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नवग्रहों के अधिपति भगवान सूर्य की उपासना का पर्व छठ पूजा : आचार्य
Wed, 29 Oct 2025 12:10 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Wed, 29 Oct 2025 12:10 AM IST
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28जेएनडी02: सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर उनसे अपनी संतान की दीर्घायु व उन्नति की कामना करते हुए मह
जींद। आचार्य पवन शर्मा ने माता वैष्णवी धाम में मंगलवार को छठ पूजा पर कहा कि सृष्टि के नियामक व प्रत्यक्ष देव भगवान सूर्य हैं। इनकी ऊर्जा से जीवन-चक्र चलता है। इनकी किरणों से धरती में प्राणों का संचार व पृथ्वी पर फल-फूल, धान्य व वनस्पतियां उत्पन्न होती हैं।
उन्होंने कहा कि यही ऋतु चक्र को चलाते हैं। भगवान सूर्य की इस अपार कृपा के लिए जनमानस के द्वारा उनके प्रति कृतज्ञता व समर्पण को दर्शाता है। छठ पर्व पर महिलाओं ने उषा काल में उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर उनसे अपनी संतान की दीर्घायु व उन्नति की कामना की।
आचार्य ने कहा 6 घंटे की कठिन साधना का यह पर्व 28 अक्तूबर के सूर्योदय तक चला। इस पर्व में भगवान सूर्य के साथ-साथ छठ मैया की पूजा की जाती है।
शिशु के जन्म लेने के छठे दिन माता-पिता बच्चे के स्वास्थय, व दीर्घायु की कामना से छठी मैया के रूप में हर-घर में पूजा करते है। सर्वप्रथम देव माता अदिति ने छठ पूजा की थी। तब प्रसन्न होकर छठ मैया ने उन्हें सर्वगुण सम्पन्न तेजस्वी पुत्र का वरदान दिया था।
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भगवान श्रीराम बनवास के बाद जब अयोध्या लौटे तब राज्याभिषेक के पश्चात माता सीता सहित इसी सूर्य षष्ठी का व्रत किया था तब से यह पर्व जन-जन में मान्य हो गया है।
महाभारत काल में माता कुंती ने सूर्य षष्ठी व छठ मैया की पूजा के द्वारा अंत्यत तेजस्वी पुत्र कर्ण की प्राप्ति की थी। सूर्यपुत्र कर्ण तो भगवान सूर्य के परम भक्त थे जो प्रतिदिन घंटों तक कटि पर्यन्त पानी में खड़े रहकर सूर्यदेव की आराधना किया करते थे।
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उन्होंने कहा कि यही ऋतु चक्र को चलाते हैं। भगवान सूर्य की इस अपार कृपा के लिए जनमानस के द्वारा उनके प्रति कृतज्ञता व समर्पण को दर्शाता है। छठ पर्व पर महिलाओं ने उषा काल में उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर उनसे अपनी संतान की दीर्घायु व उन्नति की कामना की।
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आचार्य ने कहा 6 घंटे की कठिन साधना का यह पर्व 28 अक्तूबर के सूर्योदय तक चला। इस पर्व में भगवान सूर्य के साथ-साथ छठ मैया की पूजा की जाती है।
शिशु के जन्म लेने के छठे दिन माता-पिता बच्चे के स्वास्थय, व दीर्घायु की कामना से छठी मैया के रूप में हर-घर में पूजा करते है। सर्वप्रथम देव माता अदिति ने छठ पूजा की थी। तब प्रसन्न होकर छठ मैया ने उन्हें सर्वगुण सम्पन्न तेजस्वी पुत्र का वरदान दिया था।
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भगवान श्रीराम बनवास के बाद जब अयोध्या लौटे तब राज्याभिषेक के पश्चात माता सीता सहित इसी सूर्य षष्ठी का व्रत किया था तब से यह पर्व जन-जन में मान्य हो गया है।
महाभारत काल में माता कुंती ने सूर्य षष्ठी व छठ मैया की पूजा के द्वारा अंत्यत तेजस्वी पुत्र कर्ण की प्राप्ति की थी। सूर्यपुत्र कर्ण तो भगवान सूर्य के परम भक्त थे जो प्रतिदिन घंटों तक कटि पर्यन्त पानी में खड़े रहकर सूर्यदेव की आराधना किया करते थे।