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कोर्ट के आदेशों को रौंद रहे स्कूली वाहन
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sat, 21 Jan 2017 01:42 AM IST
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खस्ताहाल वाहनों में स्कूल आने-जाने के लिए मजबूर हैं नौनिहाल
- फोटो : अमर उजाला
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सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को ताक पर रखकर निजी स्कूलों के वाहन बेखौफ सड़कों पर फर्राटे भर रहे हैं। जिला प्रशासन और पुलिस अनजान बनी है। प्रशासन को यूपी के एटा, यमुनानगर और अंबाला जैसे किसी हादसे का इंतजार है। हालात ये हैं कि स्कूल वाहन चलाने वाले ड्राइवर न तो वर्दी में होते हैं न ही किसी वाहन में स्पीड गवर्नर ठीक से काम कर रहा है। इन वाहनों में न तो सीसीटीवी कैमरे लगे हैं न ही जीपीएस सिस्टम।
सांपला कस्बे के ज्यादातर स्कूल वाहनों पर किसी प्रकार का नियंत्रण नहीं दिखता है। ऐसे में धुंध भरे मौसम में दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। स्कूल बस और बच्चे ले जाने वाले अन्य वाहन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना करते नहीं दिख रहे हैं। मासूम बच्चों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने स्कूली वाहनों के लिए 15 दिशा निर्देश जारी किए हैं, लेकिन जिले के ज्यादातर निजी स्कूल आदेश मानने को तैयार नहीं हैैं। कुछ स्कूल वाहन जर्जर हालात में हैं, इनमें सर्दी से बचाव के लिए शीशे तक नहीं लगे हैं।
सीटों से कहीं अधिक बच्चों को भरा जाता है। इनके बाद भी कस्बे में अभी तक किसी स्कूल वाहन पर कार्रवाई नहीं हुई। सांपला कस्बे में स्कूल वाहनों के कई हादसे हो चुके हैं। पिछले दिनों गांव नया बास के पास स्कूल बस के नीचे आने से एक बच्चे की मौत हो गई थी। स्कूल बस बच्चे को उसके घर नया बास छोड़ने गई थी, जब वह बस से उतर रही थी तो अचानक चालक ने बस चला दी थी।
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ये हैं सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश
1. स्कूल बस चालक को पांच वर्ष का भारी वाहन चलाने का अनुभव होना जरूरी है।
2. चालक के साथ एक अन्य व्यक्ति मोटर वाहन के नियम-17 के तहत बस में साथ रहेगा।
3. स्कूल बस के आगे-पीछे स्कूल का नाम और स्कूल संचालक का फोन नंबर लिखा होना चाहिए।
4. बस के अंदर प्राथमिक उपचार किट, स्पीड गवर्नर और अग्निशमन यंत्र होना जरूरी है।
5. सभी स्कूल बसों का वार्षिक फिटनेस प्रमाण पत्र और बीमा होना चाहिए।
6. चालक और परिचालक वर्दी में होने चाहिए। दोनों की नेमप्लेट पर लाइसेंस नंबर होना चाहिए।
7. सभी स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगे होने चाहिए
8. स्कूली वाहनों में पुलिस, फायर ब्रिगेड, महिला हेल्पलाइन के साथ-साथ स्कूल प्रबंधन का नंबर लिखा होना चाहिए।
9. स्कूली बसों की गति सीमा 50 किमी से अधिक नहीं होनी चाहिए।
10. लड़कियों की बसों में महिला हेल्पर होनी जरूरी है।
11. स्कूल बसों पर रूट संख्या और समय लिखा होना चाहिए।
12. वाहन में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चे नहीं बैठेंगे।
13. वाहन के खिड़कियों पर लोहे की ग्रिल लगी हो।
14. बस के दरवाजों पर मजबूत लॉक लगा हो।
15. स्कूल बैग रखने के लिए सीट के नीचे अलग स्थान होना चाहिए।
हाईकोर्ट ने भी बनाई गाइड लाइन, नहीं हो रहा पालन
स्कूली बच्चों के वाहन के लिए हाईकोर्ट ने भी गाइड लाइन दी है, लेकिन इसका परिवहन और पुलिस प्रशासन पालन नहीं करा रहे हैं। परिणामस्वरूप जिले में ऑटो चालक लापरवाही पूर्ण तरीके से बच्चों को स्कूल लाने और ले जाने का काम कर रहे हैं।
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सांपला कस्बे के ज्यादातर स्कूल वाहनों पर किसी प्रकार का नियंत्रण नहीं दिखता है। ऐसे में धुंध भरे मौसम में दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। स्कूल बस और बच्चे ले जाने वाले अन्य वाहन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना करते नहीं दिख रहे हैं। मासूम बच्चों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने स्कूली वाहनों के लिए 15 दिशा निर्देश जारी किए हैं, लेकिन जिले के ज्यादातर निजी स्कूल आदेश मानने को तैयार नहीं हैैं। कुछ स्कूल वाहन जर्जर हालात में हैं, इनमें सर्दी से बचाव के लिए शीशे तक नहीं लगे हैं।
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सीटों से कहीं अधिक बच्चों को भरा जाता है। इनके बाद भी कस्बे में अभी तक किसी स्कूल वाहन पर कार्रवाई नहीं हुई। सांपला कस्बे में स्कूल वाहनों के कई हादसे हो चुके हैं। पिछले दिनों गांव नया बास के पास स्कूल बस के नीचे आने से एक बच्चे की मौत हो गई थी। स्कूल बस बच्चे को उसके घर नया बास छोड़ने गई थी, जब वह बस से उतर रही थी तो अचानक चालक ने बस चला दी थी।
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ये हैं सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश
1. स्कूल बस चालक को पांच वर्ष का भारी वाहन चलाने का अनुभव होना जरूरी है।
2. चालक के साथ एक अन्य व्यक्ति मोटर वाहन के नियम-17 के तहत बस में साथ रहेगा।
3. स्कूल बस के आगे-पीछे स्कूल का नाम और स्कूल संचालक का फोन नंबर लिखा होना चाहिए।
4. बस के अंदर प्राथमिक उपचार किट, स्पीड गवर्नर और अग्निशमन यंत्र होना जरूरी है।
5. सभी स्कूल बसों का वार्षिक फिटनेस प्रमाण पत्र और बीमा होना चाहिए।
6. चालक और परिचालक वर्दी में होने चाहिए। दोनों की नेमप्लेट पर लाइसेंस नंबर होना चाहिए।
7. सभी स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगे होने चाहिए
8. स्कूली वाहनों में पुलिस, फायर ब्रिगेड, महिला हेल्पलाइन के साथ-साथ स्कूल प्रबंधन का नंबर लिखा होना चाहिए।
9. स्कूली बसों की गति सीमा 50 किमी से अधिक नहीं होनी चाहिए।
10. लड़कियों की बसों में महिला हेल्पर होनी जरूरी है।
11. स्कूल बसों पर रूट संख्या और समय लिखा होना चाहिए।
12. वाहन में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चे नहीं बैठेंगे।
13. वाहन के खिड़कियों पर लोहे की ग्रिल लगी हो।
14. बस के दरवाजों पर मजबूत लॉक लगा हो।
15. स्कूल बैग रखने के लिए सीट के नीचे अलग स्थान होना चाहिए।
हाईकोर्ट ने भी बनाई गाइड लाइन, नहीं हो रहा पालन
स्कूली बच्चों के वाहन के लिए हाईकोर्ट ने भी गाइड लाइन दी है, लेकिन इसका परिवहन और पुलिस प्रशासन पालन नहीं करा रहे हैं। परिणामस्वरूप जिले में ऑटो चालक लापरवाही पूर्ण तरीके से बच्चों को स्कूल लाने और ले जाने का काम कर रहे हैं।