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सीबीआई कोर्ट ने की टिप्पणी : डेरा मुखी ने पार की मानवता के प्रति सारी हदें
Updated Tue, 29 Aug 2017 02:51 AM IST
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विजेंद्र कौशिक
रोहतक।
सीबीआई की अदालत ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सजा सुनाते हुए तल्ख टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि जो व्यक्ति अपने भक्तों के साथ जंगली जानवरों जैसा व्यवहार करता है, वह दया का पात्र नहीं हो सकता। डेरा मुखी ने मानवता के प्रति सारी हदें पार कर दी। जो भक्त उसे पिता के बराबर गुरू और भगवान मानती थी, उनका न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक शोषण भी किया। साथ ही उन्हें भगवान भरोसे भी छोड़ दिया। इस तरह के कृत्य से न केवल पीड़ित का शारीरिक शोषण हुआ, बल्कि उनका व्यक्तित्व भी नष्ट हो गया। जबकि दोषी धार्मिक संस्था डेरा सच्चा सौदा का प्रमुख है। उनके द्वारा ऐसा अपराध देश के अंदर आध्यात्मिक, सामाजिक, धार्मिक और संस्कृति लिए भी नुकसान दायक है। दोषी के कृत्य ने प्राचीन धरा की विरासत को अपूर्णीय क्षति पहुंचाई है।
समाज पर पड़ने वाले प्रभाव का बार-बार जिक्र
सीबीआई के जज ने अपने फैसले में बार-बार सामाजिक व्यवस्थाओं का जिक्र किया है। जज ने कहा कि ऐसे अपराधों पर समाज पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। एक अन्य मामले का हवाला देते हुए कहा कि अपराध में सजा का सामाजिक लक्ष्य भी होता है। यह भी कहा गया कि दोषी को यह भी अहसास होना चाहिए कि उसके अपराध से पीड़ित के जीवन को नुकसान के अलावा सामाजिक ताने-बाने को भी क्षति पहुंची है। इसलिए दोषी को उचित सजा देते समय पीड़ित को न्याय देने के साथ ही समाज के बारे में भी ध्यान रखना चाहिए।
धन की कोई कमी नहीं
अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि जो व्यक्ति फिल्म बना सकता है। बार-बार विदेश जा सकता है। अपनी फिल्मों के प्रमोशन के लिए कई आयोजन किए हैं। ऐसे में जुर्माना सुनाते समय यह ध्यान रखा गया है कि दोषी के पास धन की कोई कमी नहीं है।
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रोहतक।
सीबीआई की अदालत ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सजा सुनाते हुए तल्ख टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि जो व्यक्ति अपने भक्तों के साथ जंगली जानवरों जैसा व्यवहार करता है, वह दया का पात्र नहीं हो सकता। डेरा मुखी ने मानवता के प्रति सारी हदें पार कर दी। जो भक्त उसे पिता के बराबर गुरू और भगवान मानती थी, उनका न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक शोषण भी किया। साथ ही उन्हें भगवान भरोसे भी छोड़ दिया। इस तरह के कृत्य से न केवल पीड़ित का शारीरिक शोषण हुआ, बल्कि उनका व्यक्तित्व भी नष्ट हो गया। जबकि दोषी धार्मिक संस्था डेरा सच्चा सौदा का प्रमुख है। उनके द्वारा ऐसा अपराध देश के अंदर आध्यात्मिक, सामाजिक, धार्मिक और संस्कृति लिए भी नुकसान दायक है। दोषी के कृत्य ने प्राचीन धरा की विरासत को अपूर्णीय क्षति पहुंचाई है।
समाज पर पड़ने वाले प्रभाव का बार-बार जिक्र
सीबीआई के जज ने अपने फैसले में बार-बार सामाजिक व्यवस्थाओं का जिक्र किया है। जज ने कहा कि ऐसे अपराधों पर समाज पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। एक अन्य मामले का हवाला देते हुए कहा कि अपराध में सजा का सामाजिक लक्ष्य भी होता है। यह भी कहा गया कि दोषी को यह भी अहसास होना चाहिए कि उसके अपराध से पीड़ित के जीवन को नुकसान के अलावा सामाजिक ताने-बाने को भी क्षति पहुंची है। इसलिए दोषी को उचित सजा देते समय पीड़ित को न्याय देने के साथ ही समाज के बारे में भी ध्यान रखना चाहिए।
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धन की कोई कमी नहीं
अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि जो व्यक्ति फिल्म बना सकता है। बार-बार विदेश जा सकता है। अपनी फिल्मों के प्रमोशन के लिए कई आयोजन किए हैं। ऐसे में जुर्माना सुनाते समय यह ध्यान रखा गया है कि दोषी के पास धन की कोई कमी नहीं है।
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