फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   cyber crime

साइबर क्राइम : ऑनलाइन एप्लीकेशन डाउनलोड या कस्टमर केयर पर कॉल करने पर लोगों के साथ हो रही ठगी, पुलिस ने जारी की एडवाइजरी

Fri, 13 Sep 2019 02:48 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 13 Sep 2019 02:48 AM IST
विज्ञापन
cyber crime
अब आप अपने स्मार्ट मोबाइल फोन में गूगल प्ले स्टोर या किसी अन्य बेवसाइटों से एप या प्रोग्राम डाउनलोड सोच-समझ कर ही करें। ऐसा करने पर कई गैरवांछित एप भी डाउनलोड रहे हैं, जिनके जरिए आपके खाते की जानकारी लीक हो रही है। यहां तक कि जियो-4 या अन्य ऑफर के बहाने भी ट्रूकॉलर से एंड्रॉयड मोबाइल इस्तेमाल करने वालों के लिए खतरा बढ़ा गया है। जरा सी चूक होने से साइबर अपराधी पलभर में आपके खाते में सेंध लगा दे रहे हैं। पुलिस ने लोगों को चेताते हुए बिना जरूरत के एप को एक्सेस करने की अनुमति न देने की हिदायत दी है। एसपी राहुल शर्मा ने पुलिसकर्मियों को भी लोगों को साइबर क्राइम से बचने के लिए जागरूक करने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन

आमतौर पर ऐसे मामलों में जब तक पुलिस मामला दर्ज करती है तब तक काफी देर हो चुकी होती है। ज्यादातर मामलों में साइबर अपराधी पकड़ में नहीं आते। पुलिस का कहना है कि स्मार्ट फोन पर नए-नए एप डाउनलोड करते समय लोग सावधानी बरतें। ऐसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
विज्ञापन

एसपी ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति अपने स्मार्ट फोन में गूगल प्ले स्टोर, आईओएस या किसी अन्य एप्लीकेशन स्टोर के जरिए कोई एप्लीकेशन अपने डिवाइस में इंस्टॉल करता है तो वह फोन में विभिन्न सूचनाओं के पहुंच की अनुमति दे बैठता है। एप मुख्य रूप से फोन में मौजूद संपर्क नंबर, कैमरा, फाइल, फोटो गैलरी या लोकेशन को एक्सेस करने की अनुमति मांगता है। ऐसे में कई जरूरी जानकारी भी साझा हो जाती है। उनका सुझाव है कि एप डाउनलोड करते समय जिनकी जरूरत न हो, उन्हें कतई इजाजत न दें। अन्यथा एप उपयोगकर्ता के डिवाइस से जानकारी देने की अनुमति देने के बाद साइबर अपराधी उसका दुरुपयोग कर सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

उपयोगकर्ता को नियमित रूप से एप के जरिए दी गई अनुमति की जांच करनी चाहिए, क्योंकि समय के साथ कई कारणों जैसे एप्लीकेशन अपडेट या ओएस अपग्रेड होने के कारण अनुमति में बदलाव आ सकते हैं।
इनके जरिए हैक हो रहा डाटा हो
गूगल प्ले स्टोर पर पीयूपी (पोटेंशियली अनवांटेड प्रोग्राम्स) और पीयूए (पोटेंशियली अनवांटेड एप्लीकेशंस) की बढ़ती उपस्थिति के चलते एंड्रायड मोबाइल उपयोगकर्ताओं पर खतरा बढ़ गया है। फोटो एडिटर्स, ब्यूटिफिकेशन फिल्टर एप, म्यूजिक प्लेयर, इक्वालाइजर्स, फेक मॉनीटर या स्पाइंग एप और फेक एंटी वायरस एप के जरिए भी अहम जानकारियां लीक हो रही हैं।
ये रखें ध्यान
- अपने मोबाइल फोन में अनावश्यक एप को इंस्टाल न करें।
- यदि जरूरी हो तो एप इंस्टॉल करते समय मांगी गई अनुमति के बारे में सावधान रहें और अनावश्यक अनुमति देने से बचें।
- यदि अनुमति अनिवार्य है तो ऐसे एप का उपयोग करने पर एप स्वचालित रूप से सूचित कर देगा।
- मय-समय पर अपने डिवाइस पर इंस्टॉल किए गए एप की अनुमति की समीक्षा करें।
- यदि कोई एप कुछ अस्वीकृत अनुमतियों के साथ काम नहीं करता है। ऐसे एप को इंस्टॉल न करें।
केस -1
बोहर गांव के सुनील ने ऑनलाइन आर्डर को रिटर्न किया था, लेकिन उसकी पेंमेट नहीं आई थी। कंपनी के कस्टमर केयर से बात की तो उन्होंने एक एप डाउनलोड करवाई जिसके कारण खाते में 40 हजार रुपये निकाल लिए गए थे। अभी तक साइबर ठगो का कोई सुराग नही लग पाया है। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया था। लेकिन आरोपी का अभी तक कुछ पता नही लग पाया।

केस-2
प्रेम नगर के रणधीर के पास फोन आया कि आप एक ऐप डाउनलोड करे, जिसके कारण आपको घर बैठे-बैठे केश बैक मिलता रहेगा। पीड़ित से मांगी गई डिटेल के कारण कालर ने खाते से सताईस हजार साफ कर दिए। पीड़ित के पास फोन पर कोई मेसेज भी प्राप्त नही हुआ था। तीन दिन बाद एटीएम से पैसे निकालने गया तो पता चला की खाते से 27 हजार रुपये निकले हुए है। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस मामले की जांच कर रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed