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नोटबंदी की घोषणा के अगले दिन ही रची बैंकों में चोरी की साजिश
शनि शर्मा/अमर उजाला, रोहतक
Updated Thu, 05 Jan 2017 02:19 AM IST
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पहले किया करेंसी बदलने का जुगाड़, करीब दो करोड़ बदलने के लिए दिए
- फोटो : amar ujala
तीन बैंकों से ढाई करोड़ रुपये चुराने वाले गिरोह ने नोटबंदी की घोषणा के अगले ही दिन बैंकों में चोरी की साजिश रची थी। गिरोह में शामिल कृष्ण ने सेंधमारी का आइडिया दिया था। बैंकों में चोरी के बाद बदमाशों के बीच करीब 40 लाख रुपये का बंटवारा हुआ था। करीब दो करोड़ की पुरानी करेंसी बदलने के लिए किसी साथी को दी थी। यह खुलासा पुलिस पूछताछ में दिल्ली से पकड़े गए संजीव ने किया है। संजीव करीब सात साल से अपने गांव इस्माइला नहीं आया है। उसके माता-पिता का देहांत हो चुका है। उसका एक भाई स्कूल में चौक ीदार है।
संजीव से पुलिस पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि चोर गिरोह के गुर्गों ने चोरी करने से पहले ही पुरानी करेंसी को बदलने का जुगाड़ कर लिया था। इस संबंध में किसी बड़े व्यापारी से बात की थी। अब पुलिस को नोट बदलने वाले व्यक्ति की तलाश है। संजीव से पूछताछ में सामने आया है कि गिरोह में शामिल बहादुरगढ़ के गांव बराही निवासी कृ ष्ण ने दिल्ली में संजीव के कमरे पर चोरी की साजिश रची थी। फिर 500 और 1000 के पुराने नोट को बदलने के लिए संजीव ने किसी से बात की थी।
बैंकों में सक्रिय गुर्गों से पता लगाया जमा कैश
आरोपियों के नेटवर्क का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नोटबंदी के बाद ही इन्होंने बड़े बैंकों की मुख्य ब्रांच में अपने गुर्गे सक्रिय कर दिये थे। बताया जा रहा है कि इनमें कुछ अधिकारी स्तर के लोग भी शामिल रहे हैं। गिरोह के गुर्गों ने ही आरोपियों को बैंक में जमा कैश के बारे में जानकारी दी थी। इसके बाद आरोपियों ने वारदात की।
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संजीव के हिस्से में आये थे 12 लाख, पत्नी के लिए खरीदी कार
कई वारदातों के बाद गिरोह के सदस्यों के बीच चोरी की गई कुछ रकम का बंटवारा किया गया। एएसआई विनोद ने बताया कि संजीव के हिस्से में करीब 12 लाख रुपये आये थे। संजीव ने अपने हिस्से की रकम से पत्नी के लिए कार खरीदी थी। कार पत्नी के नाम है। आरोपी ने बाद में इसी कार को वारदात में प्रयोग करना शुरू कर दिया। किशनगढ़ वाली वारदात में पुलिस को आरोपी की पत्नी के नाम की ही कार बरामद हुई थी।
मास्टर माइंड की तलाश में प्रदेश से बाहर छापेमारी
पुलिस ने गिरोह के सुनील और संजीव को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन गिरोह का मास्टर माइंड मोनू पुलिस की पकड़ से दूर है। साजिश करने वाले कृष्ण के बारे में भी पुख्ता सबूत नहीं मिल रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि दोनों आरोपी एक ही जगह पर हैं। इस कारण सीआईए-1 की एक टीम प्रदेश से बाहर छापेमारी कर रही है। मोनू पर स्नेचिंग के करीब 27 केस दर्ज हैं। वह आज तक गिरफ्तार नहीं हुआ है। पुलिस का कहना है कि दोनों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस अभी तक चोरी किये गये रुपयों की बरामदगी नहीं कर सकी है।
आधुनिक उपकरणों के साथ करते हैं वारदात
पुलिस के मुताबिक गिरोह के गुर्गे वारदात के समय लग्जरी गाड़ियों में चलते हैं, ताकि कोई उन पर शक न कर सके। गुर्गे आधुनिक तरीके से वारदात को अंजाम देते हैं। गिरोह वारदात के समय वॉकी-टॉकी का प्रयोग करते हैं, ताकि वारदात के समय आपस में बात करने में दिक्कत न हो। गिरोह के निशाने पर अधिकतर ग्रामीण क्षेत्र के बैंक होते थे। ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतर बैंकों में रात को न तो सिक्योरिटी गार्ड की व्यवस्था है न ही पुलिस की गश्त ठीक से होती है।
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संजीव से पुलिस पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि चोर गिरोह के गुर्गों ने चोरी करने से पहले ही पुरानी करेंसी को बदलने का जुगाड़ कर लिया था। इस संबंध में किसी बड़े व्यापारी से बात की थी। अब पुलिस को नोट बदलने वाले व्यक्ति की तलाश है। संजीव से पूछताछ में सामने आया है कि गिरोह में शामिल बहादुरगढ़ के गांव बराही निवासी कृ ष्ण ने दिल्ली में संजीव के कमरे पर चोरी की साजिश रची थी। फिर 500 और 1000 के पुराने नोट को बदलने के लिए संजीव ने किसी से बात की थी।
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बैंकों में सक्रिय गुर्गों से पता लगाया जमा कैश
आरोपियों के नेटवर्क का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नोटबंदी के बाद ही इन्होंने बड़े बैंकों की मुख्य ब्रांच में अपने गुर्गे सक्रिय कर दिये थे। बताया जा रहा है कि इनमें कुछ अधिकारी स्तर के लोग भी शामिल रहे हैं। गिरोह के गुर्गों ने ही आरोपियों को बैंक में जमा कैश के बारे में जानकारी दी थी। इसके बाद आरोपियों ने वारदात की।
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संजीव के हिस्से में आये थे 12 लाख, पत्नी के लिए खरीदी कार
कई वारदातों के बाद गिरोह के सदस्यों के बीच चोरी की गई कुछ रकम का बंटवारा किया गया। एएसआई विनोद ने बताया कि संजीव के हिस्से में करीब 12 लाख रुपये आये थे। संजीव ने अपने हिस्से की रकम से पत्नी के लिए कार खरीदी थी। कार पत्नी के नाम है। आरोपी ने बाद में इसी कार को वारदात में प्रयोग करना शुरू कर दिया। किशनगढ़ वाली वारदात में पुलिस को आरोपी की पत्नी के नाम की ही कार बरामद हुई थी।
मास्टर माइंड की तलाश में प्रदेश से बाहर छापेमारी
पुलिस ने गिरोह के सुनील और संजीव को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन गिरोह का मास्टर माइंड मोनू पुलिस की पकड़ से दूर है। साजिश करने वाले कृष्ण के बारे में भी पुख्ता सबूत नहीं मिल रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि दोनों आरोपी एक ही जगह पर हैं। इस कारण सीआईए-1 की एक टीम प्रदेश से बाहर छापेमारी कर रही है। मोनू पर स्नेचिंग के करीब 27 केस दर्ज हैं। वह आज तक गिरफ्तार नहीं हुआ है। पुलिस का कहना है कि दोनों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस अभी तक चोरी किये गये रुपयों की बरामदगी नहीं कर सकी है।
आधुनिक उपकरणों के साथ करते हैं वारदात
पुलिस के मुताबिक गिरोह के गुर्गे वारदात के समय लग्जरी गाड़ियों में चलते हैं, ताकि कोई उन पर शक न कर सके। गुर्गे आधुनिक तरीके से वारदात को अंजाम देते हैं। गिरोह वारदात के समय वॉकी-टॉकी का प्रयोग करते हैं, ताकि वारदात के समय आपस में बात करने में दिक्कत न हो। गिरोह के निशाने पर अधिकतर ग्रामीण क्षेत्र के बैंक होते थे। ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतर बैंकों में रात को न तो सिक्योरिटी गार्ड की व्यवस्था है न ही पुलिस की गश्त ठीक से होती है।