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सफाई टेंडर मामला : हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित
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रोहतक। नगर निगम के सफाई के टेंडर को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनाई हुई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। निगम के कार्यकारी अभियंता संजीव कुमार का कहना है कि अभी हाईकोर्ट के आदेश की कॉफी मिलने के बाद ही कुछ बता पाएंगे।
शहर की सफाई पर नगर निगम हर साल करोड़ों रुपये खर्च करता है। अब तक शहर की गलियों की सफाई का कार्य नगर निगम के 680 कर्मचारी करते थे, इसमें 220 पक्के व 470 डीसी रेट पर लगे हैं। जून माह में निगम की तरफ से 22 में से 16 वार्ड की गलियों की सफाई का कार्य ठेके पर दे दिया। इसके लिए 16 वार्डों को दो भागों में बांटा गया। वार्ड नंबर 1,3, 4, 6,7,8 व 17 में गलियों की सफाई का ठेका 24 करोड़ 26 लाख रुपये में और 12, 13, 14, 15, 16, 18, 19, 20 व 21 का ठेका 24 करोड़ व 75 लाख रुपये में दिया था। अगस्त माह में मुख्यालय की तरफ से निगम आयुक्त को पत्र भेजकर लिखा कि नियमों के तहत टेंडर 21 दिन बाद खोला जाना था, लेकिन निगम ने 12 दिन में ही टेंडर जारी कर दिया। इसके चलते टेंडर रद्द कर दिया था। तभी से निगम गलियों की सफाई के कार्य के लिए पक्के कर्मचारियों के भरोसे हैं। नगर निगम ने दोबारा टेंडर लगाया था, जो 25 सितंबर को खोला जाना था, लेकिन पिछली एजेंसी हाईकोर्ट में चली गई। हाईकोर्ट ने नया टेंडर जारी करने पर रोक लगा दी थी। अब वीरवार को मामले की सुनवाई हुई है।
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शहर की सफाई पर नगर निगम हर साल करोड़ों रुपये खर्च करता है। अब तक शहर की गलियों की सफाई का कार्य नगर निगम के 680 कर्मचारी करते थे, इसमें 220 पक्के व 470 डीसी रेट पर लगे हैं। जून माह में निगम की तरफ से 22 में से 16 वार्ड की गलियों की सफाई का कार्य ठेके पर दे दिया। इसके लिए 16 वार्डों को दो भागों में बांटा गया। वार्ड नंबर 1,3, 4, 6,7,8 व 17 में गलियों की सफाई का ठेका 24 करोड़ 26 लाख रुपये में और 12, 13, 14, 15, 16, 18, 19, 20 व 21 का ठेका 24 करोड़ व 75 लाख रुपये में दिया था। अगस्त माह में मुख्यालय की तरफ से निगम आयुक्त को पत्र भेजकर लिखा कि नियमों के तहत टेंडर 21 दिन बाद खोला जाना था, लेकिन निगम ने 12 दिन में ही टेंडर जारी कर दिया। इसके चलते टेंडर रद्द कर दिया था। तभी से निगम गलियों की सफाई के कार्य के लिए पक्के कर्मचारियों के भरोसे हैं। नगर निगम ने दोबारा टेंडर लगाया था, जो 25 सितंबर को खोला जाना था, लेकिन पिछली एजेंसी हाईकोर्ट में चली गई। हाईकोर्ट ने नया टेंडर जारी करने पर रोक लगा दी थी। अब वीरवार को मामले की सुनवाई हुई है।
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