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प्रोजेक्ट और प्रैक्टिकल के बिना नहीं होती सिनेमा की पढ़ाई

Sun, 30 Aug 2020 12:18 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 30 Aug 2020 12:18 AM IST
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Cinema is not studied without projects and practicals
Cinema is not studied without projects and practicals - फोटो : RohtakCity
पंडित लख्मीचंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग ऐंड विजुअल आर्ट्स (सुपवा) के फिल्म ऐंड टेलीविजन विभाग के छात्र और प्रशासन एक बार फिर आमने-सामने हैं। छात्र जहां एक ओर अपने जरूरी प्रोजेक्ट्स कम किए जाने से परेशान हैं तो वहीं कोरोना महामारी के दौर में फीस भरने को लेकर भी अपनी असमर्थता जाहिर कर रहे हैं। फिल्म स्टूडेंट यूनियन का कहना है कि फिल्म बनाने की कला कॉपी पेन में लिखकर परीक्षा देने की कला नहीं हैं। फिल्म मेकिंग सीखने के लिए फील्ड पर उतरना पड़ता है। मार्च के बाद यूनिवर्सिटी में न तो कोई पढ़ाई हुई और न ही प्रोजेक्ट्स व प्रैक्टिकल्स हुए हैं। ऐसे में बिना उन विषयों को पढ़े-समझे नई कक्षा में प्रमोट कर, इस महामारी के दौर में छात्रों पर फीस थोपने की कोशिश की जा रही है।
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ये है पूरा मामला
सुपवा प्रशासन की ओर से 19 अगस्त को एक नोटिस जारी किया गया। इसके अनुसार सभी छात्रों को 24 अगस्त तक नए सेमेस्टर की फीस जमा करने का निर्देश दिया गया। साथ ही इस बात को भी साफ तौर से कहा गया कि अगर तय तारीख तक फीस नहीं जमा होती तो आपको नए सेमेस्टर में न तो एडमिशन मिलेगा और न ही कोई क्लास अटेंड करने की अनुमति होगी। इस नोटिस के खिलाफ जब छात्रों ने अपनी आपत्ति दर्ज करवाई, महामारी के दौर में फीस न दे पाने की असमर्थता जताई तो प्रशासन की ओर से 26 अगस्त को एक और नोटिस थमा दिया गया। इसके मुताबिक छात्रों को फीस के साथ अब फाइन देने की बात भी सामने रखी गई। इसी का विद्यार्थी विरोध जता रहे हैं।
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क्या कहना है विद्यार्थियों का
विद्यार्थियों का कहना है कि मार्च से क्लासेज बंद होने के बाद से छात्र अपने घरों में हैं। इस बीच उन्होंने चल रहे सेमेस्टर की बची क्लासेज और प्रोजेक्ट्स को लेकर प्रशासन से कई बार पता करने की कोशिश की लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। यूजीसी की गाइड लाइंस को फॉलो करते हुए उन्हें प्रमोट तो कर दिया लेकिन इस दौरान कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स काट दिए, जो सिनेमा की आगे की कक्षाओं के लिए बेहद जरूरी हैं। इसमें तीसरे साल के छात्रों के सबसे जरूरी प्रोजेक्ट फिक्शन फिल्म और स्टूडियो फिल्म को काट दिया गया। तो वहीं पहले और दूसरे साल के भी फाइनल सेमेस्टर के प्रोजेक्ट्स कॉन्टिन्यूटी प्रोजेक्ट और डीवी प्रोजेक्ट को अधूरा छोड़ दिया गया।
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नहीं मिला संतुष्टि वाला जवाब
छात्रों के अनुसार जब उन्होंने इस संदर्भ में प्रशासन से संपर्क करने की कोशिश की कि आखिर ये अधूरे कटे हुए प्रोजेक्ट्स कब तक पूरे किए जाएंगे तो उन्हें कोई संतुष्टि भरा आश्वासन नहीं मिला।

महामारी के दौरान यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बच्चों के हितों को ही ध्यान में रखकर उन्हें प्रमोट किया है। छात्र किसी भी मदद के लिए प्रशासन से संपर्क कर सकते हैं। फीस के लिए संस्थान में कई वर्ग में फीस रियायत मौजूद है। किस्तों में फीस लेने का फैसला अकेले यूनिवर्सिटी नहीं ले सकती। इसके लिए कार्यकारिणी परिषद् की मंजूरी के साथ ही राज्य सरकार की अनुमति की भी आवश्यकता होती है। स्टूडेंट्स की मांगों की ई-मेल मिली है, उस पर जो भी उचित होगा कार्रवाई की जाएगी।
-बेनूल तोमर, पीआरओ, सुपवा।
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