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गुरुकुल में यौन उत्पीड़न
Updated Tue, 28 Aug 2018 02:40 AM IST
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सुबह पांच मिनट देरी से उठने या शाम में एक मिनट देरी से आने पर होती है डंडों से पिटाई, तीन घंटे बनाया जाता है मुर्गा, 30 ने छोड़ा गुरुकुल
-गुरुकुल में बच्चों से यौन उत्पीड़न मामले की छानबीन करने पहुंची बाल कल्याण समिति के सामने बच्चों ने बयां किया अपना दर्द
-बच्चे बोले, त्योहार पर छुट्टी नहीं, मोबाइल रखने नहीं देते, कार्यालय से घर फोन करें तो पांच मिनट से ज्यादा बात नहीं करने देते
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। गुरुकुल में बात-बात पर पिटाई होती है। छोटी-छोटी गलती पर बड़ी मार सहनी पड़ती है। सुबह पांच मिनट देरी से उठने या शाम में एक मिनट देरी से आने पर कपड़े उतार कर पीठ व उससे निचले हिस्स पर बांस के डंडों से मारा जाता है। यह सब आम है। यही नहीं 20-20 डंडे मारने के बाद लॉन में सफाई का काम कराते हैं। यह दर्द है गुरुकुल के विद्यार्थियों का। सोमवार को सीडब्ल्यूसी ने बच्चों की काउंसिलिंग की तो ये बातें सामने आईं।
बच्चे बोले, मोबाइल फोन साथ नहीं रखने दिया जाता है। त्योहार पर छुट्टी नहीं दी जाती है। रक्षाबंधन पर घर जाना था, मगर नहीं जा सके। घर पर बात करनी हो तो फोन पर भी मुश्किल से पांच मिनट का ही समय मिल पाता है। सीनियर्स गलत काम करते हैं। इनकी शिकायत भी नहीं कर सकते। शिकायत पेटी नहीं है। शिकायत देनी भी हो तो वार्डन को दे सकते हैं। इस पर कार्रवाई के बजाय पिटाई ही होती है। हमें तीन-तीन घंटे मुर्गा बनाया जाता है। सीडब्ल्यूसी चेयरमैन की मौजूदगी में ये सभी बयान कलमबद्ध किए गए। अब समिति बयान के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।
30 छात्रों ने छोड़ा गुरुकुल
यौन उत्पीड़न मामले की जानकारी मिलने के बाद सोमवार सुबह ही अभिभावक अपने बच्चों से मिलने पहुंचना शुरू हो गए। इन्होंने अपने बच्चों से बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली। शाम तक करीब 30 से ज्यादा विद्यार्थी गुरुकुल छोड़ चुके थे। ये विद्यार्थी अपना सामान समेट कर अभिभावकों के साथ चले गए। अभिभावकों का कहना है कि अब वे अपने बच्चों को वहीं स्कूल में पढ़ाएंगे।
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संस्कार सीखने के लिए भेजा था बेटा
पीड़ित छात्रों में से एक की मां ने कहा कि अपने बेटे को संस्कार सीखने के लिए भेजा था। सुना था गुरुकुल में संस्कारों को लेकर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। नहीं पता था कि ऐसे संस्कार मिलेंगे। इससे अच्छा तो बच्चों को किसी सरकारी स्कूल में भेज देते तो भी वे इंसान बनकर निकलते। यहां उनके साथ गलत होता है। उन्हें ही 20-20 डंडे मारे जाते हैं। बच्चों से गलत काम होने के बाद पीटा और पार्क में काम कराया। बच्चों ने कहा कि हमारे घर बात कराओ। मेरा बेटा कभी नहीं रोता। रविवार को आई तो वह गले लग कर रोने लगा। पूछा तो उसने अपने साथ हुए गलत काम के बारे में बताया।
टीचर व सीनियर मारते हैं, किसी को बताने पर धमकी देते हैं
बच्चों व अभिभावकों ने बताया कि टीचर के साथ सीनियर भी मारते हैं। हमारे साथ गलत काम किया। किसी को बताने पर मारने की धमकी देते हैं। रक्षाबंधन पर यहां तो बच्चों ने हमें इस बारे में बताया। बच्चे रो पड़े। बोले, हमें यहां नहीं रहना। प्रिंसिपल व पुराने वार्डन बच्चों के साथ हुए अन्याय के लिए जिम्मेदार हैं। अब वे बयान बदल रहे हैं।
सचिन की पत्नी को देख बिफरीं महिलाएं
गुरुकुल के बाहर विरोध व गुस्सा जता रही बच्चों की मां व परिवार की अन्य महिलाओं ने मीडिया से कहा कि ये देखो बच्चों की पीठ। मार के निशान अब तक हैं। यहां गुरुकुल वार्डन सचिन की पत्नी पूजा को देख महिलाएं बिफर पड़ी। उसने बच्चों की चोट देखने की इच्छा जाहिर की तो महिलाओं से साफ इनकार करते हुए उसे खरी खोटी सुनाई। महिलाओं ने कहा कि तेरे आदमी ने बच्चों को इतना मारा है। शर्म आनी चाहिए। तेरे बच्चे को कोई ऐसे मारे तो क्या करेगी। यहां से चली जा। खुद के बच्चे के साथ हो पता चलता है।
हद से ज्यादा पीटा मेरा बच्चा
अभिभावकों का कहना है कि गुरुकुल में बच्चा पढ़ने के लिए भेजा था। यहां उसे हद से ज्यादा पीटा गया है। इसका मुख्य जिम्मेदार कौन है? वे सभी बाहर हैं। अब बच्चों को ही गलत बताया जा रहा है। बच्चों के झगड़े के कारण आरोप लगाने की बात कही जा रही है। सभी एक-दूसरे को बचा रहे हैं। अपनी गलती छिपा रहे हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। बच्चों के साथ रात ढाई बजे यह गलत काम हुए है। उस समय कहां थे वार्डन।
तीन-चार दिन पहले वार्डन से पता लगी शिकायत
गुरुकुल में पहली बार इस तरह की घटना सामने आई है। तीन-चार दिन पहले ही इस बारे में पता लगा। वार्डन से घटना का पता लगा। अपने स्तर पर जांच की तो स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। मामला बच्चों का है। आरोप संगीन है। इस मामले की निष्पक्ष जांच हो। सही स्थिति सामने आए। दोषी को सजा मिले। हम पूरा सहयोग करेंगे। सरकार सजा दे न दे, हम गलत करने वालों को यहां नहीं रखेंगे। आरोपी बच्चों में से एक भाग कर घर चला गया है। उसके अभिभावकों को इस बारे में बता दिया गया है। यहां वे बच्चे आते हैं, जो अभिभावकों के काबू में नहीं होते। वे यहां जम नहीं पाते हैं। उन्हें बीडी, सिगरेट, मोबाइल व साथी याद आते हैं। इसलिए यहां नहीं रहना चाहते।
हरिदत्त आर्य, संस्थापक, गुरुकुल।
रात से मेरा पति जेल में है, दोषी प्रिंसिपल व आचार्य है
मेरा पति सचिन कल रात से जेल में है। वहीं क्यों जेल में है। प्रिंसिपल व आचार्य उनकी जिम्मेदारी क्यों नहीं ले रहे। इन्होंने एक बार भी उन्हें जाकर क्यों नहीं देखा। उन्हें जेल से निकालने के लिए अब तक क्या किया? बच्चों ने उन्हें बताया वे खाना छोड़ कर छत पर गए और समझाया कि बेटा तुम छठी कक्षा के हो। ऐसा करोगे तो क्या शरीर रहेगा। आगे पूरी लाइफ है। बच्चों ने आठ-दस और बच्चों के नाम बताए। उनसे भी गलत हुआ। इस बारे में आचार्य और प्रिंसिपल को बताया। आचार्य ने बच्चों में डर बनाए रखने के लिए उन्हें सजा दी। आचार्य कहा, वैसा ही मेरे पति ने किया। फिर वही अकेले दोषी क्यों। प्रिंसिपल व आचार्य भी दोषी हैं। या तो उन्हें भी जेल में डालो या फिर मेरे पति को भी बाहर लाओ। उन्हें यह भी नहीं पता कि एफआईआर क्यों और क्या दर्ज है। वे 15 दिन पहले ही यहां वार्डन बने हैं। इससे पहले दूसरे वार्डन थे।
पूजा गौतम, सचिन की पत्नी।
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-गुरुकुल में बच्चों से यौन उत्पीड़न मामले की छानबीन करने पहुंची बाल कल्याण समिति के सामने बच्चों ने बयां किया अपना दर्द
-बच्चे बोले, त्योहार पर छुट्टी नहीं, मोबाइल रखने नहीं देते, कार्यालय से घर फोन करें तो पांच मिनट से ज्यादा बात नहीं करने देते
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। गुरुकुल में बात-बात पर पिटाई होती है। छोटी-छोटी गलती पर बड़ी मार सहनी पड़ती है। सुबह पांच मिनट देरी से उठने या शाम में एक मिनट देरी से आने पर कपड़े उतार कर पीठ व उससे निचले हिस्स पर बांस के डंडों से मारा जाता है। यह सब आम है। यही नहीं 20-20 डंडे मारने के बाद लॉन में सफाई का काम कराते हैं। यह दर्द है गुरुकुल के विद्यार्थियों का। सोमवार को सीडब्ल्यूसी ने बच्चों की काउंसिलिंग की तो ये बातें सामने आईं।
बच्चे बोले, मोबाइल फोन साथ नहीं रखने दिया जाता है। त्योहार पर छुट्टी नहीं दी जाती है। रक्षाबंधन पर घर जाना था, मगर नहीं जा सके। घर पर बात करनी हो तो फोन पर भी मुश्किल से पांच मिनट का ही समय मिल पाता है। सीनियर्स गलत काम करते हैं। इनकी शिकायत भी नहीं कर सकते। शिकायत पेटी नहीं है। शिकायत देनी भी हो तो वार्डन को दे सकते हैं। इस पर कार्रवाई के बजाय पिटाई ही होती है। हमें तीन-तीन घंटे मुर्गा बनाया जाता है। सीडब्ल्यूसी चेयरमैन की मौजूदगी में ये सभी बयान कलमबद्ध किए गए। अब समिति बयान के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।
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30 छात्रों ने छोड़ा गुरुकुल
यौन उत्पीड़न मामले की जानकारी मिलने के बाद सोमवार सुबह ही अभिभावक अपने बच्चों से मिलने पहुंचना शुरू हो गए। इन्होंने अपने बच्चों से बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली। शाम तक करीब 30 से ज्यादा विद्यार्थी गुरुकुल छोड़ चुके थे। ये विद्यार्थी अपना सामान समेट कर अभिभावकों के साथ चले गए। अभिभावकों का कहना है कि अब वे अपने बच्चों को वहीं स्कूल में पढ़ाएंगे।
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संस्कार सीखने के लिए भेजा था बेटा
पीड़ित छात्रों में से एक की मां ने कहा कि अपने बेटे को संस्कार सीखने के लिए भेजा था। सुना था गुरुकुल में संस्कारों को लेकर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। नहीं पता था कि ऐसे संस्कार मिलेंगे। इससे अच्छा तो बच्चों को किसी सरकारी स्कूल में भेज देते तो भी वे इंसान बनकर निकलते। यहां उनके साथ गलत होता है। उन्हें ही 20-20 डंडे मारे जाते हैं। बच्चों से गलत काम होने के बाद पीटा और पार्क में काम कराया। बच्चों ने कहा कि हमारे घर बात कराओ। मेरा बेटा कभी नहीं रोता। रविवार को आई तो वह गले लग कर रोने लगा। पूछा तो उसने अपने साथ हुए गलत काम के बारे में बताया।
टीचर व सीनियर मारते हैं, किसी को बताने पर धमकी देते हैं
बच्चों व अभिभावकों ने बताया कि टीचर के साथ सीनियर भी मारते हैं। हमारे साथ गलत काम किया। किसी को बताने पर मारने की धमकी देते हैं। रक्षाबंधन पर यहां तो बच्चों ने हमें इस बारे में बताया। बच्चे रो पड़े। बोले, हमें यहां नहीं रहना। प्रिंसिपल व पुराने वार्डन बच्चों के साथ हुए अन्याय के लिए जिम्मेदार हैं। अब वे बयान बदल रहे हैं।
सचिन की पत्नी को देख बिफरीं महिलाएं
गुरुकुल के बाहर विरोध व गुस्सा जता रही बच्चों की मां व परिवार की अन्य महिलाओं ने मीडिया से कहा कि ये देखो बच्चों की पीठ। मार के निशान अब तक हैं। यहां गुरुकुल वार्डन सचिन की पत्नी पूजा को देख महिलाएं बिफर पड़ी। उसने बच्चों की चोट देखने की इच्छा जाहिर की तो महिलाओं से साफ इनकार करते हुए उसे खरी खोटी सुनाई। महिलाओं ने कहा कि तेरे आदमी ने बच्चों को इतना मारा है। शर्म आनी चाहिए। तेरे बच्चे को कोई ऐसे मारे तो क्या करेगी। यहां से चली जा। खुद के बच्चे के साथ हो पता चलता है।
हद से ज्यादा पीटा मेरा बच्चा
अभिभावकों का कहना है कि गुरुकुल में बच्चा पढ़ने के लिए भेजा था। यहां उसे हद से ज्यादा पीटा गया है। इसका मुख्य जिम्मेदार कौन है? वे सभी बाहर हैं। अब बच्चों को ही गलत बताया जा रहा है। बच्चों के झगड़े के कारण आरोप लगाने की बात कही जा रही है। सभी एक-दूसरे को बचा रहे हैं। अपनी गलती छिपा रहे हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। बच्चों के साथ रात ढाई बजे यह गलत काम हुए है। उस समय कहां थे वार्डन।
तीन-चार दिन पहले वार्डन से पता लगी शिकायत
गुरुकुल में पहली बार इस तरह की घटना सामने आई है। तीन-चार दिन पहले ही इस बारे में पता लगा। वार्डन से घटना का पता लगा। अपने स्तर पर जांच की तो स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। मामला बच्चों का है। आरोप संगीन है। इस मामले की निष्पक्ष जांच हो। सही स्थिति सामने आए। दोषी को सजा मिले। हम पूरा सहयोग करेंगे। सरकार सजा दे न दे, हम गलत करने वालों को यहां नहीं रखेंगे। आरोपी बच्चों में से एक भाग कर घर चला गया है। उसके अभिभावकों को इस बारे में बता दिया गया है। यहां वे बच्चे आते हैं, जो अभिभावकों के काबू में नहीं होते। वे यहां जम नहीं पाते हैं। उन्हें बीडी, सिगरेट, मोबाइल व साथी याद आते हैं। इसलिए यहां नहीं रहना चाहते।
हरिदत्त आर्य, संस्थापक, गुरुकुल।
रात से मेरा पति जेल में है, दोषी प्रिंसिपल व आचार्य है
मेरा पति सचिन कल रात से जेल में है। वहीं क्यों जेल में है। प्रिंसिपल व आचार्य उनकी जिम्मेदारी क्यों नहीं ले रहे। इन्होंने एक बार भी उन्हें जाकर क्यों नहीं देखा। उन्हें जेल से निकालने के लिए अब तक क्या किया? बच्चों ने उन्हें बताया वे खाना छोड़ कर छत पर गए और समझाया कि बेटा तुम छठी कक्षा के हो। ऐसा करोगे तो क्या शरीर रहेगा। आगे पूरी लाइफ है। बच्चों ने आठ-दस और बच्चों के नाम बताए। उनसे भी गलत हुआ। इस बारे में आचार्य और प्रिंसिपल को बताया। आचार्य ने बच्चों में डर बनाए रखने के लिए उन्हें सजा दी। आचार्य कहा, वैसा ही मेरे पति ने किया। फिर वही अकेले दोषी क्यों। प्रिंसिपल व आचार्य भी दोषी हैं। या तो उन्हें भी जेल में डालो या फिर मेरे पति को भी बाहर लाओ। उन्हें यह भी नहीं पता कि एफआईआर क्यों और क्या दर्ज है। वे 15 दिन पहले ही यहां वार्डन बने हैं। इससे पहले दूसरे वार्डन थे।
पूजा गौतम, सचिन की पत्नी।