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अधिकारियों के रुख पर टिकी पार्षदों की नजरें
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जिला परिषद चेयरमैन सतीश भालौठ के धरने के बीच में परिषद की विशेष बैठक सोमवार दोपहर तीन बजे होगी। उसमें अधिकारियों का रुख क्या रहता है, इस पर भालौठ और सभी पार्षदों की नजरें हैं।
भालौठ ने पार्षदों के साथ कुछ दिन पहले एडीसी महेंद्र पाल को उपायुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा था। इसमें कहा गया था कि बार-बार कहने के बाद भी उनके मुद्दे हल नहीं किए जा रहे हैं। ज्ञापन में छह मुद्दों का जिक्र किया गया था। प्रशासन को दस दिनों का अल्टीमेटम दिया गया था। लेकिन इस दौरान कुछ नहीं किया गया। आखिर भालौठ ने पार्षदों के साथ 14 सितंबर को अपने कार्यालय में धरना शुरू कर दिया। दूसरे दिन भी धरना जारी रहा तो प्रशासन हरकत में आया। मुद्दों से संबंधित अधिकारियों ने जवाब देने शुरू किए, लेकिन वह स्पष्ट न होने के कारण खारिज कर दिए गए। उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार भी भालौठ से फोन पर बात की। लेकिन वह इसी बात पर अड़े रहे कि अधिकारी यह लिख कर दें कि इन मुद्दों का समाधान कब तक कर देंगे। अधिकारियों ने यह लिख कर नहीं दिया, धरना चलता रहा और आखिरकर प्रशासन के गले की फांस बन गया। इसी बीच भालौठ ने जिला परिषद की विशेष बैठक बुला ली। बड़ी चालाकी से अपने सभी मुद्दों को उसके एजेंडे में शामिल कर लिया। पहली बार एजेंडे में यह भी लिखा गया कि अधिकारी कार्रवाई रिपोर्ट लेकर आएं। उनके प्रमुख मुद्दों में सामान्य व पशु अस्पतालों में उपलब्ध दवाओं की सूची बाहर चस्पा करना और इसकी जानकारी वट्सएप पर सरपंच आदि को देना शामिल है। खेतीबाड़ी विभाग के उप निदेशक और एडीओ का मोबाइल नंबर संबंधित गांवों के सरपंचों के पास हों, गांवों में किसी सार्वजनिक स्थान पर लगाया जाए ताकि किसान संपर्क कर सकें। निजी स्कूल बाहर बोर्ड लगाकर फीस और 134ए के तहत दाखिले का ब्योरा दें। सिंचाई विभाग यह चिन्हित करे कि बारिश में कहां जलभराव होता है, जून ही वहां मशीन लगाए ताकि पानी भरते ही निकासी हो सके। मोबाइल टॉवरों से फीस वसूली जाए। इसके अलावा उन्होंने उपायुक्त से कोरोना पर अब तक हुई कार्रवाई, खरीद आदि का ब्योरा मांगा था। सबकी निगाहें इस पर हैं कि अगर एजेंडे में शामिल होने के बाद भी अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं देते हैं, भालौठ का क्या रुख रहेगा। नियमानुसार उन्हें किसी भी अधिकारी पर कार्रवाई का अधिकार नहीं है। वह सिर्फ उपायुक्त से लेकर मुख्यमंत्री तक कार्रवाई की सिफारिश कर सकते हैं। इस स्थिति में क्या वह धरने के बजाय विरोध जताने का कोई दूसरा रास्ता निकालेंगे, इसकी घोषणा वह सोमवार शाम को ही करेंगे।
2017 से उठा रहे हैं दवाओं का मुद्दा
चेयरमैन भालौठ ने बताया कि दवाओं का मुद्दा वह 2017 से उठा रहे हैं, जब वह पार्षद थे और बलराज कुंडू जिप चेयरमैन। उस समय की बैठकों के एजेंडेे में भी यह मुद्दा शामिल है। उन्होंने इतने साल पहले यह मांग उठाई थी कि सामान्य और पशु अस्पतालों में उपलब्ध दवाओं की सूची बाहर चस्पा होनी चाहिए। सरपंचों, पंचायत समिति और जिला परिषद मेंबरों को व्हाट्सएप पर भेजी जानी चाहिए। सभी जिप चेयरमैन की सीएम के साथ बैठक में भी उन्होंने यह मुद्दा उठाया था, जिस पर सीएम ने भी सहमति जताई थी। लेकिन इतने साल बाद भी सेहत विभाग इसे लागू नहीं कर सका।
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भालौठ ने पार्षदों के साथ कुछ दिन पहले एडीसी महेंद्र पाल को उपायुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा था। इसमें कहा गया था कि बार-बार कहने के बाद भी उनके मुद्दे हल नहीं किए जा रहे हैं। ज्ञापन में छह मुद्दों का जिक्र किया गया था। प्रशासन को दस दिनों का अल्टीमेटम दिया गया था। लेकिन इस दौरान कुछ नहीं किया गया। आखिर भालौठ ने पार्षदों के साथ 14 सितंबर को अपने कार्यालय में धरना शुरू कर दिया। दूसरे दिन भी धरना जारी रहा तो प्रशासन हरकत में आया। मुद्दों से संबंधित अधिकारियों ने जवाब देने शुरू किए, लेकिन वह स्पष्ट न होने के कारण खारिज कर दिए गए। उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार भी भालौठ से फोन पर बात की। लेकिन वह इसी बात पर अड़े रहे कि अधिकारी यह लिख कर दें कि इन मुद्दों का समाधान कब तक कर देंगे। अधिकारियों ने यह लिख कर नहीं दिया, धरना चलता रहा और आखिरकर प्रशासन के गले की फांस बन गया। इसी बीच भालौठ ने जिला परिषद की विशेष बैठक बुला ली। बड़ी चालाकी से अपने सभी मुद्दों को उसके एजेंडे में शामिल कर लिया। पहली बार एजेंडे में यह भी लिखा गया कि अधिकारी कार्रवाई रिपोर्ट लेकर आएं। उनके प्रमुख मुद्दों में सामान्य व पशु अस्पतालों में उपलब्ध दवाओं की सूची बाहर चस्पा करना और इसकी जानकारी वट्सएप पर सरपंच आदि को देना शामिल है। खेतीबाड़ी विभाग के उप निदेशक और एडीओ का मोबाइल नंबर संबंधित गांवों के सरपंचों के पास हों, गांवों में किसी सार्वजनिक स्थान पर लगाया जाए ताकि किसान संपर्क कर सकें। निजी स्कूल बाहर बोर्ड लगाकर फीस और 134ए के तहत दाखिले का ब्योरा दें। सिंचाई विभाग यह चिन्हित करे कि बारिश में कहां जलभराव होता है, जून ही वहां मशीन लगाए ताकि पानी भरते ही निकासी हो सके। मोबाइल टॉवरों से फीस वसूली जाए। इसके अलावा उन्होंने उपायुक्त से कोरोना पर अब तक हुई कार्रवाई, खरीद आदि का ब्योरा मांगा था। सबकी निगाहें इस पर हैं कि अगर एजेंडे में शामिल होने के बाद भी अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं देते हैं, भालौठ का क्या रुख रहेगा। नियमानुसार उन्हें किसी भी अधिकारी पर कार्रवाई का अधिकार नहीं है। वह सिर्फ उपायुक्त से लेकर मुख्यमंत्री तक कार्रवाई की सिफारिश कर सकते हैं। इस स्थिति में क्या वह धरने के बजाय विरोध जताने का कोई दूसरा रास्ता निकालेंगे, इसकी घोषणा वह सोमवार शाम को ही करेंगे।
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2017 से उठा रहे हैं दवाओं का मुद्दा
चेयरमैन भालौठ ने बताया कि दवाओं का मुद्दा वह 2017 से उठा रहे हैं, जब वह पार्षद थे और बलराज कुंडू जिप चेयरमैन। उस समय की बैठकों के एजेंडेे में भी यह मुद्दा शामिल है। उन्होंने इतने साल पहले यह मांग उठाई थी कि सामान्य और पशु अस्पतालों में उपलब्ध दवाओं की सूची बाहर चस्पा होनी चाहिए। सरपंचों, पंचायत समिति और जिला परिषद मेंबरों को व्हाट्सएप पर भेजी जानी चाहिए। सभी जिप चेयरमैन की सीएम के साथ बैठक में भी उन्होंने यह मुद्दा उठाया था, जिस पर सीएम ने भी सहमति जताई थी। लेकिन इतने साल बाद भी सेहत विभाग इसे लागू नहीं कर सका।
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