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चुनावों को लेकर फिर सुर्खियों में जाट और वैश्य संस्था, जोड़तोड़ का खेल शुरू

Mon, 27 Mar 2017 01:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Mon, 27 Mar 2017 01:38 AM IST
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election, jat & vaise society
इवीएम मश्‍ीन - फोटो : अमर उजाला
चुनावों को लेकर विवादों में फंसी जाट शिक्षण संस्था और वैश्य संस्था में एक बार फिर से चुनावी सरगर्मियां शुरू हो गई है। दोनों संस्थाओं के चुनावों को लेकर इसी माह फैसला होने की उम्मीद है। जाट संस्था के चुनाव को लेकर चार दिन बाद हाईकोर्ट से फैसला आ सकता है तो वहीं वैश्य संस्था का दो दिन चुनाव शेड्यूल जारी करने की तैयारी की जा रही है। ऐसे में चुनावी सब्जबाग सजो रहे लोगों ने फिर से जोड़तोड़ का खेल शुरू कर दिया है। हालांकि अभी यह देखना होगा कि पहले की भांति दोनों संस्थाओं के चुनाव पर कोई विवाद तो खड़ा नहीं होता। 
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यह है जाट संस्था का इतिहास 
जाट शिक्षण संस्था की स्थापना वर्ष 1913 में हुई थी। स्थापना के बाद कई दशक तक लोगों में इतना भाईचारा था कि कभी प्रधान पद के लिए चुनाव ही नहीं हुआ। सभी लोग सर्वसम्मति से ही प्रधान को चुन लेते थे। संस्था में कुछ दिनों तक भोलर सिंह अस्थाई प्रधान रहे तो वहीं सितंबर 1913 में चौधरी देवी सिंह को सर्वसम्मति से प्रधान बनाया गया। संस्था में वोटों से होने वाला पहला चुनाव वर्ष 1990 में हुआ था। फिलहाल संस्था में लगभग 15500 सदस्य हैं और 105 कॉलेजियम सदस्य हैं। 
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फिलहाल यह है स्थिति 
जाट संस्था में आपसी विवाद के चलते वर्ष 2015 में तत्कालीन गवर्निंग बॉडी को भंग कर दिया गया था। तभी से संस्था में प्रशासक की नियुक्ति है। इसके बाद फरवरी 2016 में चुनाव का शेड्यूल बनाया गया, लेकिन आरक्षण आंदोलन के चलते चुनाव नहीं हो सके। इसके बाद 10 जुलाई 2016 को चुनाव रखा गया। 10 जुलाई को कॉलेजियम के चुनाव के लिए नामांकन भी हो गया था, लेकिन ऐनवक्त पर एक आजीवन सदस्य की याचिका पर हाईकोर्ट ने चुनाव पर स्टे लगा दिया। तब से चुनाव का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। अब इस मामले पर 31 मार्च को सुनवाई होनी है। 
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यह है वैश्य संस्था का इतिहास 
वैश्य संस्था की नीवं वर्ष 1921 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने रखी थी। संस्था के 12 स्कूल-कॉलेज व अन्य संस्थान हैं। संस्था में लगभग 16 हजार वोटर हैं और 105 कॉलेजियम हैं। सभी संस्थानों में मिलाकर लगभग एक हजार से अधिक शिक्षक और कर्मचारी कार्यरत हैं। 


यह है फिलहाल स्थिति 
जाट संस्था की तरह वैश्य संस्था में आपसी विवाद है। संस्था में कभी कोई घोटाला तो कभी कोई फर्जीवाड़ा सामने आया। आपसी विवाद के कारण पिछली गवर्निंग बॉडी को समय से पहले भंग कर प्रशासक की नियुक्ति कर दी गई। कॉलेजियम का कार्यकाल रहने की वजह से पिछले वर्ष गवर्निंग बॉडी का चुनाव कराया गया। कॉलेजियम पुराने वाले ही रहे। इस चुनाव पर भी काफी विवाद हुए थे, लेकिन आखिर में नई गवर्निंग बॉडी को कार्यभार दे दिया है, जो फिलहाल में कार्यरत है। हालांकि अभी तक इस गवर्निंग बॉडी के कार्यकाल में कोई बड़ा विवाद सामने नहीं आया है। अब 6 जुलाई को कॉलेजियम का कार्यकाल पूरा हो रहा है और ऐसे में नियमानुसार गवर्निंग बॉडी को 90 दिन पहले चुनाव शेड्यूल जारी करना होगा। सूत्रों की मानें तो संस्था में दो दिन बाद गवर्निंग बॉडी की मीटिंग होने जा रही है, जिसमें चुनाव शेड्यूल जारी कर दिया जाएगा। 
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