फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   रोहतक में आते ही वीआईपी बन जाते है बाहरी जिलों के बंदी

रोहतक में आते ही वीआईपी बन जाते है बाहरी जिलों के बंदी

Sun, 24 Jun 2018 02:40 AM IST
Updated Sun, 24 Jun 2018 02:40 AM IST
विज्ञापन
रोहतक में आते ही वीआईपी बन जाते है बाहरी जिलों के बंदी
रोहतक आते ही वीआईपी बन जाते हैं बाहरी जिलों के बंदी
विज्ञापन

- रोहतक में पहुंचते ही पुलिसकर्मी बंदियों को कराते हैं मौज

पूर्व में भी रेलवे स्टेशन पर हरिद्वार के एक बंदी को छोड़कर चले गए थे तीन पुलिसकर्मी
हरिद्वार पुलिस कर रही मामले की जांच, पीजीआई में ही दो अन्य बंदियों को कराई गई थी मौज

अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। मानो या न मानो मगर है बिल्कुल सच। रोहतक में आते ही बाहरी जिलों के बंदी वीआईपी बन जाते हैं। शहर में आते ही बंदियों को खूब मौज कराई जाती है। गुरुग्राम पुलिस द्वारा बंदियों के एक्सरे के दौरान लापरवाही बरतने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व में हरिद्वार व फरीदाबाद पुलिस भी बंदियों को लाने के दौरान लापरवाही बरत चुकी है। हरिद्वार पुलिस तो बंदियों की लापरवाही की जांच कर रही है।

शनिवार को गुरुगाम पुलिस तीन बंदियों को लेकर पीजीआई पहुंची। बंदियों के एक्सरे के दौरान तीनों पुलिसकर्मी लापरवाह दिखाई दिए। दो पुलिसकर्मी तो बंदियों को छोड़कर कुछ देर के लिए लापता हो गए। हालांकि बाद में आ गए थे । गुरुग्राम पुलिस द्वारा लापरवाही बरतने का यह कोई पहला मामला नहीं है। दो माह पूर्व ही हरिद्वार पुलिस एक बंदी को लेकर रोहतक कोर्ट पहुंची थी। रोहतक रेलवे स्टेशन पर तीनों पुलिसकर्मी बंदी के हाथ में ही रस्सी थमाकर 15 मिनट के लिए लापता हो गए थे। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद हरिद्वार की एसपी ने मामले की जांच बैठा दी थी। हालांकि इस मामले में अभी कार्रवाई नहीं हो सकी है। इससे पूर्व डेढ़ माह पूर्व फरीदाबाद पुलिस ने भी पीजीआई में एक बंदी को मौज कराई थी।
विज्ञापन

बाहरी जिलों की पुलिस रोहतक में पहुंचते ही बंदियों के प्रति लापरवाह हो जाती है। पुलिस की लापरवाही के कारण कभी भी बंदी पुलिस को चकमा देकर फरार हो सकते है। मगर पुलिसकर्मी सबक लेने को तैयार नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पुलिसकर्मी यदि बंदियों को कोर्ट व किसी भी अस्पताल में उपचार के लिए ले जाने के दौरान लापरवाही बरतती है तो यह गंभीर मामला है। जांच कराकर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

- बीएस संधू, डीजीपी, हरियाणा

परिजनों से भी खूब कराई जाती है बात
पीजीआई में आए दिन देखने में आता है कि विभिन्न जिलों की पुलिस उपचार के लिए बंदियों को लाने के दौरान उनकी परिजनों से भी बात कराती दिखाई देती है। पुलिस को यह लापरवाही कभी भी भारी पड़ सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed