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Rohtak News: दिवाली पर गाय के गोबर के दीयाें से जगमग होंगे घर-आंगन
Tue, 07 Oct 2025 02:50 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Tue, 07 Oct 2025 02:50 AM IST
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21 पहरावर गांव में गाय के गोबर से दीये बनाते हुए शुभम स्वयं सहायता समूह की सदस्य । संवाद
शुभम महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं बना रहीं गोबर के दीये, दिवाली पर होगी बिक्री
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। दिवाली पर गाय के गोबर से बने दीयों से घर-आंगन जगमगाएंगे। बजार में गाय के गोबर से बने दीयों की मांग बढ़ गई है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए शहर के नजदीकी गांव पहरावर की महिलाएंं गाय के गोबर से दीये तैयार कर रही हैं।
अपने आप को सशक्त बनाने के लिए शुभम महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं करीब डेढ़ महीने से गोबर के दीये बना रही हैं। समूह की सदस्य नीलम, पूजा व सीमा बताती हैं कि समूह के पास एक मशीन हैं, जिससे गाय के गोबर से दीये बना रही हैं। दीये बनाने वाली महिलाओं में पूजा, सीमा व वर्षा भी शामिल हैं।
नीलम का कहना है कि मशीन से वह रोजाना 700 दीये बना लेती हैं और अब तक 5000 दीये बना चुकी हैं। उन्हें शहर में लगी प्रदर्शनी में स्टाल लगाने के तीन अवसर मिले हैं। उनका कहना है कि अगर उनको और मशीन निगम की ओर से मुहैया कराई जाए तो दीयों की संख्या और बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल महिलाओं ने एक महीने में करीब सात-सात हजार रुपये की आमदनी की है। उन्होंने गाय के गोबर से लकड़ी बनाने की मशीन देने की मांग भी की है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। दिवाली पर गाय के गोबर से बने दीयों से घर-आंगन जगमगाएंगे। बजार में गाय के गोबर से बने दीयों की मांग बढ़ गई है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए शहर के नजदीकी गांव पहरावर की महिलाएंं गाय के गोबर से दीये तैयार कर रही हैं।
अपने आप को सशक्त बनाने के लिए शुभम महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं करीब डेढ़ महीने से गोबर के दीये बना रही हैं। समूह की सदस्य नीलम, पूजा व सीमा बताती हैं कि समूह के पास एक मशीन हैं, जिससे गाय के गोबर से दीये बना रही हैं। दीये बनाने वाली महिलाओं में पूजा, सीमा व वर्षा भी शामिल हैं।
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नीलम का कहना है कि मशीन से वह रोजाना 700 दीये बना लेती हैं और अब तक 5000 दीये बना चुकी हैं। उन्हें शहर में लगी प्रदर्शनी में स्टाल लगाने के तीन अवसर मिले हैं। उनका कहना है कि अगर उनको और मशीन निगम की ओर से मुहैया कराई जाए तो दीयों की संख्या और बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल महिलाओं ने एक महीने में करीब सात-सात हजार रुपये की आमदनी की है। उन्होंने गाय के गोबर से लकड़ी बनाने की मशीन देने की मांग भी की है।
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