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खेती करने को लिया पैरोल, अब लापता 150 से ज्यादा बदमाश
अंकित चौहान / अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 14 Oct 2016 01:09 AM IST
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प्रदेश की जेलों में बंद 150 से ज्यादा कैदियों ने पैरोल पर जाकर बढ़ाई पुलिस की टेंशन
- फोटो : demo pic
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कैदी पैरोल लेने के लिए खूब हथकंडे अपना रहे हैं। कोई खेती करने के लिए पैरोल लेता है तो कोई अपना मकान बनाने के लिए। लेकिन पैरोल मिलने तक सुधरते दिखने वाले ये कैदी बाहर जाते ही लापता हो जाते हैं। प्रदेश में ऐसे ही 150 से ज्यादा कैदी पैरोल पर जाने के बाद से लापता चल रहे हैं, जिन्होंने पुलिस की टेंशन बढ़ा दी है। इनमें ऐसे भी बदमाश शामिल हैं जो 30 साल पहले पैरोल पर गए थे, लेकिन उनका कुछ पता नहीं चल रहा है।
जेल में बंद किसी भी कैदी को पैरोल पर जाने के लिए प्रार्थना पत्र देना पड़ता है जो कोर्ट या प्रशासनिक अधिकारी के माध्यम से दिया जाता है। उसमें कोई कैदी कृषि कार्य के लिए पैरोल मांगता है तो कोई मकान बनवाने, बच्चों का एडमिशन कराने, बूढ़े मां-बाप की सेवा करने की दुहाई देता है। जैसा कारण बताया जाता है, उसी के हिसाब से पैरोल दी जाती है। सबसे ज्यादा कृषि कार्य और मकान बनवाने के लिए पैरोल दी जाती है। हालांकि इससे पहले पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पहले अपनी जांच करके रिपोर्ट देते हैं। प्रदेश में 250 से ज्यादा कैदी पैरोल पर गए हुए हैं, लेकिन इनमें से 150 से ज्यादा लापता हो गए हैं। सबसे ज्यादा 65 कैदी पैरोल लेकर नारनौल से गायब हुए हैं तो रोहतक से 34 और करनाल से 25 कैदी लापता चल रहे हैं। अन्य जिलों से भी ढेरोें कैदी पैरोल लेकर फरार हो गए हैं। ये कोई सामान्य कैदी नहीं है, बल्कि इनमें हत्या समेत अन्य बड़े अपराधों में शामिल कैदी भी हैं। पैरोल जंप करने के बाद पुलिस ने उनको तलाश किया तो वह हाथ नहीं लग सके। उन पर दबाव बनाने के लिए मुकदमा दर्ज किया गया तो 10 हजार तक का इनाम भी घोषित किया गया। लेकिन उसके बावजूद कोई फायदा नहीं मिला और ये 150 से ज्यादा कैदी ही पुलिस के लिए परेशानी खड़ी कर रहे हैं। रोहतक जेल से पैरोल पर गए कई ऐसे कैदी भी हैं जो 30 साल से ज्यादा समय से लापता हैं और वह पुलिस के हत्थे नहीं लग रहे हैं। जेल अधीक्षक दयानंद मंडौला कहते हैं कि पैरोल नियमों के अनुसार पूरी जांच करके दी जाती है। लेकिन उसके बाद भी कैदी लापता हो जाते हैं, जिनपर कार्रवाई चल रही है।
पैरोल देने के नियम कड़े करेगी सरकार
जिस तरह से पैरोल पर जाकर कैदियों के लापता होने की तादात बढ़ती जा रही है। उसने जेल अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और सरकार सभी को टेंशन में डाल दिया है। इनमें ऐसे भी कैदी शामिल हैं, जिनको सजा हो चुकी या वह किसी बड़े अपराध में बंद थे। हालांकि अच्छे आचरण के आधार पर उन्हें कुछ समय के लिए पैरोल दे दी गई लेकिन वे लौटकर नहीं आए। जेल सूत्रों के अनुसार इन हालातों को देखते हुए जल्द ही पैरोल के नियमों में बदलाव होने वाला है और डीजी जेल वाईपी सिंघल ने सरकार के साथ मिलकर इस पर पूरी योजना भी बनाई है। जिसमें पैरोल देने से लेकर उनकी जिम्मेदारी लेने वालों तक के लिए नियम कड़े जाएंगे।
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जिलों से लापता कैदी
रोहतक से 34-मुकदमा और इनाम
यमुनानगर से 6-पांच पर मुकदमा व इनाम
रेवाड़ी से 3
पानीपत से 4-मुकदमा व इनाम
कैथल से 2-एक बड़ा बदमाश
फतेहाबाद से 3
झज्जर से 11
सिरसा से 4
नारनौल से 65
जींद से 5
सोनीपत से 10
करनाल से 25-मुकदमा
भिवानी से 4-हत्या आरोपी शामिल
नोट: अन्य जिलों में भी इस तरह पैरोल पर जाकर कैदी फरार हैं।
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जेल में बंद किसी भी कैदी को पैरोल पर जाने के लिए प्रार्थना पत्र देना पड़ता है जो कोर्ट या प्रशासनिक अधिकारी के माध्यम से दिया जाता है। उसमें कोई कैदी कृषि कार्य के लिए पैरोल मांगता है तो कोई मकान बनवाने, बच्चों का एडमिशन कराने, बूढ़े मां-बाप की सेवा करने की दुहाई देता है। जैसा कारण बताया जाता है, उसी के हिसाब से पैरोल दी जाती है। सबसे ज्यादा कृषि कार्य और मकान बनवाने के लिए पैरोल दी जाती है। हालांकि इससे पहले पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पहले अपनी जांच करके रिपोर्ट देते हैं। प्रदेश में 250 से ज्यादा कैदी पैरोल पर गए हुए हैं, लेकिन इनमें से 150 से ज्यादा लापता हो गए हैं। सबसे ज्यादा 65 कैदी पैरोल लेकर नारनौल से गायब हुए हैं तो रोहतक से 34 और करनाल से 25 कैदी लापता चल रहे हैं। अन्य जिलों से भी ढेरोें कैदी पैरोल लेकर फरार हो गए हैं। ये कोई सामान्य कैदी नहीं है, बल्कि इनमें हत्या समेत अन्य बड़े अपराधों में शामिल कैदी भी हैं। पैरोल जंप करने के बाद पुलिस ने उनको तलाश किया तो वह हाथ नहीं लग सके। उन पर दबाव बनाने के लिए मुकदमा दर्ज किया गया तो 10 हजार तक का इनाम भी घोषित किया गया। लेकिन उसके बावजूद कोई फायदा नहीं मिला और ये 150 से ज्यादा कैदी ही पुलिस के लिए परेशानी खड़ी कर रहे हैं। रोहतक जेल से पैरोल पर गए कई ऐसे कैदी भी हैं जो 30 साल से ज्यादा समय से लापता हैं और वह पुलिस के हत्थे नहीं लग रहे हैं। जेल अधीक्षक दयानंद मंडौला कहते हैं कि पैरोल नियमों के अनुसार पूरी जांच करके दी जाती है। लेकिन उसके बाद भी कैदी लापता हो जाते हैं, जिनपर कार्रवाई चल रही है।
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पैरोल देने के नियम कड़े करेगी सरकार
जिस तरह से पैरोल पर जाकर कैदियों के लापता होने की तादात बढ़ती जा रही है। उसने जेल अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और सरकार सभी को टेंशन में डाल दिया है। इनमें ऐसे भी कैदी शामिल हैं, जिनको सजा हो चुकी या वह किसी बड़े अपराध में बंद थे। हालांकि अच्छे आचरण के आधार पर उन्हें कुछ समय के लिए पैरोल दे दी गई लेकिन वे लौटकर नहीं आए। जेल सूत्रों के अनुसार इन हालातों को देखते हुए जल्द ही पैरोल के नियमों में बदलाव होने वाला है और डीजी जेल वाईपी सिंघल ने सरकार के साथ मिलकर इस पर पूरी योजना भी बनाई है। जिसमें पैरोल देने से लेकर उनकी जिम्मेदारी लेने वालों तक के लिए नियम कड़े जाएंगे।
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जिलों से लापता कैदी
रोहतक से 34-मुकदमा और इनाम
यमुनानगर से 6-पांच पर मुकदमा व इनाम
रेवाड़ी से 3
पानीपत से 4-मुकदमा व इनाम
कैथल से 2-एक बड़ा बदमाश
फतेहाबाद से 3
झज्जर से 11
सिरसा से 4
नारनौल से 65
जींद से 5
सोनीपत से 10
करनाल से 25-मुकदमा
भिवानी से 4-हत्या आरोपी शामिल
नोट: अन्य जिलों में भी इस तरह पैरोल पर जाकर कैदी फरार हैं।