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हत्या फाइल नंबर=दो
Updated Sat, 14 Jul 2018 02:24 AM IST
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हत्या फाइल नंबर-दो
पांच लाख के कर्ज तले दबा है संदीप का परिवार, अब कौन करेगा परिवार का पालन पोषण?
-बड़े भाई की मौत के बाद संदीप पर ही था परिवार के पालन पोषण का जिम्मा
-वृद्ध माता-पिता भी वृद्धा पेंशन के लिए खा रहे थे धक्के
सुनील सिवाच
महम। मोखरा गांव में जिस मजदूर संदीप की हत्या की गई, उसका परिवार पांच लाख के कर्ज तले दबा हुआ है। संदीप की मौत के बाद अब परिवार के समक्ष दो वक्त की रोजी-रोटी का भी संकट खड़ा हो गया है। बेटे की मौत के बाद पिता का रो-रोकर बुरा हाल था।
वृद्ध ईश्वर ने बताया कि सुभाष की चार साल पहले बीमारी के कारण मौत होने के बाद से संदीप ही मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण कर रहा था। उस पर वृद्ध माता-पिता के अलावा चार बच्चों के पालन पोषण का जिम्मा था। बताया कि परिवार के पालन-पोषण के लिए पांच लाख का कर्ज भी लिया हुआ था। कर्ज नहीं चुकाया जा रहा था। अब संदीप की मौत के बाद परिवार के समक्ष दो वक्त की रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। संदीप के चचेरे भाई रामकुमार ने बताया कि पेंशन के लिए भी कई बार प्रशासन के लिए गुहार लगाई। मगर मांग को पूरा नहीं किया गया। परिवार के पालन-पोषण के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से भी मदद की गुहार लगाई है। बार-बार संदीप के शव को देखकर रो रहे पिता को मोहल्ले के लोग सांत्वना देने में लगे हुए थे। हर कोई हत्यारों को कोस रहा था। हर किसी का कहना था कि अब मजदूर के परिवार का पालन पोषण कैसे होगा?
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पांच लाख के कर्ज तले दबा है संदीप का परिवार, अब कौन करेगा परिवार का पालन पोषण?
-बड़े भाई की मौत के बाद संदीप पर ही था परिवार के पालन पोषण का जिम्मा
-वृद्ध माता-पिता भी वृद्धा पेंशन के लिए खा रहे थे धक्के
सुनील सिवाच
महम। मोखरा गांव में जिस मजदूर संदीप की हत्या की गई, उसका परिवार पांच लाख के कर्ज तले दबा हुआ है। संदीप की मौत के बाद अब परिवार के समक्ष दो वक्त की रोजी-रोटी का भी संकट खड़ा हो गया है। बेटे की मौत के बाद पिता का रो-रोकर बुरा हाल था।
वृद्ध ईश्वर ने बताया कि सुभाष की चार साल पहले बीमारी के कारण मौत होने के बाद से संदीप ही मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण कर रहा था। उस पर वृद्ध माता-पिता के अलावा चार बच्चों के पालन पोषण का जिम्मा था। बताया कि परिवार के पालन-पोषण के लिए पांच लाख का कर्ज भी लिया हुआ था। कर्ज नहीं चुकाया जा रहा था। अब संदीप की मौत के बाद परिवार के समक्ष दो वक्त की रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। संदीप के चचेरे भाई रामकुमार ने बताया कि पेंशन के लिए भी कई बार प्रशासन के लिए गुहार लगाई। मगर मांग को पूरा नहीं किया गया। परिवार के पालन-पोषण के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से भी मदद की गुहार लगाई है। बार-बार संदीप के शव को देखकर रो रहे पिता को मोहल्ले के लोग सांत्वना देने में लगे हुए थे। हर कोई हत्यारों को कोस रहा था। हर किसी का कहना था कि अब मजदूर के परिवार का पालन पोषण कैसे होगा?
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