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अंडरपास के लिए होगी आर-पार की लड़ाई : संघर्ष समिति
Updated Sat, 19 Aug 2017 01:12 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
खोल।
गोविंदपुरी में अंडरपास बनाने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। शुक्रवार को अंडरपास संघर्ष समिति गोविंदपुरी के बैनर तले प्रधान ओमप्रकाश यादव के नेतृत्व में ग्रामीणों ने रेवाड़ी पहुंचकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इससे पूर्व रेवाड़ी के नेहरू पार्क से जुलूस निकालते हुए जिला सचिवालय पहुंचे। यहां जिला उपायुक्त को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद और विधायक के नाम ज्ञापन सौंपा गया। जुलूस में 58 गांवों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें महिलाओं की संख्या अधिक थी। इस दौरान गोविंदपुरी गांव के ग्रामीणों ने कहा कि अगर शीघ्र ही अंडरपास का निर्माण शुरू नहीं किया तो इस बार शांति से नहीं, बल्कि आर पार की लड़ाई होगी।
संघर्ष समिति सदस्यों एवं ग्रामीणों ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर कहा कि गोविंदपुरी के लिए सरकारी तौर पर कोई रास्ता नहीं है। ग्रामीणों एवं बच्चों को रेलवे लाइन को क्रास कर स्कूल और घर जाना पड़ता है। इससे हमेशा ही हादसे का डर रहता है। इस समस्या के निदान के लिए ग्रामीणों ने 58 गांवों की पंचायत बुलाकर अंडरपास संघर्ष समिति का गठन किया। उस समय आश्वासन दिया था कि अंडरपास की मांग मान ली गई है। शीघ्र ही यह काम शुरू करा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि 135 दिन की लड़ाई को व्यर्थ नहीं जाने देंगे।
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खोल।
गोविंदपुरी में अंडरपास बनाने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। शुक्रवार को अंडरपास संघर्ष समिति गोविंदपुरी के बैनर तले प्रधान ओमप्रकाश यादव के नेतृत्व में ग्रामीणों ने रेवाड़ी पहुंचकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इससे पूर्व रेवाड़ी के नेहरू पार्क से जुलूस निकालते हुए जिला सचिवालय पहुंचे। यहां जिला उपायुक्त को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद और विधायक के नाम ज्ञापन सौंपा गया। जुलूस में 58 गांवों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें महिलाओं की संख्या अधिक थी। इस दौरान गोविंदपुरी गांव के ग्रामीणों ने कहा कि अगर शीघ्र ही अंडरपास का निर्माण शुरू नहीं किया तो इस बार शांति से नहीं, बल्कि आर पार की लड़ाई होगी।
संघर्ष समिति सदस्यों एवं ग्रामीणों ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर कहा कि गोविंदपुरी के लिए सरकारी तौर पर कोई रास्ता नहीं है। ग्रामीणों एवं बच्चों को रेलवे लाइन को क्रास कर स्कूल और घर जाना पड़ता है। इससे हमेशा ही हादसे का डर रहता है। इस समस्या के निदान के लिए ग्रामीणों ने 58 गांवों की पंचायत बुलाकर अंडरपास संघर्ष समिति का गठन किया। उस समय आश्वासन दिया था कि अंडरपास की मांग मान ली गई है। शीघ्र ही यह काम शुरू करा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि 135 दिन की लड़ाई को व्यर्थ नहीं जाने देंगे।
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