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शहर की सरकार की तीसरी वर्षगांठ :पहली बार पास एजेंडों पर अब तक काम नहीं पूरा

Mon, 20 Dec 2021 12:57 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 20 Dec 2021 12:57 AM IST
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City government's third anniversary: For the first time, the work on the agenda has not been completed yet
राजीव गांधी स्टेडियम के पास टूटी सड़क। संवाद
रोहतक। शहर की सरकार तीसरी वर्षगांठ मनाने जा रही है, लेकिन स्वच्छता व सफाई अवॉर्ड के अलावा गिनाने के नाम पर खास उपलब्धि नजर नहीं आ रही। आलम यह है कि तीन साल में 1083 दिन में मात्र पांच बार हाउस की आधिकारिक बैठक हुई है। उसमें भी हाउस की पहली बैठक में पास एजेंडे अब तक अधूरे पड़े हैं। शहर की सरकार की अनदेखी व बेरुखी का खामियाजा शहर की जनता भुगत रही है।
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प्रदेश की पूर्व हुड्डा सरकार ने 2010 में नगर परिषद को भंग करके शहर को नगर निगम का दर्जा दिया था। साथ ही आसपास के गांव बोहर, अस्थल बोहर, बलियाना, खेड़ी साध, पहरावर, कन्हेली, सुनारिया कलां, सुनारिया खुर्द व कुताना बस्ती को निगम में शामिल कर लिया गया था। तीन साल बाद 2013 में निगम का पहला चुनाव हुआ, जिसमें कांग्रेस समर्थित रेनु डाबला मेयर बनी। जबकि दूसरा चुनाव दिसंबर 2018 में हुआ, जिसमें पहली बार जनता ने सीधे वोट डालकर मेयर का चुनाव किया। इसमें भाजपा के मनमोहन गोयल ने कांग्रेस समर्थित सीताराम सचदेवा को हराकर जीत हासिल की। मेयर व 22 पार्षदों को 18 दिसंबर को विजयी घोषित किया गया। जबकि 10 जनवरी को शपथ दिलवाई गई। ऐसे में शहर की सरकार को तीन साल पूरे होने जा रहे हैं।
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शपथ समारोह से पहले ही भेजा दिया था बजट
तीन साल पहले निगम चुनाव के बाद 10 जनवरी को शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हुआ और तत्कालीन निगम आयुक्त ने निगम का बजट सात जनवरी को पास करके भेज दिया था। यह मामला काफी चर्चा में रहा, लेकिन मेयर से लेकर पार्षद तक ने अधिकारियों के सामने इस पर एतराज नहीं जताया।
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यूं चली शहर की सरकार तीन साल
13 दिसंबर 2018 में चुनाव
18 दिसंबर 2018 में मतगणना
10 जनवरी 2019 में शपथ समारोह
18 जून 2019 को हाउस की पहली बैठक
10 सितंबर 2019 को दूसरी बैठक
20 जनवरी 2020 तीसरी बैठक
08 अप्रैल 2021 चौथी बैठक
20 सितंबर 2021 पांचवीं बैठक, जो प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर पार्षदाें के हंगामे के बाद स्थगित हो गई।
नोट:- पहला सदन 25 फरवरी 2019 को बुलाया गया, जिसमें सभी पार्षदों का परिचय हुआ और बजट पास कर दिया गया। इसके बाद दो और बजट के सदन बुलाए गए।
ये है सदन बुलाने का नियम, आठ माह से हाउस में नहीं हुआ विकास पर मंथन
नगर निगम अधिनियम 2013 के अनुसार जनसमस्याओं को लेकर निगम के हाउस की बैठक हर माह होनी चाहिए। विशेष हालात में मेयर माह में एक बार से ज्यादा बार भी बैठक बुला सकते हैं। विकट स्थिति में तीन माह से ज्यादा समय नहीं होना चाहिए। बैठक बुलाने का अधिकार मेयर को है, जबकि निगम आयुक्त की भी सहमति अनिवार्य है। निगम के रिकार्ड के मुताबिक हाउस की चौथी बैठक अप्रैल 2021 में हुई थी, जिसमें प्रस्ताव पास हुए। इसके बाद सितंबर माह में बैठक हुई, जो पार्षदों के प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर किए गए हंगामे के चलते स्थगित हो गई। अब बैठक बुलाने की कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही।
हाउस की पहली बैठक में पास ये प्रस्ताव नहीं हुए अब तक पास
: शहर की दुग्ध डेयरियों को शहर से बाहर शिफ्ट करना।
: मेडिकल मोड़ पर ट्रैफिक पार्क का निर्माण
: सोनीपत स्टैंड पर कम्यूनिटी सेंटर
: नए स्लॉटर हाउस का निर्माण
: पार्षदों की सहमति से एक-एक हजार पेयजल व सीवर लाइन डलना
: मेयर को निगम अधिकारियों की एसीआर लिखने का अधिकार
ये समस्याएं झेल रहे शहरवासी
: मानसून में टूटी पड़ी सड़कें
: स्ट्रीट लाइट की कमी
: सीवरेज सिस्टम ओवरफ्लो
: सफाई कर्मियों की कमी।
मेयर बोले, अधिकारी सुनते नहीं, पार्षद पुराने एजेंडों पर मांग रहे काम
नगर निगम हाउस की बैठक न बुलाने की वजह है कि पार्षद कहते हैं कि हाउस में नए प्रस्ताव पास करने का कोई अधिकार नहीं है, जब तक पुराने एजेंडे पर काम नहीं होगा। काम नहीं होने के बारे में चंडीगढ़ पत्र लिखा है। अधिकारी सुनवाई नहीं करते। कोरोना का बहाना लगा रहे हैं। जहां तक तीन साल की उपलब्धि का सवाल है, वे मैं 10 जनवरी को बताऊंगा।
मनमोहन गोयल, मेयर नगर निगम
मैं चंडीगढ़ चुनाव में व्यस्त हूं
पार्टी की तरफ से मुझे चंडीगढ़ में हो रहे स्थानीय निकाय चुनाव में वार्ड 17 का प्रभारी बनाकर भेजा गया है। 27 दिसंबर को लौटने के बाद ही बाद ही हाउस की बैठक के बारे में अधिकारियों से बात कर सकूंगा।
राजकमल सहगल, सीनियर डिप्टी मेयर
हाउस की बैठक मेयर बुलाएंगे, काम न करने वाले अधिकारियों से लूंगा जवाब
नगर निगम हाउस की बैठक मुझे नहीं, बल्कि मेयर को बुलानी है। हाउस में पास एजेंडों पर काम नहीं करने वाले अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा। हालांकि समय के साथ प्राथमिकता बदलती रहती है। जो मामले चंडीगढ़ भेजे हैं, उनका जवाब वहीं के अधिकारी देंगे।
डॉक्टर हरिसिंह बांगड़, आयुक्त नगर निगम
तीनों मेयर का नहीं निगम प्रशासन पर नियंत्रण
मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर का निगम प्रशासन पर नियंत्रण नहीं है। आम लोगों की समस्याओं के प्रति गंभीरता नहीं बरती जा रही। अधिकारी मनमानी कर रहे हैं और जनता मूलभूत समस्याओं को लेकर परेशान है।
कंचन खुराना, पार्षद
वार्ड में लाइट की काफी कमी है। बजट की कमी के कारण काम नहीं हो रहे हैं। अशोक चौक से आईटीआई व डीएवी कॉलेज के पास की सड़क टूटी पड़ी है। सीवर लाइन की समस्या सबसे ज्यादा गंभीर बनी हुई है।
राधेश्याम ढल, पार्षद
जसबीर कॉलोनी की जर्जर सड़क को बनाने का शुरू से मामला उठा रहा हूं, मगर बन नहीं रही है। लाढ़ौत रोड स्थित शास्त्री कॉलोनी में पानी की लाइन नहीं बिछाई है, जिसके लिए शुरू से संघर्ष कर रहा हूं।

सुनील कुमार, पार्षद
कच्चे रास्तों को पक्का करने, तालाबों की चारदीवारी और कम्यूनिटी सेंटर का एजेंडा रखा था, जो आज तक पूरा नहीं हुआ है। मेयर से कई बार सदन बुलाने के लिए कहा है मगर कोई जवाब नहीं देते हैं।
राहुल देशवाल, पार्षद
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