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सुनारिया जेल में भांजे से मिलने गए गोहाना मंडी के पूर्व प्रधान को मारी गोली, हमलावर दबोचा

Fri, 03 Feb 2017 03:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Fri, 03 Feb 2017 03:05 AM IST
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पुरानी रंजिश के चलते विकास और बिट्टू सहित अन्य ने सुंदर को भेजा था गोली मारने के लिए जेल - फोटो : amar ujala
सुनारिया जेल में भांजे से मिलने पहुंचे गोहाना मंडी के पूर्व प्रधान को एक युवक ने गोली मार दी। एक गोली कूल्हे और दूसरी कमर से आरपार निकल गई। तीसरी गोली मारने से पहले ही जेल के हेड वार्डर ने आरोपी को दबोच लिया। घायल को गंभीर हालत में पीजीआई में भर्ती कराया गया। वारदात के पीछे पुरानी रंजिश को वजह बताया जा रहा है। बता दें कि घायल रामनिवास गोहाना के चर्चित लारा हत्याकांड में आरोपी रह चुका है। बाद में वह बरी हो गया था।
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हत्या के मामले में सोनीपत के गांव बधाना निवासी अनिल उर्फ  लीला फरवरी 2016 से सुनारिया जिला जेल में बंद है। वीरवार सुबह उसका मामा बसाना निवासी गोहाना मंडी के पूर्व प्रधान रामनिवास उर्फ कालू उससे मिलने आया था। रामनिवास मुलाकात कक्ष के बाहर लाइन में लग गया। इसी बीच एक युवक पीछे से आया और रामनिवास पर ताबड़तोड़ गोली चलाने लगा। रामनिवास को दो गोलियां लगीं और दोनों शरीर के आरपार हो गईं। तीसरी गोली चलाने से पहले ही मुलाकात कक्ष के बाहर तैनात हेड वार्डर अजीत ने उसे दबोच लिया। रामनिवास को गंभीर हालत में पीजीआई में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों का कहना है कि अब रामनिवास की हालत में सुधार है। गोली चलाने वाले आरोपी की पहचान हिसार के गांव सिसवाल निवासी सुरेंद्र उर्फ सुंदर के रूप में हुई है। वारदात के बाद जेल परिसर में अफरातफरी मच गई। सूचना मिलते ही शिवाजी कालोनी थाना प्रभारी नवीन और सीआईए 2 इंचार्ज राकेश सैनी टीम सहित मौके पर पहुंच गये। पुलिस ने सुंदर की निशानदेही पर वारदात की साजिश में शामिल मुख्य आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
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पुरानी रंजिश के चलते मारी गोली

शिवाजी कॉलोनी थाना प्रभारी नवीन ने बताया कि पुरानी रंजिश के चलते वारदात को अंजाम दिया गया है। जांच अधिकारी एएसआई पंकज के अनुसार बधाना गांव के विकास और बिट्टू सहित अन्य ने सुरेंद्र उर्फ सुंदर को रामनिवास को गोली मारने के लिए जेल परिसर में भेजा था। विकास और बिट्टू के चाचा की हत्या में अनिल उर्फ लीला आरोपी है। इसी कारण अनिल और विकास के बीच रंजिश पनपी थी। वहीं गोहाना मंडी के पूर्व प्रधान रामनिवास उर्फ कालू के खिलाफ भी कई केस दर्ज हैं। अनिल से लगातार मिलने की वजह से रामनिवास की हत्या का प्लान बनाया गया था। पुलिस ने सिसवाल के सुंदर, बंधाना के विकास, बिट्टू, हवासिंह, प्रदीप, उमेद, जसमेर के खिलाफ हत्या के प्रयास का केस दर्ज कर तलाश शुरू कर दी है। पुलिस की मानें तो जसमेर और बिट्टू का पिता और विकास का चाचा हवासिंह है।
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हेड वार्डर ने जान पर खेलकर अन्य मुलाकाती और रामनिवास की बचाई जान, वारदात के समय 20 मुलाकाती लगे थे लाइन में  

सुनारिया जेल परिसर में रामनिवास को गोली मारने वाले सुरेंद्र उर्फ सुंदर को हथियार के साथ फोटो खिंचवाने का शौक भारी पड़ गया। पुलिस पूछताछ में दिए बयान में आरोपी ने बताया कि अन्य आरोपियों ने उसकी हथियार के साथ फोटो खींचकर फेसबुक पर अपलोड कर दी। इसके बाद धमकी दी कि वह रामनिवास को गोली नहीं मारेगा तो उसकी फोटो पुलिस को भेज दी जाएगी। इसके बाद आरोपी ने गोली मारने का फैसला लिया। वहीं जेल में मुलाकाती और रामनिवास को बचाने के लिए हेड वार्डर अजीत अपनी जान पर खेल गया। फायरिंग के समय करीब 20 मुलाकाती लाइन में लगे थे। हेड वार्डर ने गोली लगने की परवाह किए बिना आरोपी को दबोच लिया। गैंगवार की आशंका के चलते पीजीआई में घायल की सुरक्षा के लिए पुलिस सुरक्षा बढ़ा दी गई है। वहीं एसपी ने भी घटना स्थल का दौरा किया।

फतेहाबाद के दोस्त ने करवाई थी विकास से दोस्ती

आरोपी सुरेंद्र उर्फ सुंदर का एक दोस्त निवासी फतेहाबाद एनडीपीएस के मामले में जेल में बंद था। करीब चार महीने पहले उसी ने विकास से दोस्ती करवाई थी। इसके बाद मुलाकात का सिलसिला शुरू हो गया। वहीं फोटो खींचकर रामनिवास को गोली मारने की धमकी के बाद से सुरेंद्र उर्फ सुंदर अपने घर भी नहीं गया। हालांकि पुलिस आरोपी की इन बातों पर विश्वास नहीं कर रही है। एएसआई पंकज का कहना है कि आरोपी अपने बचाव में कहानी गढ़ रहा है। सुंदर के घर में उसका एक भाई और बहन है। पिता खेतीबाड़ी करके परिवार का गुजारा करते है।
 
सुबह ही गाड़ी से जेल के बाहर पहुंचा था सुंदर

सुंदर ने खुलासा किया कि उसे सुबह विकास और उसके अन्य साथी गाड़ी से जिला जेल के बाहर छोड़ गए थे। जब रामनिवास मुलाकात के लिए जेल परिसर के अंदर पहुंचा तो आरोपियों ने सुंदर को असलहा देकर भेजा।

पिस्टल में थी सात गोली, 1 गोली वार्डर को छूकर निकली

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी सुंदर के पास 10 गोलियोें की मैगजीन वाली पिस्टल थी। वारदात के समय पिस्टल में सात गोली थीं। इनमें से आरोपी ने दो गोली चला दी थी जब वह तीसरी को चलाने लगा तो उसे दबोच लिया गया। रामनिवास के शरीर से आर पार निकली दो गोलियों में से एक गोली मुलाकात कक्ष पर तैनात दूसरे वार्डर को छूकर निकली थी। एफएसएल की टीम ने मौके पर पहुंचकर सबूत जुटाए।

जान की परवाह किए बगैर जेल वार्डर आरोपी को दबोचा

हेड वार्डर ने बताया कि मैं और मेरा साथी मुलाकाती कक्ष के बाहर मुलाकात करने वालों की तलाशी ले रहे थे। रामनिवास को तलाशी लेने के बाद लाइन में भेज दिया था। तभी एक युवक ने आकर रामनिवास को गोली मार दी। गोली चलने के बाद मुलाकातियों में अफरातफरी मच गई। मैं भी घबरा गया। तभी आरोपी ने दूसरी गोली भी चला दी। इससे रामनिवास नीचे गिर गया। दूसरी गोली चलने के बाद देखा कि युवक बिना देखे गोली चला रहा है यदि इसे नहीं पकड़ा तो मुझे या मुलाकाती को भी गोली लग सकती है। इसके बाद मैंने उसे दबोच लिया।

चार पुलिस नाके पार कर, हथियार लेकर पहुंचा जेल परिसर

वारदात के साथ ही पुलिस और जेल सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गये है। जेल परिसर तक पहुंचने के लिए तीन जगहों पर पुलिस नाके की चेकिंग से गुजरना पड़ता है। यह तीनों नाके जेल प्रशासन की तरफ से लगाए गये हैं। जबकि जाटों के धरने की वजह से एक बड़ा पुलिस नाका जेल वाली सड़क के मोड़ पर लगा है। इसके बावजूद आरोपी जेल परिसर के अंदर तक हथियार ले जाने में सफल हो गया। इतना ही नहीं करीब दो महीने पहले भी जेल के बाहर पुलिस और जमानत पर बाहर आये आरोपी के समर्थकों के बीच जमकर फायरिंग हुई थी। इसके बावजूद शिवाजी कालोनी थाना पुलिस सुरक्षा को लेकर सचेत नहीं हुई।

रामनिवास के खिलाफ हत्या सहित 9 केस दर्ज

घायल रामनिवास के खिलाफ भी हत्या सहित अन्य धाराओं में करीब 9 केस सोनीपत के विभिन्न थानों में दर्ज है। इनमें से तीन मामले हत्या, चार मारपीट के शामिल है। आरोपी फिलहाल कई मामलों में जमानत पर बाहर है। पुलिस ने बताया कि राम निवास के साथ जेल में उसके अन्य साथी भी गये थे। लेकिन वह मुलाकात पर नहीं पहुंचे।


जेल में 1452 बंदी, सुरक्षा कर्मी मात्र 146

जिला जेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीरता नजर नहीं आ रही है। रिकार्ड के अनुसार फिलहाल सुनारिया जेल में करीब 1452 बंदी हैं। इनमें सजायाफ्ता और विचाराधीन बंदी शामिल हैं। इतने बंदियों और आने जाने वाले मुलाकातियों की सुरक्षा का जिम्मा मात्र 146 सुरक्षा कर्मियों के भरोसे है। इनमें से अधिकतर के पास हथियार भी नहीं है। वहीं, जेल में फायरिंग की रिपोर्ट जेल प्रशासन की तरफ से मुख्यालय भेज दी गई है। रिपोर्ट में सभी बिंदुओं को शामिल किया गया है।
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