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एआईपीएमटी पेपर लीक प्रकरण: मास्टरमाइंड दांगी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Fri, 01 Jul 2016 02:34 AM IST
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मामले में फरार 18 आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी
- फोटो : अमर उजाला
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एआईपीएमटी पेपर लीक करके देशभर में हड़कंप मचा देने वाले मास्टरमाइंड एक लाख के इनामी रूप सिंह दांगी के खिलाफ पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। आईपीसी की धारा 467 (फर्जी दस्तावेज तैयार करना), 468-471 (छल के लिए फर्जी दस्तावेज प्रयोग करना), 120 बी, 420 और 66ए आईटी एक्ट में चालान पेश किया है। चार्जशीट की कॉपी दोनों पक्षों के वकीलों के पास पहुंच गई है। अब चार्जशीट में शामिल आरोपों पर बहस होगी। इसके बाद आरोप तय होने पर गवाहियों का दौर शुरू होगा। इससे पहले पुलिस मामले में मुख्य चालान पेश कर चुकी है। इस चालान में 59 लोगों को गवाह बनाया गया है। इनमें पुलिस अधिकारी, डॉक्टर्स सहित कई छात्र शामिल हैं।
बता दें कि सालभर की भागदौड़, इनाम और भगौड़ा घोषित किए जाने के बाद पुलिस दांगी को 31 मार्च को पकड़ सकी थी। अब चालान पेश किए जाने की समयावधि खत्म होने (गिरफ्तारी के 90 दिन के अंदर) के वक्त पुलिस ने चालान पेश किया है। गौरतलब है कि मई 2015 में हुए एआईपीएमटी के पेपर को आरोपियों ने परीक्षा केंद्र से लीक किया था। उसके बाद राजस्थान के बहरोड़ में बैठकर पेपर मिनटों में सॉल्व कराया और अंडर गारमेंट ब्लूटूथ डिवाइस की मदद से आरोपियों के उम्मीदवार छात्रों तक पेपर पहुंचाया गया। परीक्षा वाले दिन रोहतक आईजी की टीम ने रोहतक में शक के आधार पर चार युवकों को गिरफ्तार किया था। उन्होंने पूछताछ में सारा खेल खोल दिया और सुप्रीम कोर्ट ने रोहतक पुलिस की तगड़ी पैरवी पर पेपर रद्द कर दिया। देशभर में यह परीक्षा दोबारा से ली गई थी। दांगी रोहतक जिले के गांव मदीना का रहने वाला है।
फरार 18 आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी
कोर्ट ने मामले में फरार चल रहे 18 आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिये हैं ताकि आरोपियों को जल्द से जल्द पेश किया जा सके। आरोपियों को सालभर बाद भी पकड़ने में नाकामयाब रही पुलिस को भी फटकार लगाई है। पुलिस अभी तक करीब 8 मास्टर सॉल्वर को नहीं पकड़ सकी है। इसी तरह दांगी को छिपने का ठिकाना देने वालों का भी सुराग नहीं लगा है। वकील कृष्ण कौशिक ने बताया कि हाल ही में दांगी सहित अन्य 8 आरोपियों का चालान पेश किया गया है। मामले में अभी हिमाचल प्रदेश और उतराखंड से राजीव, सोनू, हिसार व दिल्ली से जगबीर सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करना है।
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8 आरोपियों का चालान भी पेश
पुलिस ने जल्द सजा करवाने के लिए 8 आरोपियों का तृतीमा चालान भी पेश कर दिया है। इनको दांगी की निशानदेही पर गिरफ्तार किया गया था। इनमें परीक्षा के ंद्र से पेपर लीक करवाने वाला अध्यापक, परीक्षा केंद्र के अंदर घुसकर पेपर की फोटो खींचकर व्हाट्सएप पर दांगी को भेजने वाले आरोपी सहित अन्य आरोपी शामिल हैं। चालान गुपचुप तरीके से पेश किया। पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों का चालान भी गुपचुप तरीके से पेश किया था।
इसलिए हुई चालान पेश करने में देरी
पेपर लीक का खुलासा होने के बाद पुलिस ने 40 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। लेकिन मास्टरमाइंड और पेपर लीक करने वाले उसके सहयोगी भूमिगत हो गये थे। आरोपी दांगी ने पुलिस की नजरों से बचने के लिए सोशल साइट्स और मोबाइल का प्रयोग भी बंद कर दिया था। बाद में कोर्ट ने आरोपी को भगौड़ा घोषित कर दिया। 10 महीने बाद पुलिस आरोपी तक पहुंच सकी थी।
दांगी की निशानदेही पर ये गिरफ्तार
दांगी की गिरफ्तारी के साथ ही यह खुलासा हो सका था कि पेपर कैसे और कहां से लीक किया गया। दांगी की निशानदेही पर 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें पेपर लीक करने वाले, मास्टर सॉल्वर और मास्टर सॉल्वर का इंतजाम करने वाले शामिल रहे। अप्रैल 2016 में एमडीएन स्कू ल के पीटीआई शिक्षक सतीश, इसी स्कूल के दूसरे पीटीआई शिक्षक रविंद्र, गोच्छी के मोनू, कुरुक्षेत्र के कमल सैनी सहित अन्य को गिरफ्तार किया गया। मोनू ने परीक्षा केंद से प्रश्नपत्र का फोटो खींचकर व्हाट्स एप के जरिये दांगी को भेजा था।
कई प्रदेशों की खाक छानी, फिर भी खाली हाथ
पुलिस फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए कई प्रदेशों की खाक छान चुकी है। पिछले दिनों महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, बिहार, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल और जम्मू कश्मीर में छापामारी की गई। पटना मेडिकल कॉलेज में भी छापेमारी की गई, लेकिन आरोपी फरार हो गया।
करोड़ों रुपयों की वसूली नहीं
दांगी ने अभ्यर्थियों से आंसर-की उपलब्ध कराने के नाम पर करोड़ों रुपये ठगे। लेकिन पुलिस एक पैसा भी वसूल नहीं कर सकी है। इसका जिक्र भी चार्जशीट में किया गया है। चार्जशीट के अनुसार दांगी ने अपने बयानों में कहा है कि उसके पास ठगी के रुपये नहीं पहुंचे थे। उसका दावा है कि कुछ लोगों ने काम हो जाने के बाद रुपये देने की बात हुई थी। लेकिन पहले ही मामले का खुलासा होने के कारण सारे रुपये फंस गये। जो रुपये पहले आ चुके थे वह सारे दांगी के सहयोगियों के पास थे और कुछ सॉल्वरों को बांट दिये गये थे।
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बता दें कि सालभर की भागदौड़, इनाम और भगौड़ा घोषित किए जाने के बाद पुलिस दांगी को 31 मार्च को पकड़ सकी थी। अब चालान पेश किए जाने की समयावधि खत्म होने (गिरफ्तारी के 90 दिन के अंदर) के वक्त पुलिस ने चालान पेश किया है। गौरतलब है कि मई 2015 में हुए एआईपीएमटी के पेपर को आरोपियों ने परीक्षा केंद्र से लीक किया था। उसके बाद राजस्थान के बहरोड़ में बैठकर पेपर मिनटों में सॉल्व कराया और अंडर गारमेंट ब्लूटूथ डिवाइस की मदद से आरोपियों के उम्मीदवार छात्रों तक पेपर पहुंचाया गया। परीक्षा वाले दिन रोहतक आईजी की टीम ने रोहतक में शक के आधार पर चार युवकों को गिरफ्तार किया था। उन्होंने पूछताछ में सारा खेल खोल दिया और सुप्रीम कोर्ट ने रोहतक पुलिस की तगड़ी पैरवी पर पेपर रद्द कर दिया। देशभर में यह परीक्षा दोबारा से ली गई थी। दांगी रोहतक जिले के गांव मदीना का रहने वाला है।
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फरार 18 आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी
कोर्ट ने मामले में फरार चल रहे 18 आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिये हैं ताकि आरोपियों को जल्द से जल्द पेश किया जा सके। आरोपियों को सालभर बाद भी पकड़ने में नाकामयाब रही पुलिस को भी फटकार लगाई है। पुलिस अभी तक करीब 8 मास्टर सॉल्वर को नहीं पकड़ सकी है। इसी तरह दांगी को छिपने का ठिकाना देने वालों का भी सुराग नहीं लगा है। वकील कृष्ण कौशिक ने बताया कि हाल ही में दांगी सहित अन्य 8 आरोपियों का चालान पेश किया गया है। मामले में अभी हिमाचल प्रदेश और उतराखंड से राजीव, सोनू, हिसार व दिल्ली से जगबीर सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करना है।
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8 आरोपियों का चालान भी पेश
पुलिस ने जल्द सजा करवाने के लिए 8 आरोपियों का तृतीमा चालान भी पेश कर दिया है। इनको दांगी की निशानदेही पर गिरफ्तार किया गया था। इनमें परीक्षा के ंद्र से पेपर लीक करवाने वाला अध्यापक, परीक्षा केंद्र के अंदर घुसकर पेपर की फोटो खींचकर व्हाट्सएप पर दांगी को भेजने वाले आरोपी सहित अन्य आरोपी शामिल हैं। चालान गुपचुप तरीके से पेश किया। पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों का चालान भी गुपचुप तरीके से पेश किया था।
इसलिए हुई चालान पेश करने में देरी
पेपर लीक का खुलासा होने के बाद पुलिस ने 40 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। लेकिन मास्टरमाइंड और पेपर लीक करने वाले उसके सहयोगी भूमिगत हो गये थे। आरोपी दांगी ने पुलिस की नजरों से बचने के लिए सोशल साइट्स और मोबाइल का प्रयोग भी बंद कर दिया था। बाद में कोर्ट ने आरोपी को भगौड़ा घोषित कर दिया। 10 महीने बाद पुलिस आरोपी तक पहुंच सकी थी।
दांगी की निशानदेही पर ये गिरफ्तार
दांगी की गिरफ्तारी के साथ ही यह खुलासा हो सका था कि पेपर कैसे और कहां से लीक किया गया। दांगी की निशानदेही पर 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें पेपर लीक करने वाले, मास्टर सॉल्वर और मास्टर सॉल्वर का इंतजाम करने वाले शामिल रहे। अप्रैल 2016 में एमडीएन स्कू ल के पीटीआई शिक्षक सतीश, इसी स्कूल के दूसरे पीटीआई शिक्षक रविंद्र, गोच्छी के मोनू, कुरुक्षेत्र के कमल सैनी सहित अन्य को गिरफ्तार किया गया। मोनू ने परीक्षा केंद से प्रश्नपत्र का फोटो खींचकर व्हाट्स एप के जरिये दांगी को भेजा था।
कई प्रदेशों की खाक छानी, फिर भी खाली हाथ
पुलिस फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए कई प्रदेशों की खाक छान चुकी है। पिछले दिनों महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, बिहार, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल और जम्मू कश्मीर में छापामारी की गई। पटना मेडिकल कॉलेज में भी छापेमारी की गई, लेकिन आरोपी फरार हो गया।
करोड़ों रुपयों की वसूली नहीं
दांगी ने अभ्यर्थियों से आंसर-की उपलब्ध कराने के नाम पर करोड़ों रुपये ठगे। लेकिन पुलिस एक पैसा भी वसूल नहीं कर सकी है। इसका जिक्र भी चार्जशीट में किया गया है। चार्जशीट के अनुसार दांगी ने अपने बयानों में कहा है कि उसके पास ठगी के रुपये नहीं पहुंचे थे। उसका दावा है कि कुछ लोगों ने काम हो जाने के बाद रुपये देने की बात हुई थी। लेकिन पहले ही मामले का खुलासा होने के कारण सारे रुपये फंस गये। जो रुपये पहले आ चुके थे वह सारे दांगी के सहयोगियों के पास थे और कुछ सॉल्वरों को बांट दिये गये थे।