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करोड़ों खर्च फिर भी पेयजल संकट, अब 300 करोड़ खर्च का खाका तैयार
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तृतीय जलघर में बना वाटर टैंक। संवाद
रोहतक। शहर की करीब छह लाख आबादी का शायद ही ऐसा कोई माह गुजरता होगा, जब पेयजल संकट से उन्हें जूझना न पड़ता हो। ऐसा नहीं है कि इससे जनप्रतिनिधि अथवा अफसर अनभिज्ञ है। अफसर इसका निदान करने के लिए अमरूत-एक योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च भी कर चुके हैं मगर परिणाम फिलहाल शून्य है।
अब अमरूत-दो में सुचारु पेयजल सप्लाई के लिए करीब 300 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बनाया है। जिसमें सोनीपत रोड पर पंपिंग स्टेशन बनाना प्रस्तावित है। दावा है कि इसके बनने से जलघरों में पानी का भंडारण पर्याप्त होगा।
शहर की आबादी को रोजाना 95 एमएलडी (9.5 करोड़ लीटर) पानी चाहिए। फिलहाल शहर में चार जलघर मानसरोवर पार्क, झज्जर रोड, देव कॉलोनी व सोनीपत रोड से पेयजल आपूर्ति होती है। इन जलघरों में कच्चे पानी की भंडारण क्षमता 90.88 करोड़ लीटर है। चूंकि शहर की पेयजल सप्लाई जेएलएन (जवाहर लाल नेहरू) और बीएसबी (भालौठ सब ब्रांच) नहर में आने वाले पानी पर आधारित है। इन नहरों में पानी आने का रोस्टर बना हुआ है। रोस्टर के हिसाब से पानी नहीं आने की वजह से शहर की पेयजल आपूर्ति लगभग हर माह गड़बड़ा जाती है। जनस्वास्थ्य विभाग को कटौती करके सप्लाई करनी पड़ती है। जिसकी वजह से शहरवासियों को गंभीर पेयजल संकट से जूझना पड़ता है। इस समस्या से जनप्रतिनिधि से लेकर अफसर तक वाकिफ हैं। यही वजह है कि पेयजल समस्या का निदान करने के नाम पर अफसर अमरूत-एक में कई करोड़ रुपये खर्च कर चुके हैं। तीन साल से ज्यादा समय गुजर चुका है मगर शहरवासियों को कोई राहत नहीं मिली है। अब फिर से अमरूत-दो में 300 करोड़ रुपये की योजना बनाई गई है, जिसमें भी दावा किया जा रहा है कि शहरवासियों को गंभीर पेयजल समस्या से राहत मिलेगी।
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- एक नजर जलघरों में कच्चे पानी की भंडारण क्षमता
1. मानसरोवर पार्क
जलाशय एक-55734600 लीटर
जलाशय दो- 55764800 लीटर
जलाशय तीन- 101515050लीटर
कुल क्षमता-21,30,14,450 लीटर
2. सोनीपत रोड (बोहर नाका)
जलाशय एक- 54772000 लीटर
जलाशय दो- 89709000 लीटर
जलाशय तीन-81600000 लीटर
जलाशय चार- 84672000 लीटर
कुल क्षमता-31,07,53,000 लीटर
3. देव कॉलोनी
जलाशय एक- 14008311 लीटर
जलाशय दो- 8841705 लीटर
कुल क्षमता-2,28,50,016 लीटर
4. झज्जर रोड
जलाशय एक- 160747200 लीटर
जलाशय दो-130037250 लीटर
जलाशय तीन- 71440000 लीटर
कुल क्षमता-36,22,24,450
अमरूत-एक में करोड़ों रुपये के हुए कामों का लेखाजोखा
- अमरूत-एक में करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं। अफसरों का दावा था कि शहरवासियों को पेयजल समस्या से राहत मिलेगी मगर अभी तक ऐसा कुछ दिखा नहीं है। अमरूत-एक में शहर की सीवरेज व पेयजल समस्या के लिए करीब 331 करोड़ रुपये जारी हुए। 212 करोड़ रुपये सीवरेज व्यवस्था और 109 करोड़ पेयजल व्यवस्था में सुधार पर खर्च किए हैं। तीन साल से चल रही योजना का अभी तक धरातल पर परिणाम शून्य है।
- तृतीय जलघर सोनीपत रोड पर करीब 15 करोड़ रुपये में 22 एमएलडी का जलघर बनाने का काम 2019 में शुरू हुआ, जो अभी तक चालू नहीं हुआ। अफसरों के अनुसार इसके चालू होने से नेहरू कॉलोनी, संजय कॉलोनी, जींद चौक एरिया, खोखरा कोट, बसी नगर, फौजी कॉलोनी, रामजोहड़ी, सलाला मोहल्ला, कच्चा चमारिया रोड, हनुमान कॉलोनी, रूप नगर, तेज कॉलोनी की करीब एक लाख आबादी को राहत मिलेगी। अधिकारी कभी 10 दिन तो कभी सात दिन में चालू होने का दावा करते हैं मगर हकीकत यह है कि अभी तक पाइप नहीं जुड़ी है।
- कन्हैली जलघर करीब ढाई करोड़ रुपये से ढाई एमएलडी का बन रहा है। इससे कन्हैली, सुनारियां, चमारियां की आबादी को पानी मिलने का दावा है। हकीकत ये है कि अभी तक तो यह बनकर तैयार नहीं हुआ है। न जल शोधन टैंक बना है और न बिजली कनेक्शन है। ऐसे में कब बनकर तैयार होगा, इसका किसी के पास जवाब नहीं है।
- मस्तनाथ पंपिंग स्टेशन करीब 70 लाख रुपये में बनना है। इससे मस्तनाथ नगर व आसपास एरिया की समस्या का निदान होगा। यह भी अभी तक पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ है। यानी लोगों की पेयजल समस्या बरकरार है।
- पालिका कॉलोनी में बूस्टर बनकर तैयार है मगर अफसरों को चालू करने की भी फुरसत नहीं है। इसके चालू होने से पालिका कॉलोनी व राजेंद्र कॉलोनी की आबादी 20 हजार की समस्या खत्म होगी। अमरूत-एक योजना में करीब डेढ़ साल पहले बनकर तैयार हो चुका है।
अमरूत-दो में 300 करोड़ रुपये में पेयजल सप्लाई का खींचा खाका
अमरूत-एक के कामों को पूरा कराने का जिम्मा शासन ने नगर निगम को सौंपा था, जिसमें सीवर व पेयजल सप्लाई में सुधार करना है। अब अमरूत-दो योजना में करीब 300 करोड़ रुपये पेयजल की समुचित व्यवस्था पर खर्च होंगे जिसका खाका जनस्वास्थ्य विभाग के अफसर बनाकर मुख्यालय में भेज चुके हैं। अब अफसरों का कहना है कि चूंकि शहर की पेयजल आपूर्ति जेएलएन व बीएसबी नहरों में पानी के आने पर आधारित है, इसलिए भंडारण क्षमता बढ़ाना जरूरी है। अफसर बताते हैं कि जेएलएन व बीएसबी नहर से जलघर तक पानी प्राकृतिक ग्रेविटी (ढलान) से आता है। नहर से जलघर की दूरी करीब साढ़े चार किमी. दूर पड़ती है। रास्ते में खुली होने की वजह से कई अवरोध लग जाते हैं, जिसकी वजह से पानी का बहाव काफी कम हो जाता है। इसलिए सोनीपत रोड स्थित के पास पंपिंग स्टेशन बनवाने की योजना है। इसके बनने के बाद नहर का पानी पूरी क्षमता से जलघर में पहुंचेगा और काफी भंडारण होगा। इससे पेयजल समस्या का निदान होगा। इसके अलावा शहर में पेयजल लाइन बिछाने व बूस्टर आदि का काम होगा।
वर्जन-
शहरवासियों को पेयजल समस्या से राहत दिलाने के लिए पहले तृतीय जलघर का चालू होना जरूरी है, उम्मीद है जल्द चालू हो जाएगा। इसके चालू होने से काफी मिलेगी, वहीं कच्चे पानी का भंडारण भी होगा। अमरूत-एक के तहत हुए निर्माण चालू होने पर गंभीर समस्या नहीं होगी। अमरूत-दो में कच्चे पानी के भंडारण की क्षमता बनाने की योजना है, जिससे नहरों में पानी देरी से आने पर भी गंभीर संकट नहीं होगा।
- फूल सिंह, अधिशासी अभियंता जनस्वास्थ्य विभाग
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अब अमरूत-दो में सुचारु पेयजल सप्लाई के लिए करीब 300 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बनाया है। जिसमें सोनीपत रोड पर पंपिंग स्टेशन बनाना प्रस्तावित है। दावा है कि इसके बनने से जलघरों में पानी का भंडारण पर्याप्त होगा।
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शहर की आबादी को रोजाना 95 एमएलडी (9.5 करोड़ लीटर) पानी चाहिए। फिलहाल शहर में चार जलघर मानसरोवर पार्क, झज्जर रोड, देव कॉलोनी व सोनीपत रोड से पेयजल आपूर्ति होती है। इन जलघरों में कच्चे पानी की भंडारण क्षमता 90.88 करोड़ लीटर है। चूंकि शहर की पेयजल सप्लाई जेएलएन (जवाहर लाल नेहरू) और बीएसबी (भालौठ सब ब्रांच) नहर में आने वाले पानी पर आधारित है। इन नहरों में पानी आने का रोस्टर बना हुआ है। रोस्टर के हिसाब से पानी नहीं आने की वजह से शहर की पेयजल आपूर्ति लगभग हर माह गड़बड़ा जाती है। जनस्वास्थ्य विभाग को कटौती करके सप्लाई करनी पड़ती है। जिसकी वजह से शहरवासियों को गंभीर पेयजल संकट से जूझना पड़ता है। इस समस्या से जनप्रतिनिधि से लेकर अफसर तक वाकिफ हैं। यही वजह है कि पेयजल समस्या का निदान करने के नाम पर अफसर अमरूत-एक में कई करोड़ रुपये खर्च कर चुके हैं। तीन साल से ज्यादा समय गुजर चुका है मगर शहरवासियों को कोई राहत नहीं मिली है। अब फिर से अमरूत-दो में 300 करोड़ रुपये की योजना बनाई गई है, जिसमें भी दावा किया जा रहा है कि शहरवासियों को गंभीर पेयजल समस्या से राहत मिलेगी।
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- एक नजर जलघरों में कच्चे पानी की भंडारण क्षमता
1. मानसरोवर पार्क
जलाशय एक-55734600 लीटर
जलाशय दो- 55764800 लीटर
जलाशय तीन- 101515050लीटर
कुल क्षमता-21,30,14,450 लीटर
2. सोनीपत रोड (बोहर नाका)
जलाशय एक- 54772000 लीटर
जलाशय दो- 89709000 लीटर
जलाशय तीन-81600000 लीटर
जलाशय चार- 84672000 लीटर
कुल क्षमता-31,07,53,000 लीटर
3. देव कॉलोनी
जलाशय एक- 14008311 लीटर
जलाशय दो- 8841705 लीटर
कुल क्षमता-2,28,50,016 लीटर
4. झज्जर रोड
जलाशय एक- 160747200 लीटर
जलाशय दो-130037250 लीटर
जलाशय तीन- 71440000 लीटर
कुल क्षमता-36,22,24,450
अमरूत-एक में करोड़ों रुपये के हुए कामों का लेखाजोखा
- अमरूत-एक में करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं। अफसरों का दावा था कि शहरवासियों को पेयजल समस्या से राहत मिलेगी मगर अभी तक ऐसा कुछ दिखा नहीं है। अमरूत-एक में शहर की सीवरेज व पेयजल समस्या के लिए करीब 331 करोड़ रुपये जारी हुए। 212 करोड़ रुपये सीवरेज व्यवस्था और 109 करोड़ पेयजल व्यवस्था में सुधार पर खर्च किए हैं। तीन साल से चल रही योजना का अभी तक धरातल पर परिणाम शून्य है।
- तृतीय जलघर सोनीपत रोड पर करीब 15 करोड़ रुपये में 22 एमएलडी का जलघर बनाने का काम 2019 में शुरू हुआ, जो अभी तक चालू नहीं हुआ। अफसरों के अनुसार इसके चालू होने से नेहरू कॉलोनी, संजय कॉलोनी, जींद चौक एरिया, खोखरा कोट, बसी नगर, फौजी कॉलोनी, रामजोहड़ी, सलाला मोहल्ला, कच्चा चमारिया रोड, हनुमान कॉलोनी, रूप नगर, तेज कॉलोनी की करीब एक लाख आबादी को राहत मिलेगी। अधिकारी कभी 10 दिन तो कभी सात दिन में चालू होने का दावा करते हैं मगर हकीकत यह है कि अभी तक पाइप नहीं जुड़ी है।
- कन्हैली जलघर करीब ढाई करोड़ रुपये से ढाई एमएलडी का बन रहा है। इससे कन्हैली, सुनारियां, चमारियां की आबादी को पानी मिलने का दावा है। हकीकत ये है कि अभी तक तो यह बनकर तैयार नहीं हुआ है। न जल शोधन टैंक बना है और न बिजली कनेक्शन है। ऐसे में कब बनकर तैयार होगा, इसका किसी के पास जवाब नहीं है।
- मस्तनाथ पंपिंग स्टेशन करीब 70 लाख रुपये में बनना है। इससे मस्तनाथ नगर व आसपास एरिया की समस्या का निदान होगा। यह भी अभी तक पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ है। यानी लोगों की पेयजल समस्या बरकरार है।
- पालिका कॉलोनी में बूस्टर बनकर तैयार है मगर अफसरों को चालू करने की भी फुरसत नहीं है। इसके चालू होने से पालिका कॉलोनी व राजेंद्र कॉलोनी की आबादी 20 हजार की समस्या खत्म होगी। अमरूत-एक योजना में करीब डेढ़ साल पहले बनकर तैयार हो चुका है।
अमरूत-दो में 300 करोड़ रुपये में पेयजल सप्लाई का खींचा खाका
अमरूत-एक के कामों को पूरा कराने का जिम्मा शासन ने नगर निगम को सौंपा था, जिसमें सीवर व पेयजल सप्लाई में सुधार करना है। अब अमरूत-दो योजना में करीब 300 करोड़ रुपये पेयजल की समुचित व्यवस्था पर खर्च होंगे जिसका खाका जनस्वास्थ्य विभाग के अफसर बनाकर मुख्यालय में भेज चुके हैं। अब अफसरों का कहना है कि चूंकि शहर की पेयजल आपूर्ति जेएलएन व बीएसबी नहरों में पानी के आने पर आधारित है, इसलिए भंडारण क्षमता बढ़ाना जरूरी है। अफसर बताते हैं कि जेएलएन व बीएसबी नहर से जलघर तक पानी प्राकृतिक ग्रेविटी (ढलान) से आता है। नहर से जलघर की दूरी करीब साढ़े चार किमी. दूर पड़ती है। रास्ते में खुली होने की वजह से कई अवरोध लग जाते हैं, जिसकी वजह से पानी का बहाव काफी कम हो जाता है। इसलिए सोनीपत रोड स्थित के पास पंपिंग स्टेशन बनवाने की योजना है। इसके बनने के बाद नहर का पानी पूरी क्षमता से जलघर में पहुंचेगा और काफी भंडारण होगा। इससे पेयजल समस्या का निदान होगा। इसके अलावा शहर में पेयजल लाइन बिछाने व बूस्टर आदि का काम होगा।
वर्जन-
शहरवासियों को पेयजल समस्या से राहत दिलाने के लिए पहले तृतीय जलघर का चालू होना जरूरी है, उम्मीद है जल्द चालू हो जाएगा। इसके चालू होने से काफी मिलेगी, वहीं कच्चे पानी का भंडारण भी होगा। अमरूत-एक के तहत हुए निर्माण चालू होने पर गंभीर समस्या नहीं होगी। अमरूत-दो में कच्चे पानी के भंडारण की क्षमता बनाने की योजना है, जिससे नहरों में पानी देरी से आने पर भी गंभीर संकट नहीं होगा।
- फूल सिंह, अधिशासी अभियंता जनस्वास्थ्य विभाग