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करोर गांव में एक थप्पड़ ने करा दिए 18 मर्डर, वर्ष 2001 में शुरु हुई थी रंजिश
Updated Sat, 28 Apr 2018 02:24 AM IST
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करोर गांव में एक थप्पड़ ने करा दिए 18 मर्डर, वर्ष 2001 में शुरू हुई थी रंजिश
- आनंद और रामे पक्ष के लोगों के बीच चली आ रही है रंजिश, आनंद का भाई गांव का रहा है सरपंच
- पुलिस भी रंजिश को खत्म कराने में हो रही पूरी तरह से नाकाम
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
करोर गांव में मामूली कहासुनी को लेकर मारे गए एक थप्पड़ के कारण अब तक 18 मर्डर हो चुके हैं। परिजनों ने आनंद की हत्या भी इसी रंजिश के तहत होने का दावा किया है। हालांकि पुलिस अभी इसी रंजिश में हत्या की बात से इनकार कर रही है। पुलिस गांव में चल रही इस रंजिश को खत्म कराने में पूरी तरह से नाकाम रही है।
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2001 में श्रीभगवान गांव के सरपंच थे। लगातार दो योजनाओं तक वह सरपंच रहे। उसके भाई सेवक राम की दिल्ली में खोया की दुकान थी। आरोप है कि गांव के रामे पक्ष ने दिल्ली में दुकान पर जाकर सेवकराम के साथ अभद्रता कर दी थी। जिस पर श्रीभगवान व रामे के बीच नोकझोंक हो गई थी। श्रीभगवान ने रामे को थप्पड़ मार दिया था। इसी रंजिश में सबसे पहले वर्ष 2001 में सेवकराम की खरावड रेलवे स्टेशन पर गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद दूसरे पक्ष के रामे की हत्या की गई। इसके बाद पहले पक्ष के श्रीभगवान, फूल कुमार, मिंटू, दिलबाग, रणवीर समेत नौ की की विभिन्न स्थानों पर गोली मारकर हत्या कर दी। इसके अलावा रामे पक्ष के रामे और रमेश समेत छह की हत्या कर गई थी। मृतक आनंद व उसका भाई धर्मवीर एक साल पूर्व ही हत्या के मामले में बरी किए गए थे। धर्मपाल का दावा है कि कई हत्या के मामलों में उन्हें झूठा फंसाया गया। पुलिस ने रंजिश को खत्म करने की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। वरना आनंद की जान बचाई जा सकती थी।
खोल दी गई थी पुलिस चौकी
गांव में दोनों परिवारों के बीच चल रही रंजिश को रोकने के लिए पुलिस ने करीब दो साल पूर्व ही गांव में सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस चौकी खोल दी थी। इसके बाद भी गांव में हत्याओं का क्रम जारी है।
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पुलिस से लगाई गुहार, फिर भी नहीं मिली सुरक्षा
रोहतक। परिजनों का आरोप है कि करोर गांव के आनंद की हत्या पुलिस की लापरवाही से की गई। गांव में चली आ रही रंजिश को लेकर सुरक्षा व शस्त्र लाइसेंस की मांग कई बार पुलिस से लेकर एसपी तक से कर चुके थे मगर उनकी कोई सुनवाई नही की गई। नतीजन परिवार में आनंद की भी हत्या कर दी गई। धर्मपाल ने बताया कि परिवार में हो रही हत्या के चलते लोग दहशत में थे। तीन माह पूर्व ही वह भाई आनंद के साथ खेत में जा रहा था। आरोपी पक्ष के लोगों ने जानलेवा हमला कर दिया था। मामले की शिकायत थाने पर की थी। इसके बाद उसकी पत्नी पर आरोपी पक्ष के लोगों ने हमला बोल दिया था। आरोप है कि उन्हें पहले ही आशंका थी कि परिवार के अन्य लोगों की भी हत्या की जा सकती है। जिसको लेकर उसने दस से अधिक बार थाना पुलिस से लेकर एसपी तक से सुरक्षा की गुहार लगाई थी। बावजूद इसके न तो सुरक्षा प्रदान कराई गई और न ही शस्त्र लाइसेंस दिया गया। उधर डीएसपी ने मामले की जानकारी से इनकार किया है।
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- आनंद और रामे पक्ष के लोगों के बीच चली आ रही है रंजिश, आनंद का भाई गांव का रहा है सरपंच
- पुलिस भी रंजिश को खत्म कराने में हो रही पूरी तरह से नाकाम
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
करोर गांव में मामूली कहासुनी को लेकर मारे गए एक थप्पड़ के कारण अब तक 18 मर्डर हो चुके हैं। परिजनों ने आनंद की हत्या भी इसी रंजिश के तहत होने का दावा किया है। हालांकि पुलिस अभी इसी रंजिश में हत्या की बात से इनकार कर रही है। पुलिस गांव में चल रही इस रंजिश को खत्म कराने में पूरी तरह से नाकाम रही है।
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2001 में श्रीभगवान गांव के सरपंच थे। लगातार दो योजनाओं तक वह सरपंच रहे। उसके भाई सेवक राम की दिल्ली में खोया की दुकान थी। आरोप है कि गांव के रामे पक्ष ने दिल्ली में दुकान पर जाकर सेवकराम के साथ अभद्रता कर दी थी। जिस पर श्रीभगवान व रामे के बीच नोकझोंक हो गई थी। श्रीभगवान ने रामे को थप्पड़ मार दिया था। इसी रंजिश में सबसे पहले वर्ष 2001 में सेवकराम की खरावड रेलवे स्टेशन पर गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद दूसरे पक्ष के रामे की हत्या की गई। इसके बाद पहले पक्ष के श्रीभगवान, फूल कुमार, मिंटू, दिलबाग, रणवीर समेत नौ की की विभिन्न स्थानों पर गोली मारकर हत्या कर दी। इसके अलावा रामे पक्ष के रामे और रमेश समेत छह की हत्या कर गई थी। मृतक आनंद व उसका भाई धर्मवीर एक साल पूर्व ही हत्या के मामले में बरी किए गए थे। धर्मपाल का दावा है कि कई हत्या के मामलों में उन्हें झूठा फंसाया गया। पुलिस ने रंजिश को खत्म करने की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। वरना आनंद की जान बचाई जा सकती थी।
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खोल दी गई थी पुलिस चौकी
गांव में दोनों परिवारों के बीच चल रही रंजिश को रोकने के लिए पुलिस ने करीब दो साल पूर्व ही गांव में सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस चौकी खोल दी थी। इसके बाद भी गांव में हत्याओं का क्रम जारी है।
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पुलिस से लगाई गुहार, फिर भी नहीं मिली सुरक्षा
रोहतक। परिजनों का आरोप है कि करोर गांव के आनंद की हत्या पुलिस की लापरवाही से की गई। गांव में चली आ रही रंजिश को लेकर सुरक्षा व शस्त्र लाइसेंस की मांग कई बार पुलिस से लेकर एसपी तक से कर चुके थे मगर उनकी कोई सुनवाई नही की गई। नतीजन परिवार में आनंद की भी हत्या कर दी गई। धर्मपाल ने बताया कि परिवार में हो रही हत्या के चलते लोग दहशत में थे। तीन माह पूर्व ही वह भाई आनंद के साथ खेत में जा रहा था। आरोपी पक्ष के लोगों ने जानलेवा हमला कर दिया था। मामले की शिकायत थाने पर की थी। इसके बाद उसकी पत्नी पर आरोपी पक्ष के लोगों ने हमला बोल दिया था। आरोप है कि उन्हें पहले ही आशंका थी कि परिवार के अन्य लोगों की भी हत्या की जा सकती है। जिसको लेकर उसने दस से अधिक बार थाना पुलिस से लेकर एसपी तक से सुरक्षा की गुहार लगाई थी। बावजूद इसके न तो सुरक्षा प्रदान कराई गई और न ही शस्त्र लाइसेंस दिया गया। उधर डीएसपी ने मामले की जानकारी से इनकार किया है।