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सुरक्षित सफर -संशोधित
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कुशाग्र मिश्रा
रोहतक। शहर के प्रमुख चौराहों और सड़कों पर सफर को सुरक्षित बनाने के लिए अगले हफ्ते से ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव के लिए ट्रायल शुरू किया जा रहा है। एक महीने के ट्रायल के दौरान अगर शहर के पांच प्रमुख चौराहों समेत 13 किमी के चिन्हित मार्ग पर पैदल यात्रियाें, साइक्लिस्ट और बच्चों का आवागमन सुरक्षित और बेहतर हुआ तो इस व्यवस्था को स्थायी कर दिया जाएगा। चौराहों का नया डिजाइन तैयार कर लिया गया है। प्रशासन एवं पुलिस से भी इसे हरी झंडी मिल गई है। ट्रायल के दौरान चौराहों और सड़क पर कोन और नाके लगाकर अस्थायी व्यवस्था लागू की जाएगी, जिस पर एक महीने तक वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट के पदाधिकारी नजर रखेंगे।
वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट इंडिया के रिसर्च कंसल्टेंट निशांत भटनागर ने बताया कि शहर के 13 किलोमीटर के मार्ग को खासकर बच्चों के सफर के लिए सुरक्षित बनाया जाएगा। इनमें सुखपुरा चौक, शीला बाईपास चौक, राजीव चौक, मेडिकल मोड चौक और आंबेडकर चौक भी शामिल हैं। फिलहाल सुखपुरा चौक पर बदलाव का डिजाइन तैयार कर लिया गया है, जिसे लागू करने की अनुमति उपायुक्त, एसपी, डीएसपी ट्रैफिक, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी और एचएसवीपी के साथ बैठक में मिल गई है। इसके साथ ही एक महीने के लिए ट्रायल की रूपरेखा तैयार कर ली गई है, जिसे फरवरी के पहले सप्ताह में लागू किया जाएगा। बाकी चौराहों का भी डिजाइन तैयार कर अनुमति लेकर ट्रायल किया जाएगा।
- नए डिजाइन की खास बातें
1. चौराहे पर आईलैंड बनाकर सड़क की चौड़ाई को कम किया गया, जिससे वाहन खाली सड़क पाकर स्पीड में चौराहे से नहीं गुजर पाएं।
2. सड़क पार करने के लिए मार्ग को छोटा किया गया है, जिससे पैदल यात्री कम से कम वक्त ही सड़क पर रहे, इसके अलग क्रॉसिंग बनाई गई है।
3. मुख्य मार्ग पर डिवाइडर की लंबाई को बढ़ाया गया, जिससे आने और जाने वाला यातायात अपनी लेन पर ही रहे।
4. नए डिजाइन में फुटपाथ की जगह दी गई, जिससे पैदल यात्रियों को आने और जाने से सहायता मिलेगी।
- समझिए प्रोजेक्ट को
हरियाणा सरकार और स्विट्जरलैंड की बॉटनार फाउंडेशन की ओर से डब्ल्यूआरआई और नैसकॉम फाउंडेशन के सहयोग से दो वर्षीय प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई है, जिसका मकसद है कि बच्चों के सफर को सुरक्षित बनाया जाए। चाहे वह घर के किसी बड़े के साथ या अकेला ही सफर कर रहा हो। यह सफर सुरक्षित होना चाहिए।
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रोहतक। शहर के प्रमुख चौराहों और सड़कों पर सफर को सुरक्षित बनाने के लिए अगले हफ्ते से ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव के लिए ट्रायल शुरू किया जा रहा है। एक महीने के ट्रायल के दौरान अगर शहर के पांच प्रमुख चौराहों समेत 13 किमी के चिन्हित मार्ग पर पैदल यात्रियाें, साइक्लिस्ट और बच्चों का आवागमन सुरक्षित और बेहतर हुआ तो इस व्यवस्था को स्थायी कर दिया जाएगा। चौराहों का नया डिजाइन तैयार कर लिया गया है। प्रशासन एवं पुलिस से भी इसे हरी झंडी मिल गई है। ट्रायल के दौरान चौराहों और सड़क पर कोन और नाके लगाकर अस्थायी व्यवस्था लागू की जाएगी, जिस पर एक महीने तक वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट के पदाधिकारी नजर रखेंगे।
वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट इंडिया के रिसर्च कंसल्टेंट निशांत भटनागर ने बताया कि शहर के 13 किलोमीटर के मार्ग को खासकर बच्चों के सफर के लिए सुरक्षित बनाया जाएगा। इनमें सुखपुरा चौक, शीला बाईपास चौक, राजीव चौक, मेडिकल मोड चौक और आंबेडकर चौक भी शामिल हैं। फिलहाल सुखपुरा चौक पर बदलाव का डिजाइन तैयार कर लिया गया है, जिसे लागू करने की अनुमति उपायुक्त, एसपी, डीएसपी ट्रैफिक, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी और एचएसवीपी के साथ बैठक में मिल गई है। इसके साथ ही एक महीने के लिए ट्रायल की रूपरेखा तैयार कर ली गई है, जिसे फरवरी के पहले सप्ताह में लागू किया जाएगा। बाकी चौराहों का भी डिजाइन तैयार कर अनुमति लेकर ट्रायल किया जाएगा।
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- नए डिजाइन की खास बातें
1. चौराहे पर आईलैंड बनाकर सड़क की चौड़ाई को कम किया गया, जिससे वाहन खाली सड़क पाकर स्पीड में चौराहे से नहीं गुजर पाएं।
2. सड़क पार करने के लिए मार्ग को छोटा किया गया है, जिससे पैदल यात्री कम से कम वक्त ही सड़क पर रहे, इसके अलग क्रॉसिंग बनाई गई है।
3. मुख्य मार्ग पर डिवाइडर की लंबाई को बढ़ाया गया, जिससे आने और जाने वाला यातायात अपनी लेन पर ही रहे।
4. नए डिजाइन में फुटपाथ की जगह दी गई, जिससे पैदल यात्रियों को आने और जाने से सहायता मिलेगी।
- समझिए प्रोजेक्ट को
हरियाणा सरकार और स्विट्जरलैंड की बॉटनार फाउंडेशन की ओर से डब्ल्यूआरआई और नैसकॉम फाउंडेशन के सहयोग से दो वर्षीय प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई है, जिसका मकसद है कि बच्चों के सफर को सुरक्षित बनाया जाए। चाहे वह घर के किसी बड़े के साथ या अकेला ही सफर कर रहा हो। यह सफर सुरक्षित होना चाहिए।
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