विभाग से डॉ. चांदनी की टीम भी तैयार रही। 


पल्मनरी विभाग की ओर से इस प्रकार का जटिल ऑपरेशन पहली बार हुआ है। इस सफल ऑपरेशन का श्रेय डॉ. पवन व उनकी टीम को जाता है। इन्होंने मरीज को मौत के मुंह से सुरक्षित निकालने का काम किया है। यह संस्थान की भी बड़ी उपलब्धि है। -डॉ. ध्रुव चौधरी, अध्यक्ष, पल्मनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग, पीजीआई।
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