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टीचर ने मुर्गा बनाकर कमर पर मारा डंडा, बच्चा हो गया अपंग
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Tue, 05 Jul 2016 02:53 AM IST
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स्कूल प्रबंधन ने नहीं कराया इलाज, पुलिस भी नहीं कर रही कार्रवाई
- फोटो : amar ujala
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गांधी कैंप स्थित एक स्कूल में नौंवी कक्षा में पढ़ने वाले सागर शर्मा को टीचर की ऐसी मार पड़ी की वह दुबारा अपने पैर पर खड़ा नहीं हो पाया। इसकी शिकायत जब परिजनों ने स्कूल को दी तो कोई सुनवाई नहीं हुई। आरोप है कि स्कूल संचालक के एक नेता से रिश्तेदारी होने के चलते पुलिस भी कार्रवाई नहीं कर रही है। मामले में सीएम विंडो, स्वास्थ्य मंत्री को भी लिखित शिकायत की जा चुकी है, लेकिन वहां भी सुनवाई नहीं हो रही है।
बच्चे के पिता सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि 26 मई को स्कूल टीचर ने सागर शर्मा को मुर्गा बनाकर उसकी कमर पर डंडे से मारा। डंडा लगते ही सागर के हाथ-पांव ने काम करना बंद कर दिया। इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने बच्चे को माडल टाउन स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ. पवन शर्मा ने बताया कि मरीज को 22 टीके लगेंगे। एक टीके की कीमत 8500 रुपये है। स्कूल प्रबंधन ने पहले दिन चार टीके लगवाए, उसके बाद बच्चे को अस्पताल में छोड़ दिया और इलाज कराने से मना कर दिया। सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि हमारी आर्थिक स्थिति उस अस्पताल में इलाज कराने की नहीं है। जब स्कूल प्रबंधन ने साथ छोड़ दिया तो बच्चे को पीजीआई ले आए। यहां भी बच्चा ठीक नहीं हो रहा है। निजी अस्पताल से डिस्चार्ज कराते समय 4000 रुपये हमें चुकाने पड़े। सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि 30 मई को टीचर के खिलाफ गांधी कैंप चौकी में शिकायत दी थी, लेकिन स्कूल संचालक की एक नेता से रिश्तेदारी होने के कारण पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है। स्कूल प्रशासन मदद करने के बजाए, धमकी दे रहा है।
--पीड़ित परिवार कभी भी मुझसे आकर मिल सकता है। आरोपी किसी भी नेता का रिश्तेदार हो, यदि वह गलत है तो कार्रवाई जरूर होगी। स्कूल टीचर को बच्चों के साथ मारपीट करने का कोई अधिकार नहीं है।
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- मनीष ग्रोवर, विधायक
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बच्चे के पिता सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि 26 मई को स्कूल टीचर ने सागर शर्मा को मुर्गा बनाकर उसकी कमर पर डंडे से मारा। डंडा लगते ही सागर के हाथ-पांव ने काम करना बंद कर दिया। इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने बच्चे को माडल टाउन स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ. पवन शर्मा ने बताया कि मरीज को 22 टीके लगेंगे। एक टीके की कीमत 8500 रुपये है। स्कूल प्रबंधन ने पहले दिन चार टीके लगवाए, उसके बाद बच्चे को अस्पताल में छोड़ दिया और इलाज कराने से मना कर दिया। सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि हमारी आर्थिक स्थिति उस अस्पताल में इलाज कराने की नहीं है। जब स्कूल प्रबंधन ने साथ छोड़ दिया तो बच्चे को पीजीआई ले आए। यहां भी बच्चा ठीक नहीं हो रहा है। निजी अस्पताल से डिस्चार्ज कराते समय 4000 रुपये हमें चुकाने पड़े। सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि 30 मई को टीचर के खिलाफ गांधी कैंप चौकी में शिकायत दी थी, लेकिन स्कूल संचालक की एक नेता से रिश्तेदारी होने के कारण पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है। स्कूल प्रशासन मदद करने के बजाए, धमकी दे रहा है।
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--पीड़ित परिवार कभी भी मुझसे आकर मिल सकता है। आरोपी किसी भी नेता का रिश्तेदार हो, यदि वह गलत है तो कार्रवाई जरूर होगी। स्कूल टीचर को बच्चों के साथ मारपीट करने का कोई अधिकार नहीं है।
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- मनीष ग्रोवर, विधायक