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जाट आरक्षण आंदोलन : प्रकाश सिंह ने दंगे रोकने को बताया भविष्य का प्लान

Thu, 02 Jun 2016 02:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Thu, 02 Jun 2016 02:15 AM IST
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rohtak, prakash singh committee report, forces not reached khap land, jaat reservation, suggestion
सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी प्रकाश सिंह - फोटो : amar ujala
फरवरी माह में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान जिस तरह दंगे हुए वैसे दोबारा न हों इसके लिए पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने अपनी जांच रिपोर्ट में प्लान भी बताया है। उनके प्लान में जातिवाद और क्षेत्रवाद को रोकने के साथ ही पुलिस एवं प्रशासन के बीच तालमेल बढ़ाने के लिए कहा गया है। पुलिस और खुफिया तंत्र को समाज के साथ गांव स्तर तक पकड़ बनाने की सलाह दी गई है। बयानबाजी करने वालों के साथ ही नेताओं के धरनों पर भी शिकंजा कसने के लिए कहा गया है। सद्भावना बनाए रखने के लिए हर किसी का साथ लेकर काम करने की बात कही है।
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दंगों पर तैयार की गई प्रकाश सिंह की रिपोर्ट में कहा गया है कि गलत और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वालों को रोकना होगा और उन पर शिकंजा कसना पड़ेगा। हर सोमवार को सुबह दस बजे डीसी व एसपी की अध्यक्षता में अधिकारियों की बैठक होनी चाहिए, जिसमें जिले की ऐसी जानकारियों पर चर्चा होनी चाहिए, जिनसे किसी तरह का बवाल हो सकता है। उनको रोकने के प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। सार्वजनिक स्थानों पर गलत बयानबाजी करने वालों को चिह्नित करके उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। समाज के खिलाफ बयानबाजी करने वालों को कानून के तहत नोटिस जारी किया जाना चाहिए। अगर कोई धरना दैनिक जिंदगी को प्रभावित करता है तो वहां के नेताओं के नाम कोर्ट के सहारे नोटिस भिजवाए जाएं और धरना खत्म कराया जाए। छात्रों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि वह आसानी से उग्र हो जाते हैं। वह नेतृत्वहीन होते हैं और किसी की बात नहीं मानते हैं जो भीड़ में तुरंत गलत कदम उठाते हैं। जातिवाद व क्षेत्रवाद को रोकना बहुत जरूरी है। जिसे प्रशासन, पुलिस, राजनीति, समाज सभी से दूर करना होगा। मीडिया को सभी एंगल को देखना होगा और हर मामले की पुष्टि करनी होगी।
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पुलिस खुफिया तंत्र को मजबूत और सामान्य खुफिया तंत्र को बढ़ाना होगा। इसके लिए समाज में पकड़ बनाने के साथ ही गांव स्तर के साथ ही पंचायत सदस्यों, रिटायर्ड कर्मचारियों से संपर्क बढ़ाना होगा। सद्भावना बढ़ाने के लिए गणमान्य लोगों और रिटायर्ड कर्मियों के साथ मार्च पास्ट करना जरूरी है। सरपंच व पंच सद्भावना सम्मेलन, मेयर व पार्षद सद्भावना सम्मेलन भी प्रदेश भर में करते रहना जरूरी है।
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