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दिल्ली की छह सदस्यीय टीम पहुंची, सात घंटे तक की पटरियों की जांच

Fri, 06 Aug 2021 01:27 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 06 Aug 2021 01:27 AM IST
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Delhi's six-member team arrived, checking the tracks for seven hours
मालगाड़ी के डिब्बे को हाइड्रोलिक जैक लगाकर पटरी पर रखते रेलवे के कर्मचारी। अमर उजाला
रोहतक स्टेशन पर बुधवार को कोयले से लदी मालगाड़ी के दो डिब्बे पटरी से उतर गए थे। मामले की जांच के लिए बुधवार की देर रात ही दिल्ली की छह सदस्यीय टीम मौके पर पहुंच गई। इस दौरान टीम ने करीब सात घंटे तक पटरियों की जांच की। साथ ही मालगाड़ी के लोको पायलट व गार्ड से पूछताछ भी की। वीरवार की अल सुबह हाइड्रोलिक मशीनों की मदद से दोनों डिब्बों को पटरी पर रखा गया। टीम के सदस्यों ने एलाइनमेंट जांच के लिए डिब्बों को दिल्ली भेजा है। टीम शुक्रवार को अपनी जांच रिपोर्ट रेलवे मुख्यालय को सौंपेगी।
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बिहार से 59 डिब्बों में कोयला भरकर भिवानी की तरफ जा रही मालगाड़ी प्लेटफार्म नंबर-तीन की मुख्य ट्रैक से बुधवार रात करीब 11:00 बजे धीमी रफ्तार में गुजर रही थी। इसी बीच 26वां वैगन पूरी तरह से और 27वां वैगन आंशिक रूप से पटरी से उतर गया। इस दौरान 26वां वैगन करीब 30 मीटर से ज्यादा दूरी तक घिसटता चला गया। इससे ट्रैक के 60 से ज्यादा स्लीपर भी टूट गए। हादसे की सूचना मिलने पर स्थानीय अधिकारी मौके पर पहुंच गए थे। वहीं, सूचना मिलते ही दिल्ली मुख्यालय ने दुर्घटना यान के संग पांच उच्चाधिकारी राजेश कौशिक, अरविंद, मंगल सिंह, नागेश शर्मा व राजवीर दांगी को रवाना कर दिया। रात डेढ़ बजे मौके पर पहुंची टीम ने राहत कार्य शुरू किया। इस दौरान दिल्ली से आए अधिकारियों ने हादसे की वजह जानने के लिए टूटी पटरियों के साथ उसके एलाइनमेंट को भी जांचा। वीरवार की सुबह करीब 5:40 बजे पर दोनों डिब्बों को पटरी पर रखा गया। इसके बाद दिल्ली से आई टीम के आदेश पर दोनों कोच का एलाइनमेंट चेक करने के लिए दिल्ली रवाना किया।
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रिपोर्ट मुख्यालय भेजने के दिए आदेश
दिल्ली से आई टीम ने स्थानीय अधिकारियों की गठित छह सदस्यीय टीम से प्राथमिक जांच के बाद रिपोर्ट मुख्यालय भेजने के आदेश दिए हैं। जांच टीम में टीआई बलवीर सिंह, सीडीओ हरिओम शर्मा, एसएससी सिग्नल भूपेंद्र सिंह, सीएलआई जगत सिंह हांडा, सीएमआई पंकज राजपाल व एसएसई एसके भटनागर ने कई घंटे निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट तैयार की है। हादसे की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए टीम के सदस्यों ने करीब पांच घंटे तक मंथन किया।
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आठ किमी प्रति घंटा की थी रफ्तार, तेज होती तो हादसा होता गंभीर
रेलवे स्टेशन से मालगाड़ी आठ किमी. प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही थी। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यदि रफ्तार थोड़ी ज्यादा होती तो कई डिब्बे पटरी से उतर जाते।
शकूर बस्ती से सवार हुए थे लोको पायलट व गार्ड
छह सदस्यीय टीम के पूछताछ के लिए बुलाने पर लोको पायलट शब्बीर अंसारी और गार्ड लखबिंदर सिंह ने बताया कि वह शकूर बस्ती से ट्रेन में सवार हुए थे। रास्ते में किसी भी वैगन में कोई दिक्कत नहीं थी। रोहतक पहुंचने के बाद मालगाड़ी के डिब्बों में गड़बड़ी आई।
पटरियों के टुकड़ों की भी जांच करेगी रेलवे
जिस क्रॉसिंग पर डिब्बा बेपटरी हुआ, वहां पटरी के कई टुकड़े हो गए। जांच टीम ने इन टुकड़ों को अपने कब्जे में ले लिया है। इनकी जांच कराई जाएगी।
एलाइनमेंट बिगड़ने के कारण डिब्बों के पटरी से उतरने की आशंका
एलाइनमेंट बिगड़ने के कारण डिब्बों के पटरी से उतरने की आशंका है। पटरियों की जांच कर ली गई है और एलाइनमेंट जांच के लिए दोनों डिब्बे दिल्ली भेज दिए गए हैं। इसके अलावा कई बिंदुओं पर भी जांच की जा रही है, जिसके चलते मालगाड़ी के लोको पायलट व गार्ड से भी पूछताछ की गई है।
-जगत सिंह हांडा, छह सदस्यीय जांच टीम के सदस्य
कई बिंदुओं पर चल रही है जांच
रोहतक में बुधवार की रात मालगाड़ी के वैगन पटरी से क्यों उतर गए। इसकी जांच कराई जा रही है। इसके लिए एक कमेटी भी गठित कर दी गई है। 24 जुलाई को भी एक मालगाड़ी का वैगन पटरी से उतरने की जांच चल रही है। खड़ी गाड़ी में आग लगने का मामला अलग है। उसकी कई बिंदुओं पर जांच चल रही है।

-दीपक, सीपीआरओ रेलवे
साढ़े तीन माह में तीन हादसे, जांच एक की भी नहीं पूरी
रोहतक। साढ़े तीन माह में तीन हादसे हो चुके हैं, लेकिन अभी तक एक की भी जांच पूरी नहीं हुई है। हैरानी यह है कि दो हादसे की जांच रिपोर्ट 15 दिन में सौंपनी थी। इसके बावजूद कोई भी रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है। 24 जुलाई को स्टेशन की गुड्स लाइन पर मालगाड़ी का एक डिब्बा पटरी से उतर गया था। क्रेन से करीब तीन घंटे में डिब्बा पटरी पर रखा गया। इसकी जांच रेलवे अधिकारियों ने शुरू की, जो अभी तक पूरी नहीं हुई है। मामले में एक प्वाइंट मैन को साहिबाबाद स्थानांतरित कर दिया गया। अभी तक किसकी लापरवाही से वैगन बेपटरी हुआ, इसका पता नहीं चल सका है। आठ अप्रैल को डाउन यार्ड में खड़ी ईएमयू (इलेक्ट्रो मोटिव यूनिट) के चार डिब्बे जलकर बर्बाद हो गए थे। हादसा गंभीर होने पर रेलवे बोर्ड ने एजीएम नवीन गुलाटी व प्रिंसिपल चीफ सेफ्टी ऑफिसर सीमा कुमार को स्पेशल ट्रेन से जांच के लिए भेजा। दोनों अधिकारियों ने 15 दिन में जांच रिपोर्ट सौंपने का वादा किया, लेकिन हैरानी की बात है कि अभी तक जांच ही पूरी नहीं हो सकी है। अब एजीएम रेलवे का कहना है कि फोरेंसिक जांच रिपोर्ट का इंतजार है। जांच हरियाणा सरकार की टीम ने की थी। फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
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