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Rohtak News: पॉली हाउस का निर्माण पूरा नहीं किया, 6.86 लाख ब्याज सहित लौटाने होंगे
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जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बागवानी विभाग व भिवानी की एग्रो एजेंसी पर 50 हजार रुपये हर्जाना किया है, साथ ही उपभोक्ता को 6.86 लाख रुपये 9 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने होंगे। आयोग ने 5 हजार रुपये कानूनी खर्च के तौर पर भी देने के आदेश दिए हैं।
आयोग के मुताबिक, सैमाण गांव निवासी रघुबीर सिंह ने 2018 में अर्जी दायर की थी। इसमें उसने 2014 में पॉली हाउस के लिए बागवानी विभाग के माध्यम से आवेदन किया था। सरकार के नियमों के तहत विभाग की तरफ से 65 प्रतिशत सब्सिडी मिलनी थी। निरीक्षण के बाद भी राशि जारी नहीं हुई। उसने कई जगह शिकायत की, लेकिन विभाग ने कार्रवाई नहीं की। 2016 में डीएसपी महम को शिकायत की। फिर भी कोई कदम नहीं उठाया गया।
यह है मामला
निवासी रघुबीर सिंह ने आयोग में याचिका दायर कर 6 लाख 86 हजार रुपये के भुगतान की मांग की। 2014 से 2017 तक छह मौसम में फसलों के हुए नुकसान के लिए 3 लाख रुपये 18 प्रतिशत ब्याज सहित, उत्पीड़न के चलते दो लाख रुपये व कानूनी खर्च के तौर पर 50 हजार रुपये देने की मांग की। इसके लिए बागवानी विभाग के अधिकारियों व भिवानी की एग्रो एजेंसी को पार्टी बनाया गया। तभी से आयोग में मामले की सुनवाई चल रही थी। शिकायतकर्ता ने कहा कि सही ढंग से पॉली हाउस को नहीं बनाया। विभाग ने जांच रिपोर्ट माैके पर जाए बगैर बना दी। जाली दस्तावेज तैयार कर सब्सिडी की राशि निकाल ली। इससे त्रिपक्षीय समझौते के अनुसार निर्माण पूरा किए बगैर 6 लाख 86 हजार 070 रुपये ले लिए। एजेंसी को 20 दिनों के भीतर पॉली हाउस का निर्माण पूरा करना था।
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आयोग ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद निर्णय दिया है कि शिकायतकर्ता को 14 मई 2018 से वसूली तक 9 प्रतिशत ब्याज सहित 6 लाख 86 हजार 070 रुपये और 50 हजार रुपये मुआवजे के तौर पर दिए जाएं। इसके अलावा 5 हजार रुपये कानूनी खर्च के तौर पर दिए जाएं।
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आयोग के मुताबिक, सैमाण गांव निवासी रघुबीर सिंह ने 2018 में अर्जी दायर की थी। इसमें उसने 2014 में पॉली हाउस के लिए बागवानी विभाग के माध्यम से आवेदन किया था। सरकार के नियमों के तहत विभाग की तरफ से 65 प्रतिशत सब्सिडी मिलनी थी। निरीक्षण के बाद भी राशि जारी नहीं हुई। उसने कई जगह शिकायत की, लेकिन विभाग ने कार्रवाई नहीं की। 2016 में डीएसपी महम को शिकायत की। फिर भी कोई कदम नहीं उठाया गया।
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यह है मामला
निवासी रघुबीर सिंह ने आयोग में याचिका दायर कर 6 लाख 86 हजार रुपये के भुगतान की मांग की। 2014 से 2017 तक छह मौसम में फसलों के हुए नुकसान के लिए 3 लाख रुपये 18 प्रतिशत ब्याज सहित, उत्पीड़न के चलते दो लाख रुपये व कानूनी खर्च के तौर पर 50 हजार रुपये देने की मांग की। इसके लिए बागवानी विभाग के अधिकारियों व भिवानी की एग्रो एजेंसी को पार्टी बनाया गया। तभी से आयोग में मामले की सुनवाई चल रही थी। शिकायतकर्ता ने कहा कि सही ढंग से पॉली हाउस को नहीं बनाया। विभाग ने जांच रिपोर्ट माैके पर जाए बगैर बना दी। जाली दस्तावेज तैयार कर सब्सिडी की राशि निकाल ली। इससे त्रिपक्षीय समझौते के अनुसार निर्माण पूरा किए बगैर 6 लाख 86 हजार 070 रुपये ले लिए। एजेंसी को 20 दिनों के भीतर पॉली हाउस का निर्माण पूरा करना था।
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आयोग ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद निर्णय दिया है कि शिकायतकर्ता को 14 मई 2018 से वसूली तक 9 प्रतिशत ब्याज सहित 6 लाख 86 हजार 070 रुपये और 50 हजार रुपये मुआवजे के तौर पर दिए जाएं। इसके अलावा 5 हजार रुपये कानूनी खर्च के तौर पर दिए जाएं।