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निजी कंपनियों, शिक्षण संस्थानों में अनिवार्य होगी कोरोना जांच
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संजय कुमार
रोहतक। कोरोना का पांचवां वैरिएंट ओमिक्रॉन को फैलने से रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। इसके लिए उपायुक्त से विभाग ने लिखित में अनुमति ली है कि वह अब निजी कंपनियों, शिक्षण संस्थानों व अन्य ग्रुपों की अनिवार्य रूप से कोरोना की जांच कराएंगे। इससे पहले कुछ शिक्षण संस्थानों व निजी कंपनियों ने स्वास्थ्य विभाग को अपने विद्यार्थियों, स्टाफ व कर्मचारियों की आरटीपीसीआर जांच कराने से मना कर दिया था। अब नए आदेशों के तहत सभी की कोरोना की आरटीपीसीआर जांच अनिवार्य कर दी गई है।
जिले में विदेश से आने वालों की संख्या शुक्रवार को 470 पहुंच गई है। इसमें से 228 सैंपल निगेटिव मिले हैं। विभाग के लिए कुछ यात्रियों का सही पता न मिलना व गलत मोबाइल नंबर समस्या बने हुए हैं, इनकी अभी तक सैंपलिंग नहीं हो पाई है। इसके अलावा कुछ स्कूलों ने भी संक्रमित मरीज पाए जाने के डर से जांच ही करवाने से मना कर दिया है। यही हाल निजी कंपनियों का भी है। सभी को डर है कि यदि कोई संक्रमित मिला तो उनके संस्थान को बंद कर दिया जाएगा। वहीं स्वास्थ्य विभाग को डर है कि आवागमन खुला होने के साथ यदि गहनता से जांच नहीं होती है तो संक्रमण कभी भी फैल सकता है। स्वास्थ्य विभाग के लिए ओमिक्रॉन को फैलने से रोकने के लिए जांच की संख्या बढ़ाना ही विकल्प है।
वर्जन
उपायुक्त से आदेश जारी हो गया है कि सभी की जांच करो। सोमवार से इसके लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। जो भी जांच करवाने से मना करेगा उसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन को दी जाएगी और कार्रवाई की जाएगी।
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- डॉ. तरूण मधुर, हेल्थ मैनेजर, स्वास्थ्य विभाग
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रोहतक। कोरोना का पांचवां वैरिएंट ओमिक्रॉन को फैलने से रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। इसके लिए उपायुक्त से विभाग ने लिखित में अनुमति ली है कि वह अब निजी कंपनियों, शिक्षण संस्थानों व अन्य ग्रुपों की अनिवार्य रूप से कोरोना की जांच कराएंगे। इससे पहले कुछ शिक्षण संस्थानों व निजी कंपनियों ने स्वास्थ्य विभाग को अपने विद्यार्थियों, स्टाफ व कर्मचारियों की आरटीपीसीआर जांच कराने से मना कर दिया था। अब नए आदेशों के तहत सभी की कोरोना की आरटीपीसीआर जांच अनिवार्य कर दी गई है।
जिले में विदेश से आने वालों की संख्या शुक्रवार को 470 पहुंच गई है। इसमें से 228 सैंपल निगेटिव मिले हैं। विभाग के लिए कुछ यात्रियों का सही पता न मिलना व गलत मोबाइल नंबर समस्या बने हुए हैं, इनकी अभी तक सैंपलिंग नहीं हो पाई है। इसके अलावा कुछ स्कूलों ने भी संक्रमित मरीज पाए जाने के डर से जांच ही करवाने से मना कर दिया है। यही हाल निजी कंपनियों का भी है। सभी को डर है कि यदि कोई संक्रमित मिला तो उनके संस्थान को बंद कर दिया जाएगा। वहीं स्वास्थ्य विभाग को डर है कि आवागमन खुला होने के साथ यदि गहनता से जांच नहीं होती है तो संक्रमण कभी भी फैल सकता है। स्वास्थ्य विभाग के लिए ओमिक्रॉन को फैलने से रोकने के लिए जांच की संख्या बढ़ाना ही विकल्प है।
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उपायुक्त से आदेश जारी हो गया है कि सभी की जांच करो। सोमवार से इसके लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। जो भी जांच करवाने से मना करेगा उसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन को दी जाएगी और कार्रवाई की जाएगी।
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- डॉ. तरूण मधुर, हेल्थ मैनेजर, स्वास्थ्य विभाग