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मलिक को डी बार करने के विरोध में सैकड़ों वकील छोड़ेंगे सदस्यता
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sun, 20 Mar 2016 02:35 AM IST
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कोर्ट
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जिला बार एसोसिएशन में रार थमने का नाम नहीं ले रही है। वकीलों से मारपीट के आरोपियों की पैरवी न करने का प्रस्ताव वापस लेने के बाद सब कुछ सही होने का दावा एक बार फिर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। अब वकीलों से मारपीट के आरोपी तेजबीर सेन की पैरवी करने पर वकील शिवराज मलिक को डी बार किए जाने का विरोध शुरू हो गया है। सैकड़ों वकील शिवराज मलिक के समर्थन में आ गए हैं।
सभी वकीलों ने मलिक को डी बार किए जाने का विरोध करते हुए बार सदस्यता छोड़ने की चेतावनी दी है। बार प्रधान दीपक कुंडू का कहना है कि उनके पास या बार कार्यकारिणी के किसी अन्य अधिकारी को अभी तक ऐसा कोई खत नहीं मिला है। खत मिलने के बाद ही मामले में बातचीत की जाएगी। वहीं, आरोपी तेजबीर सेन को शनिवार को कोर्ट से जमानत मिल गई। उन्हें 16 मार्च को गिरफ्तार किया गया था।
बता दें कि 17 मार्च को जिला बार की मीटिंग में वकीलों से मारपीट के आरोपी तेजबीर सेन की पैरवी करने पर हाउस के सामने वकील शिवराज मलिक को बार से निलंबित कर दिया गया था। हाउस में वकीलों से मारपीट के आरोपियों की पैरवी नहीं करने संबंधी प्रस्ताव को वापस लेने और बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा के सदस्य लेखराज शर्मा के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी पास किया गया था। अब शिवराज मलिक खेमे के वकीलों का कहना है कि हाउस में वकीलों से मारपीट के आरोपियों की पैरवी नहीं करने संबंधी प्रस्ताव को वापस लेने के बाद मलिक को डी बार किया गया। जो कि नियमों के खिलाफ है। इसी के विरोध में सैकड़ों वकीलों ने बार सदस्यता छोड़ने का फै सला लिया है।
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कुछ वकील दबाव की राजनीति कर रहे हैं। मेरे पास अभी तक कोई भी खत नहीं आया है, जिस पर वकीलों ने साइन कर शिवराज मलिक को डी बार करने का विरोध किया हो। मलिक ने पैरवी नहीं करने संबंधी प्रस्ताव के लागू रहते तेजबीर सेन की पैरवी की थी। इसके बाद हाउस की मीटिंग में उन्हें डी बार किया गया।
दीपक कुंडू प्रधान जिला बार एसोसिएशन
कुछ वकीलों ने शिवराज मलिक को डी बार करने संबंधी ऑर्डर की कॉपी मांगी थी। लेकिन उन्हें मौखिक तौर पर डी बार करके ऑर्डर की कॉपी बार के कार्रवाई रजिस्टर में जमा कर दी गई है। इतना ही नहीं बार प्रस्ताव लागू रहते ही शिवराज मलिक को डी बार किया गया था। सामने आया है कि करीब 200 वकील इस विरोध कर रहे हैं, लेकिन इनमें से आधे वे लोग हैं, जिनकी बार में सदस्यता ही नहीं है। उनकी पहचान की जाएगी।
वकील प्रदीप मलिक
मेरे साथियों ने डी बार करने के संबंध में जो भी कहा है मैं उनके साथ हूं। इससे ज्यादा कुछ नहीं बोल सकता।
शिवराज मलिक
जिला बार एसोसिएशन ने बार नियमों को तोड़कर शिवराज मलिक को डी बार किया है। क्योंकि पैरवी नहीं करने संबंधी प्रस्ताव को वापस ले लिया गया था। उसके बावजूद मलिक को डी बार किया गया। इसी के विरोध में हमने बार सदस्यता छोड़ने की पेशकश की है।
एडवोकेट वेदप्रकाश दुआ
व्यापारी नेताओं की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई टली
वकीलों से मारपीट के आरोपी व्यापारी नेता बिट्टू सचदेवा और रोबिन सचदेवा की अग्रिम जमानत याचिका पर शनिवार को फैसला नहीं हो सका। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 31 मार्च की तारीख तय की है।
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सभी वकीलों ने मलिक को डी बार किए जाने का विरोध करते हुए बार सदस्यता छोड़ने की चेतावनी दी है। बार प्रधान दीपक कुंडू का कहना है कि उनके पास या बार कार्यकारिणी के किसी अन्य अधिकारी को अभी तक ऐसा कोई खत नहीं मिला है। खत मिलने के बाद ही मामले में बातचीत की जाएगी। वहीं, आरोपी तेजबीर सेन को शनिवार को कोर्ट से जमानत मिल गई। उन्हें 16 मार्च को गिरफ्तार किया गया था।
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बता दें कि 17 मार्च को जिला बार की मीटिंग में वकीलों से मारपीट के आरोपी तेजबीर सेन की पैरवी करने पर हाउस के सामने वकील शिवराज मलिक को बार से निलंबित कर दिया गया था। हाउस में वकीलों से मारपीट के आरोपियों की पैरवी नहीं करने संबंधी प्रस्ताव को वापस लेने और बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा के सदस्य लेखराज शर्मा के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी पास किया गया था। अब शिवराज मलिक खेमे के वकीलों का कहना है कि हाउस में वकीलों से मारपीट के आरोपियों की पैरवी नहीं करने संबंधी प्रस्ताव को वापस लेने के बाद मलिक को डी बार किया गया। जो कि नियमों के खिलाफ है। इसी के विरोध में सैकड़ों वकीलों ने बार सदस्यता छोड़ने का फै सला लिया है।
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कुछ वकील दबाव की राजनीति कर रहे हैं। मेरे पास अभी तक कोई भी खत नहीं आया है, जिस पर वकीलों ने साइन कर शिवराज मलिक को डी बार करने का विरोध किया हो। मलिक ने पैरवी नहीं करने संबंधी प्रस्ताव के लागू रहते तेजबीर सेन की पैरवी की थी। इसके बाद हाउस की मीटिंग में उन्हें डी बार किया गया।
दीपक कुंडू प्रधान जिला बार एसोसिएशन
कुछ वकीलों ने शिवराज मलिक को डी बार करने संबंधी ऑर्डर की कॉपी मांगी थी। लेकिन उन्हें मौखिक तौर पर डी बार करके ऑर्डर की कॉपी बार के कार्रवाई रजिस्टर में जमा कर दी गई है। इतना ही नहीं बार प्रस्ताव लागू रहते ही शिवराज मलिक को डी बार किया गया था। सामने आया है कि करीब 200 वकील इस विरोध कर रहे हैं, लेकिन इनमें से आधे वे लोग हैं, जिनकी बार में सदस्यता ही नहीं है। उनकी पहचान की जाएगी।
वकील प्रदीप मलिक
मेरे साथियों ने डी बार करने के संबंध में जो भी कहा है मैं उनके साथ हूं। इससे ज्यादा कुछ नहीं बोल सकता।
शिवराज मलिक
जिला बार एसोसिएशन ने बार नियमों को तोड़कर शिवराज मलिक को डी बार किया है। क्योंकि पैरवी नहीं करने संबंधी प्रस्ताव को वापस ले लिया गया था। उसके बावजूद मलिक को डी बार किया गया। इसी के विरोध में हमने बार सदस्यता छोड़ने की पेशकश की है।
एडवोकेट वेदप्रकाश दुआ
व्यापारी नेताओं की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई टली
वकीलों से मारपीट के आरोपी व्यापारी नेता बिट्टू सचदेवा और रोबिन सचदेवा की अग्रिम जमानत याचिका पर शनिवार को फैसला नहीं हो सका। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 31 मार्च की तारीख तय की है।