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दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान व पंजाब में एमबीबीएस की स्टेट सीटों पर विवाद
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संजय कुमार
रोहतक। एमबीबीएस की 85 फीसदी स्टेट कोटे की सीट पर दाखिला पाने के लिए दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान व पंजाब के अभ्यर्थी अलग-अलग राज्यों में अपनी सीट के लिए दावा पेश कर रहे हैं। ऐसे में हर साल विवाद उठता है कि एक अभ्यर्थी दो राज्यों में कैसे आवेदन कर सकता है। इसी आधार पर इस साल पंजाब पेरेंट्स एसोसिएशन ने एसएसपी फरीदकोट बचमन सिंह संधू को 60 अभ्यर्थियों की लिखित शिकायत दी है और इन सभी के रिहायशी प्रमाण पत्र जांच करवाने की मांग की है। पीजीआईएमएस रोहतक ने इन अभ्यर्थियों की डिटेल जांच करवा कर एसएसपी फरीदकोट को भेज दी है।
एसोसिएशन के सदस्य नवदीप शर्मा ने बताया कि उत्तर भारत में एमबीबीएस की स्टेट कोटे की सीटों के लिए फर्जी रिहायश प्रमाण पत्र बनवा कर खेल खेला जाता है। दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश में अभ्यर्थी इस तरह की गड़बड़ी अधिक करते हैं। एक अभ्यर्थी अलग-अलग राज्यों में अपनी सीट के लिए दावा करता है। इससे अच्छे नंबर वाले अभ्यर्थी का चयन नहीं हो पाता है। उन्होंने पंजाब में आवेदन करने वालों के तथ्य जुटाए तो 60 अभ्यर्थी ऐसे मिले जिन्होंने हरियाणा में भी आवेदन किया है। इसके अलावा कुछ ने दिल्ली, राजस्थान व हिमाचल प्रदेश किया है। इस पर एसोसिएशन ने 60 की लिस्ट जांच के लिए एसएसपी को दी थी। पुलिस अधिकारी के निर्देशों पर पीजीआईएमएस रोहतक ने डीएमईआर चंडीगढ़ से सभी का रिकार्ड मंगवा कर अपनी रिपोर्ट भिजवा दी है।
उन्होंने बताया कि जांच रिपोर्ट में पता चला है कि 53 अभ्यर्थी ने हरियाणा व पंजाब दोनों जगह आवेदन किया है। इस संबंध में जब उन्होंने पंजाब हेल्थ विवि में संपर्क किया तो संतोषजनक जवाब नहीं मिला और उन्होंने अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। गौरतलब है कि दिल्ली, हरियाणा में काउंसिलिंग हो चुकी है और पंजाब में अभी होना बाकी है। पंजाब में जिन्होंने आवेदन किया है, उनमें से कुछ ने दिल्ली में भी किया है।
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यह है विवाद
कुछ विद्यार्थी अपने पड़ोसी राज्यों से 11वीं व 12वीं की परीक्षा पास करते हैं। ऐसे में वह उसी राज्य में और अपने मूल राज्य में एमबीबीएस की सीट के लिए आवेदन कर देते हैं। एक्सपर्ट बताते हैं कि यह कमी हेल्थ विवि के नियमों में है कि वह 12वीं व रिहायश प्रमाण पत्र दोनों को एक साथ नहीं मांगती। इसलिए अभ्यर्थी एक जगह 12वीं का सर्टिफिकेट व दूसरी जगह रिहायश प्रमाण पत्र जमा कर देते हैं। अब समस्या यह है कि इस बात की जांच कौन करें कि एक अभ्यर्थी दो अलग-अलग राज्यों का रिहायश प्रमाण पत्र जमा कर गड़बड़ कर रहा है या नहीं।
हमारे पास पंजाब के फरीदकोर्ट एसएसपी की ओर जो जवाब मांगा गया था, वह भिजवा दिया गया है। इसमें 60 अभ्यर्थियों की लिस्ट के साथ जानकारी मांगी गई थी। हमने हेल्थ विवि के नियमानुसार काउंसिलिंग की है, यदि कहीं कोई गड़बड़ है तो जांच के बाद तथ्य सामने आ जाएंगे। फिलहाल हमारे यहां सारा कार्य नियमानुसार हुआ है।
- डॉ. एचके अग्रवाल, रजिस्ट्रार, पीजीआईएमएस
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रोहतक। एमबीबीएस की 85 फीसदी स्टेट कोटे की सीट पर दाखिला पाने के लिए दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान व पंजाब के अभ्यर्थी अलग-अलग राज्यों में अपनी सीट के लिए दावा पेश कर रहे हैं। ऐसे में हर साल विवाद उठता है कि एक अभ्यर्थी दो राज्यों में कैसे आवेदन कर सकता है। इसी आधार पर इस साल पंजाब पेरेंट्स एसोसिएशन ने एसएसपी फरीदकोट बचमन सिंह संधू को 60 अभ्यर्थियों की लिखित शिकायत दी है और इन सभी के रिहायशी प्रमाण पत्र जांच करवाने की मांग की है। पीजीआईएमएस रोहतक ने इन अभ्यर्थियों की डिटेल जांच करवा कर एसएसपी फरीदकोट को भेज दी है।
एसोसिएशन के सदस्य नवदीप शर्मा ने बताया कि उत्तर भारत में एमबीबीएस की स्टेट कोटे की सीटों के लिए फर्जी रिहायश प्रमाण पत्र बनवा कर खेल खेला जाता है। दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश में अभ्यर्थी इस तरह की गड़बड़ी अधिक करते हैं। एक अभ्यर्थी अलग-अलग राज्यों में अपनी सीट के लिए दावा करता है। इससे अच्छे नंबर वाले अभ्यर्थी का चयन नहीं हो पाता है। उन्होंने पंजाब में आवेदन करने वालों के तथ्य जुटाए तो 60 अभ्यर्थी ऐसे मिले जिन्होंने हरियाणा में भी आवेदन किया है। इसके अलावा कुछ ने दिल्ली, राजस्थान व हिमाचल प्रदेश किया है। इस पर एसोसिएशन ने 60 की लिस्ट जांच के लिए एसएसपी को दी थी। पुलिस अधिकारी के निर्देशों पर पीजीआईएमएस रोहतक ने डीएमईआर चंडीगढ़ से सभी का रिकार्ड मंगवा कर अपनी रिपोर्ट भिजवा दी है।
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उन्होंने बताया कि जांच रिपोर्ट में पता चला है कि 53 अभ्यर्थी ने हरियाणा व पंजाब दोनों जगह आवेदन किया है। इस संबंध में जब उन्होंने पंजाब हेल्थ विवि में संपर्क किया तो संतोषजनक जवाब नहीं मिला और उन्होंने अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। गौरतलब है कि दिल्ली, हरियाणा में काउंसिलिंग हो चुकी है और पंजाब में अभी होना बाकी है। पंजाब में जिन्होंने आवेदन किया है, उनमें से कुछ ने दिल्ली में भी किया है।
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यह है विवाद
कुछ विद्यार्थी अपने पड़ोसी राज्यों से 11वीं व 12वीं की परीक्षा पास करते हैं। ऐसे में वह उसी राज्य में और अपने मूल राज्य में एमबीबीएस की सीट के लिए आवेदन कर देते हैं। एक्सपर्ट बताते हैं कि यह कमी हेल्थ विवि के नियमों में है कि वह 12वीं व रिहायश प्रमाण पत्र दोनों को एक साथ नहीं मांगती। इसलिए अभ्यर्थी एक जगह 12वीं का सर्टिफिकेट व दूसरी जगह रिहायश प्रमाण पत्र जमा कर देते हैं। अब समस्या यह है कि इस बात की जांच कौन करें कि एक अभ्यर्थी दो अलग-अलग राज्यों का रिहायश प्रमाण पत्र जमा कर गड़बड़ कर रहा है या नहीं।
हमारे पास पंजाब के फरीदकोर्ट एसएसपी की ओर जो जवाब मांगा गया था, वह भिजवा दिया गया है। इसमें 60 अभ्यर्थियों की लिस्ट के साथ जानकारी मांगी गई थी। हमने हेल्थ विवि के नियमानुसार काउंसिलिंग की है, यदि कहीं कोई गड़बड़ है तो जांच के बाद तथ्य सामने आ जाएंगे। फिलहाल हमारे यहां सारा कार्य नियमानुसार हुआ है।
- डॉ. एचके अग्रवाल, रजिस्ट्रार, पीजीआईएमएस