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Rohtak News: मैनहोल में बुला रही थी मौत...बचाने के फेर में तीनों ही समा गए
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04सीटीके14..पापा भाई को वापस बुला दो बुआ.......रोहतक के गांव माजरा में बुधवार को सीवर खोलते समय
रोहतक। माजरा गांव के पूर्व सूबेदार और उनके दो बेटों को निवाला बनाने आई मौत ने मैनहोल को ही ठिकाना बना रखा था। वह बुलाती-फंसाती रही और बाप-बेटे बचाने के फेर में गिरते-समाते चले गए। तीनों के लिए जहरीली गैस काल बन गई, अन्यथा आठ फीट गहरे मैनहोल में तो घुटने बराबर भी पानी नहीं था। अफसरों ने सीवर लाइन जाम होने से भी इन्कार किया है।
बुधवार को मौत ने पूर्व सूबेदार महाबीर के घर कोहराम मचाने की ठानी थी। तभी, उनके साथ दो जवान बेटों लक्ष्मण और दीपक के जीवन की कश्ती ऐसे मैनहोल में डूब गई, जहां पानी ही बमुश्किल घुटने के बराबर था।
जनस्वास्थ्य विभाग के अफसरों के मुताबिक, करीब एक साल पहले यह सीवर लाइन नगर निगम ने डाली थी। इसका एक एजेंसी को ठेका दिया गया था। इसके इतनी जल्दी जाम होने का सवाल ही नहीं है।
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बाप-बेटों की मौत के बाद नौ गुणा ढाई फीट के आकार वाले मैनहोल की जांच में भी यहां सिर्फ डेढ़ फीट ही पानी मिला। अफसरों का दावा है कि सीवर लाइन जाम नहीं थी। अफसरों ने मृतक के घर की ही लाइन में जाम की आशंका जताई है। इसका अंदाजा नहीं होने के कारण वे मैनहोल को खोलने में जान गंवा बैठे।
नगर निगम के अधिकारियों ने कहा कि नई सीवर लाइन डाली गई है। इसमें कोई समस्या भी नहीं आई। जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे अधिकारियों ने कहा कि महाबीर ने सीवर जाम के बारे में कोई शिकायत भी नहीं की थी।
आज डीसी को भेजेंगे रिपोर्ट
नगर निगम और जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अपनी प्राथमिक जांच रिपोर्ट वीरवार को उपायुक्त (डीसी) को सौंपेंगे। अफसरों का दावा है कि सीवर लाइन में कोई खामी नहीं मिली है। यह डीसी पर निर्भर है कि वह आगे इसकी जांच कराते हैं या नहीं।
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पूर्व सूबेदार और उनके दो बेटों के परिजनों की ओर से सामान्य हादसे का केस दर्ज कराया गया है। उन्होंने किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया है। अगर आरोप लगाते हैं तो उसके आधार पर कार्रवाई करेंगे।
रवि खुंडिया, डीएसपी मुख्यालय रोहतक।
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महाबीर के घर के सामने सीवर लाइन जांच में जाम नहीं मिली है। आठ फीट गहरे मैनहोल में केवल डेढ़ फीट ही पानी था। सीवर लाइन भी नई डाली गई है, जिसमें अभी तक कोई समस्या नहीं आई। घर की निजी लाइन के जाम होने की आशंका है।
- संजीव कुमार, कार्यकारी अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग।
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पहले भी जान ले चुकी है सीवर लाइन की गैस
केस-1 : 19 फरवरी 2017 को आईएमटी स्थित मारुति कंपनी के टेस्टिंग सेंटर में ठेकेदार की लापरवाही के कारण बगैर सुरक्षा उपकरणों के सीवर लाइन में उतरे दो कर्मचारियों की जहरीली गैस से जान चली गई थी।
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केस-2 : 26 जून 2019 को कच्चा बेरी रोड फाटक के पास मीट मार्केट के पीछे बने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में चार मजदूर सफाई करने उतरे थे। जहरीली गैस के रिसाव से चारों सफाईकर्मियों की मौत हो गई थी।
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केस-3 : 22 नवंबर 2023 को बीएमयू के सामने स्थित काॅलोनी में सीवर लाइन की सफाई के दौरान दिल्ली निवासी विकास व यूपी निवासी सुरेश जहरीली गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गए। शुक्र रहा कि उन्हें तुरंत निकाल लिया गया और वे बच गए।
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बुधवार को मौत ने पूर्व सूबेदार महाबीर के घर कोहराम मचाने की ठानी थी। तभी, उनके साथ दो जवान बेटों लक्ष्मण और दीपक के जीवन की कश्ती ऐसे मैनहोल में डूब गई, जहां पानी ही बमुश्किल घुटने के बराबर था।
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जनस्वास्थ्य विभाग के अफसरों के मुताबिक, करीब एक साल पहले यह सीवर लाइन नगर निगम ने डाली थी। इसका एक एजेंसी को ठेका दिया गया था। इसके इतनी जल्दी जाम होने का सवाल ही नहीं है।
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बाप-बेटों की मौत के बाद नौ गुणा ढाई फीट के आकार वाले मैनहोल की जांच में भी यहां सिर्फ डेढ़ फीट ही पानी मिला। अफसरों का दावा है कि सीवर लाइन जाम नहीं थी। अफसरों ने मृतक के घर की ही लाइन में जाम की आशंका जताई है। इसका अंदाजा नहीं होने के कारण वे मैनहोल को खोलने में जान गंवा बैठे।
नगर निगम के अधिकारियों ने कहा कि नई सीवर लाइन डाली गई है। इसमें कोई समस्या भी नहीं आई। जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे अधिकारियों ने कहा कि महाबीर ने सीवर जाम के बारे में कोई शिकायत भी नहीं की थी।
आज डीसी को भेजेंगे रिपोर्ट
नगर निगम और जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अपनी प्राथमिक जांच रिपोर्ट वीरवार को उपायुक्त (डीसी) को सौंपेंगे। अफसरों का दावा है कि सीवर लाइन में कोई खामी नहीं मिली है। यह डीसी पर निर्भर है कि वह आगे इसकी जांच कराते हैं या नहीं।
पूर्व सूबेदार और उनके दो बेटों के परिजनों की ओर से सामान्य हादसे का केस दर्ज कराया गया है। उन्होंने किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया है। अगर आरोप लगाते हैं तो उसके आधार पर कार्रवाई करेंगे।
रवि खुंडिया, डीएसपी मुख्यालय रोहतक।
महाबीर के घर के सामने सीवर लाइन जांच में जाम नहीं मिली है। आठ फीट गहरे मैनहोल में केवल डेढ़ फीट ही पानी था। सीवर लाइन भी नई डाली गई है, जिसमें अभी तक कोई समस्या नहीं आई। घर की निजी लाइन के जाम होने की आशंका है।
- संजीव कुमार, कार्यकारी अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग।
पहले भी जान ले चुकी है सीवर लाइन की गैस
केस-1 : 19 फरवरी 2017 को आईएमटी स्थित मारुति कंपनी के टेस्टिंग सेंटर में ठेकेदार की लापरवाही के कारण बगैर सुरक्षा उपकरणों के सीवर लाइन में उतरे दो कर्मचारियों की जहरीली गैस से जान चली गई थी।
केस-2 : 26 जून 2019 को कच्चा बेरी रोड फाटक के पास मीट मार्केट के पीछे बने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में चार मजदूर सफाई करने उतरे थे। जहरीली गैस के रिसाव से चारों सफाईकर्मियों की मौत हो गई थी।
केस-3 : 22 नवंबर 2023 को बीएमयू के सामने स्थित काॅलोनी में सीवर लाइन की सफाई के दौरान दिल्ली निवासी विकास व यूपी निवासी सुरेश जहरीली गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गए। शुक्र रहा कि उन्हें तुरंत निकाल लिया गया और वे बच गए।