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अदालत ने पलटा एसडीएम का फैसला, विवाहिता को वापस घर छोड़कर आई पुलिस
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रोहतक। शहर के आर्य नगर थाना एरिया में विवाहिता व ससुराल पक्ष के बीच कानूनी दांव पेंच रहा। शुक्रवार दोपहर जहां एसडीएम के फैसले के बाद नव विवाहिता को पुलिस ने सास के घर से निकाल दिया था। शुक्रवार शाम को कोर्ट के निर्देश पर वही पुलिस विवाहिता को वापस घर में छोड़कर आई। अदालत ने आर्यनगर थाना पुलिस को हिदायत दी है कि विवाहिता के साथ किसी तरह की हिंसा नहीं होनी चाहिए। उसकी सुरक्षा भी पुख्ता की जाए।
दिल्ली निवासी विवाहिता ने अदालत में याचिका दायर करके बताया कि उसकी शादी रोहतक के युवक के साथ चार साल पहले हुई थी। दिसंबर माह में उसके पति उसे मायके छोड़कर आ गए। इसके बाद जिला अदालत में तलाक का केस दायर कर दिया। वह आठ फरवरी को ससुराल आई और घर में चली गई। ससुराल पक्ष उसे घर से निकालना चाहता है। इसके लिए सास ने एसडीएम को शिकायत दी। सिटीजन एक्ट के आधार पर लिए गए फैसले के आधार पर पुलिस ने शुक्रवार दोपहर घर से बेघर कर दिया। सूचना पाकर उसके पिता व परिजन रोहतक पहुंचे। इसके बाद उसने न्यायिक अधिकारी पल्लवी ओझा की अदालत में याचिका दायर करके एसडीएम के फैसले को चुनौती दी। विवाहिता के वकील ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत विवाहिता का ससुराल के घर पर पूरा हक है। उसे यूं बेघर नहीं किया जा सकता। अदालत ने सुनवाई के बाद आर्य नगर थाना के एसएचओ व प्रोटेक्शन अधिकारी को निर्देश दिए कि विवाहिता को पुलिस खुद ससुराल स्थित घर में छोड़कर आए। उसके रहने के लिए घर के अंदर ही अलग से व्यवस्था की जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि विवाहिता को किसी तरह की परेशानी न आए। उसके साथ हिंसा नहीं होनी चाहिए। इसके बाद पुलिस विवाहिता को उसकी ससुराल स्थित घर में छोड़कर आई। साथ ही ससुराल पक्ष को आवश्यक हिदायत दी।
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दिल्ली निवासी विवाहिता ने अदालत में याचिका दायर करके बताया कि उसकी शादी रोहतक के युवक के साथ चार साल पहले हुई थी। दिसंबर माह में उसके पति उसे मायके छोड़कर आ गए। इसके बाद जिला अदालत में तलाक का केस दायर कर दिया। वह आठ फरवरी को ससुराल आई और घर में चली गई। ससुराल पक्ष उसे घर से निकालना चाहता है। इसके लिए सास ने एसडीएम को शिकायत दी। सिटीजन एक्ट के आधार पर लिए गए फैसले के आधार पर पुलिस ने शुक्रवार दोपहर घर से बेघर कर दिया। सूचना पाकर उसके पिता व परिजन रोहतक पहुंचे। इसके बाद उसने न्यायिक अधिकारी पल्लवी ओझा की अदालत में याचिका दायर करके एसडीएम के फैसले को चुनौती दी। विवाहिता के वकील ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत विवाहिता का ससुराल के घर पर पूरा हक है। उसे यूं बेघर नहीं किया जा सकता। अदालत ने सुनवाई के बाद आर्य नगर थाना के एसएचओ व प्रोटेक्शन अधिकारी को निर्देश दिए कि विवाहिता को पुलिस खुद ससुराल स्थित घर में छोड़कर आए। उसके रहने के लिए घर के अंदर ही अलग से व्यवस्था की जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि विवाहिता को किसी तरह की परेशानी न आए। उसके साथ हिंसा नहीं होनी चाहिए। इसके बाद पुलिस विवाहिता को उसकी ससुराल स्थित घर में छोड़कर आई। साथ ही ससुराल पक्ष को आवश्यक हिदायत दी।
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