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जल रही थी वित्त मंत्री की कोठी, वहीं खड़ा था मेस कर्मचारी
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Fri, 13 May 2016 02:01 AM IST
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छात्रों को समझाते हुए वीसी
- फोटो : amar ujala
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जिस समय वित्त मंत्री की कोठी धधक रही थी, मेस कर्मचारी भुवन वहीं पर मौजूद था। यह पुलिस के पास मौजूद फुटेज में साफ दिखाई दे रहा है। यही फुटेज पुलिस अधिकारियों ने एमडीयू के वीसी और साथ गए प्रतिनिधिमंडल को दिखाया। इसके बाद ही प्रतिनिधिमंडल शांत हुआ। पुलिस प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि अब बिना यूनिवर्सिटी प्रशासन की अनुमति के कैंपस से कोई गिरफ्तारी नहीं होगी।
बता दें कि एमडीयू के हिमगिरी हॉस्टल में कार्यरत उत्तराखंड निवासी मेस कर्मचारी भुवन को बुधवार शाम एसआईटी की टीम ने यूनिवर्सिटी से गिरफ्तार कर लिया था। इसके विरोध में देर रात तक मेस कर्मचारी और छात्रों ने कुलपति प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया के आवास पर हंगामा किया था। हालांकि रजिस्ट्रार की तरफ से कार्रवाई का आश्वासन मिलने पर सभी वापस चले गए थे, लेकिन बृहस्पतिवार सुबह 11 बजते ही सभी फिर से कुलपति कार्यालय पर पहुंच गए। मेस कर्मियों के समर्थन में आए छात्रों का कहना था कि एसआईटी की इस तरह की कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी, यदि कोई दोषी है तो उसे प्रशासन से अनुमति लेकर ही यूनिवर्सिटी में आना होगा। पुलिस और एसआईटी बेवजह यूनिवर्सिटी कर्मचारी और छात्रों को परेशान कर रही है।
वीसी ने मेस कर्मी और छात्रों से बातचीत की और दस लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल तैयार किया। इसके बाद वीसी और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के साथ यह प्रतिनिधिमंडल लघु सचिवालय में पहुंचा। वहां पर डीसी और एसपी के साथ काफी देर तक मीटिंग चली। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जिस समय वित्त मंत्री की कोठी जल रही थी, मेस कर्मचारी भुवन वहीं पर मौजूद था। यह फुटेज में बिल्कुल साफ दिखाई दे रहा है। सबूतों के आधार पर ही भुवन को पकड़ा गया है। ऐसे में उसे नहीं छोड़ा जा सकता। फुटेज सामने आने पर मेस कर्मचारी और छात्र शांत हो गए, लेकिन उन्होंने एसआईटी की इस तरीके से कार्रवाई का विरोध जताया। इस पर पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि भविष्य में यदि ऐसी कोई कार्रवाई होती है तो उससे पहले यूनिवर्सिटी प्रशासन को अवगत करा दिया जाएगा। इसके बाद सभी लोग वापस लौट गए।
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कई दिन से तलाश में थी एसआईटी, पहले भी उठाया था एक मेस कर्मी
सूत्रों की मानें तो वित्त मंत्री की कोठी के पास भुवन की फुटेज मिलने पर एसआईटी कई दिनों से उसकी तलाश में थी। एसआईटी की टीम पहले भी कई बार मेस में पहुंची, लेकिन किसी कारणवश मेस कर्मचारी को नहीं पकड़ सकी। हालांकि कुछ दिन पहले एक दूसरे मेस कर्मचारी को जरूर उठाया गया था, लेकिन कुछ घंटे बाद ही उसे छोड़ दिया गया था।
पुलिस और एसआईटी के निशाने पर एमडीयू
एमडीयू का गेट नंबर दो आरक्षण आंदोलन का केंद्र बन गया था। इसी दौरान उपद्रवियों ने वित्त मंत्री की कोठी भी जला दी। इस केस में जो एफआईआर दर्ज करवाई गई थी उसमें यूनिवर्सिटी के कई छात्र नेताओं समेत अन्य लोग शामिल थे। अधिकतर लोगों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। सूत्रों की मानें तो एमडीयू के हॉस्टल अब पुलिस और एसआईटी के निशाने पर हैं, लेकिन कमजोर सबूतों के साथ पुलिस और एसआईटी हाथ नहीं डाल रही। इसीलिए पुख्ता सबूतों के आधार पर ही एक-एक कर आरोपियों को उठाया जा रहा है।
दोपहर तक कोर्ट में पेश, भेजा जेल
इस मामले में एसआईटी भी कोई लापरवाही नहीं करना चाहती थी। इसीलिए उन्होंने बिना समय गंवाए बृहस्पतिवार दोपहर ही भुवन को कोर्ट में पेश कर उसे जेल भेज दिया। डीएसपी सिद्धार्थ के अनुसार आरोपी के खिलाफ सबूत थे, इसी कारण उसे गिरफ्तार किया गया है। आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
आरोपी के पक्ष में नहीं, लेकिन एसआईटी की कार्रवाई गलत
फुटेज में मेस कर्मचारी का फोटो दिखाई दे रहा है, जिसके आधार पर उसे पकड़ा गया है। छात्रों ने मांग की थी कि एसआईटी इस तरह यूनिवर्सिटी में नहीं आ सकी। इससे छात्रों में भय का माहौल बनता है। पुलिस-प्रशासन के साथ हुई मीटिंग में यह मामला उठाया गया है। पुलिस ने भी आश्वासन दिया कि अगर इस तरह की कार्रवाई होती है तो पहले यूनिवर्सिटी प्रशासन की जानकारी में डाला जाएगा, उसके बाद ही कार्रवाई करेगी।
- प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया, वीसी, एमडीयू।
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बता दें कि एमडीयू के हिमगिरी हॉस्टल में कार्यरत उत्तराखंड निवासी मेस कर्मचारी भुवन को बुधवार शाम एसआईटी की टीम ने यूनिवर्सिटी से गिरफ्तार कर लिया था। इसके विरोध में देर रात तक मेस कर्मचारी और छात्रों ने कुलपति प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया के आवास पर हंगामा किया था। हालांकि रजिस्ट्रार की तरफ से कार्रवाई का आश्वासन मिलने पर सभी वापस चले गए थे, लेकिन बृहस्पतिवार सुबह 11 बजते ही सभी फिर से कुलपति कार्यालय पर पहुंच गए। मेस कर्मियों के समर्थन में आए छात्रों का कहना था कि एसआईटी की इस तरह की कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी, यदि कोई दोषी है तो उसे प्रशासन से अनुमति लेकर ही यूनिवर्सिटी में आना होगा। पुलिस और एसआईटी बेवजह यूनिवर्सिटी कर्मचारी और छात्रों को परेशान कर रही है।
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वीसी ने मेस कर्मी और छात्रों से बातचीत की और दस लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल तैयार किया। इसके बाद वीसी और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के साथ यह प्रतिनिधिमंडल लघु सचिवालय में पहुंचा। वहां पर डीसी और एसपी के साथ काफी देर तक मीटिंग चली। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जिस समय वित्त मंत्री की कोठी जल रही थी, मेस कर्मचारी भुवन वहीं पर मौजूद था। यह फुटेज में बिल्कुल साफ दिखाई दे रहा है। सबूतों के आधार पर ही भुवन को पकड़ा गया है। ऐसे में उसे नहीं छोड़ा जा सकता। फुटेज सामने आने पर मेस कर्मचारी और छात्र शांत हो गए, लेकिन उन्होंने एसआईटी की इस तरीके से कार्रवाई का विरोध जताया। इस पर पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि भविष्य में यदि ऐसी कोई कार्रवाई होती है तो उससे पहले यूनिवर्सिटी प्रशासन को अवगत करा दिया जाएगा। इसके बाद सभी लोग वापस लौट गए।
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कई दिन से तलाश में थी एसआईटी, पहले भी उठाया था एक मेस कर्मी
सूत्रों की मानें तो वित्त मंत्री की कोठी के पास भुवन की फुटेज मिलने पर एसआईटी कई दिनों से उसकी तलाश में थी। एसआईटी की टीम पहले भी कई बार मेस में पहुंची, लेकिन किसी कारणवश मेस कर्मचारी को नहीं पकड़ सकी। हालांकि कुछ दिन पहले एक दूसरे मेस कर्मचारी को जरूर उठाया गया था, लेकिन कुछ घंटे बाद ही उसे छोड़ दिया गया था।
पुलिस और एसआईटी के निशाने पर एमडीयू
एमडीयू का गेट नंबर दो आरक्षण आंदोलन का केंद्र बन गया था। इसी दौरान उपद्रवियों ने वित्त मंत्री की कोठी भी जला दी। इस केस में जो एफआईआर दर्ज करवाई गई थी उसमें यूनिवर्सिटी के कई छात्र नेताओं समेत अन्य लोग शामिल थे। अधिकतर लोगों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। सूत्रों की मानें तो एमडीयू के हॉस्टल अब पुलिस और एसआईटी के निशाने पर हैं, लेकिन कमजोर सबूतों के साथ पुलिस और एसआईटी हाथ नहीं डाल रही। इसीलिए पुख्ता सबूतों के आधार पर ही एक-एक कर आरोपियों को उठाया जा रहा है।
दोपहर तक कोर्ट में पेश, भेजा जेल
इस मामले में एसआईटी भी कोई लापरवाही नहीं करना चाहती थी। इसीलिए उन्होंने बिना समय गंवाए बृहस्पतिवार दोपहर ही भुवन को कोर्ट में पेश कर उसे जेल भेज दिया। डीएसपी सिद्धार्थ के अनुसार आरोपी के खिलाफ सबूत थे, इसी कारण उसे गिरफ्तार किया गया है। आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
आरोपी के पक्ष में नहीं, लेकिन एसआईटी की कार्रवाई गलत
फुटेज में मेस कर्मचारी का फोटो दिखाई दे रहा है, जिसके आधार पर उसे पकड़ा गया है। छात्रों ने मांग की थी कि एसआईटी इस तरह यूनिवर्सिटी में नहीं आ सकी। इससे छात्रों में भय का माहौल बनता है। पुलिस-प्रशासन के साथ हुई मीटिंग में यह मामला उठाया गया है। पुलिस ने भी आश्वासन दिया कि अगर इस तरह की कार्रवाई होती है तो पहले यूनिवर्सिटी प्रशासन की जानकारी में डाला जाएगा, उसके बाद ही कार्रवाई करेगी।
- प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया, वीसी, एमडीयू।