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फर्जी दस्तावेज पर प्रमोशन लेने पर एमडीयू की प्रोफेसर पर एफआईआर
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Mon, 19 Sep 2016 01:43 AM IST
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एमडीयू
- फोटो : file photo
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एमडीयू में एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है। पीजीआई थाना पुलिस ने एक महिला प्रोफेसर के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। आरोप है कि महिला प्रोफेसर ने प्रमोशन लेने के लिए फर्जी दस्तावेज पेश किए। इसके बाद उन्हें प्रमोशन मिला। कई जगहों पर जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद पीजीआई थाने में विभाग के ही एचओडी प्रोफे सर भूपसिंह गुलिया की शिकायत पर प्रोफेसर डॉ. सुषमा के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
जांच अधिकारी एएसआई अशोक के अनुसार विवि में फाइन आर्ट की एसोसिएट प्रोफेसर पर डॉ. सुषमा सिंह का वर्ष 2009 में प्रोफेसर के पद पर प्रमोशन हुआ था। उस समय डॉ. सुषमा डिपार्टमेंट की एचओडी भी थीं। पिछले वर्ष डिपार्टमेंट के ही प्रोफेसर भूप सिंह गुलिया ने डॉ. सुषमा सिंह के प्रमोशन में लगाए गए दस्तावेज की आरटीआई मांग ली। आरटीआई मिलने पर प्रो. गुलिया ने तत्कालीन कुलपति सुधीर राजपाल को शिकायत की। आरोप लगाया कि डॉ. सुषमा ने प्रमोशन के लिए फर्जी दस्तावेज लगाएं हैं। उन्होंने न कोई वर्कशॉप अटैंड की और न ही कोई सेमिनार, जिसके नंबर दिए जाते हैं। इसी बीच किसी अज्ञात व्यक्ति ने सीएम विंडो में भी यह शिकायत कर दी। सीएम विंडो में केस पहुंचने के बाद यूनिवर्सिटी ने भी इस पर जांच बैठा दी। जुलाई 2015 में पंचकूला सीआईडी की टीम प्रो. गुलिया के पास पहुंची और उनके बयान लिए गए। करीब एक माह पहले प्रो. गुलिया ने डीजीपी को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की। माना जा रहा है कि इसके बाद ही पीजीआई थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया है। सीआईडी की तरफ से ही पत्र पुलिस के पास भेजा गया। इसके बाद मामले में कार्रवाई हुई।
इन दस्तावेजों का किया प्रमोशन में प्रयोग
प्रो. गुलिया का आरोप है कि प्रमोशन के लिए संबंधित अधिकारी को अपनी उपलब्धि बतानी पड़ती है। महिला प्रोफेसर ने प्रमोशन लेने के लिए अपनी उपलब्धि में अंबाला, करनाल, उत्तराखंड सहित रोहतक के शिक्षण संस्थानों के उपलब्धि सर्टिफिकेट पेश किए। बाद में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। सीआईडी ने एमडीयू से संबंधित दस्तावेज 13 मई 2015 को लिए थे। जांच के बाद सामने आया कि सुषमा ने गैर कानूनी तरीके से लाभ लिया।
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खानपुर विवि के शिक्षण अधिकारी भी फंसे
इसी तरह के केस में पूर्व में खानपुर स्थित विश्वविद्यालय के शिक्षण अधिकारी भी फंस चुके है। ऐसा फर्जीवाड़ा करने पर दो अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज हो चुका है। शिकायत में इन दो केस का जिक्र भी किया गया है।
यह मामला यूनिवर्सिटी में पहले से चल रहा है। यूनिवर्सिटी की जांच पर पूरा यकीन है। मैंने हमेशा यूनिवर्सिटी के हितों के लिए कार्य किया है। अभी तक के कार्यकाल के दौरान तीन किताबें लिख चुकी हूं और कई अवार्ड भी ले चुकी हूं। जो लोग आरोप लगा रहे हैं वह पहले खुद को देखें, उसके बाद आरोप लगाएं। अभी तक पुलिस की तरफ से मेरे पास कुछ नहीं आया है, जब कुछ आएगा उसका भी जवाब दिया जाएगा।
डॉ. सुषमा सिंह
प्रोफे सर पर फर्जी दस्तावेज प्रयोग कर प्रमोशन लेने का आरोप है। उनके खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। एमडीयू के विजुअल आर्ट विभाग के एचओडी प्रो. भूप सिंह ने सीआईडी के डायरेक्टर को डॉक्टर सुषमा की शिकायत की थी। जांच के बाद सीआईडी की तरफ से एक खत आया। इसके आधार पर प्रो. भूप सिंह की शिकायत पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। अब आगे की जांच पड़ताल के बाद गिरफ्तारी की जाएगी।
एएसआई अशोक कुमार जांच अधिकारी
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जांच अधिकारी एएसआई अशोक के अनुसार विवि में फाइन आर्ट की एसोसिएट प्रोफेसर पर डॉ. सुषमा सिंह का वर्ष 2009 में प्रोफेसर के पद पर प्रमोशन हुआ था। उस समय डॉ. सुषमा डिपार्टमेंट की एचओडी भी थीं। पिछले वर्ष डिपार्टमेंट के ही प्रोफेसर भूप सिंह गुलिया ने डॉ. सुषमा सिंह के प्रमोशन में लगाए गए दस्तावेज की आरटीआई मांग ली। आरटीआई मिलने पर प्रो. गुलिया ने तत्कालीन कुलपति सुधीर राजपाल को शिकायत की। आरोप लगाया कि डॉ. सुषमा ने प्रमोशन के लिए फर्जी दस्तावेज लगाएं हैं। उन्होंने न कोई वर्कशॉप अटैंड की और न ही कोई सेमिनार, जिसके नंबर दिए जाते हैं। इसी बीच किसी अज्ञात व्यक्ति ने सीएम विंडो में भी यह शिकायत कर दी। सीएम विंडो में केस पहुंचने के बाद यूनिवर्सिटी ने भी इस पर जांच बैठा दी। जुलाई 2015 में पंचकूला सीआईडी की टीम प्रो. गुलिया के पास पहुंची और उनके बयान लिए गए। करीब एक माह पहले प्रो. गुलिया ने डीजीपी को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की। माना जा रहा है कि इसके बाद ही पीजीआई थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया है। सीआईडी की तरफ से ही पत्र पुलिस के पास भेजा गया। इसके बाद मामले में कार्रवाई हुई।
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इन दस्तावेजों का किया प्रमोशन में प्रयोग
प्रो. गुलिया का आरोप है कि प्रमोशन के लिए संबंधित अधिकारी को अपनी उपलब्धि बतानी पड़ती है। महिला प्रोफेसर ने प्रमोशन लेने के लिए अपनी उपलब्धि में अंबाला, करनाल, उत्तराखंड सहित रोहतक के शिक्षण संस्थानों के उपलब्धि सर्टिफिकेट पेश किए। बाद में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। सीआईडी ने एमडीयू से संबंधित दस्तावेज 13 मई 2015 को लिए थे। जांच के बाद सामने आया कि सुषमा ने गैर कानूनी तरीके से लाभ लिया।
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खानपुर विवि के शिक्षण अधिकारी भी फंसे
इसी तरह के केस में पूर्व में खानपुर स्थित विश्वविद्यालय के शिक्षण अधिकारी भी फंस चुके है। ऐसा फर्जीवाड़ा करने पर दो अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज हो चुका है। शिकायत में इन दो केस का जिक्र भी किया गया है।
यह मामला यूनिवर्सिटी में पहले से चल रहा है। यूनिवर्सिटी की जांच पर पूरा यकीन है। मैंने हमेशा यूनिवर्सिटी के हितों के लिए कार्य किया है। अभी तक के कार्यकाल के दौरान तीन किताबें लिख चुकी हूं और कई अवार्ड भी ले चुकी हूं। जो लोग आरोप लगा रहे हैं वह पहले खुद को देखें, उसके बाद आरोप लगाएं। अभी तक पुलिस की तरफ से मेरे पास कुछ नहीं आया है, जब कुछ आएगा उसका भी जवाब दिया जाएगा।
डॉ. सुषमा सिंह
प्रोफे सर पर फर्जी दस्तावेज प्रयोग कर प्रमोशन लेने का आरोप है। उनके खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। एमडीयू के विजुअल आर्ट विभाग के एचओडी प्रो. भूप सिंह ने सीआईडी के डायरेक्टर को डॉक्टर सुषमा की शिकायत की थी। जांच के बाद सीआईडी की तरफ से एक खत आया। इसके आधार पर प्रो. भूप सिंह की शिकायत पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। अब आगे की जांच पड़ताल के बाद गिरफ्तारी की जाएगी।
एएसआई अशोक कुमार जांच अधिकारी