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50 लाख रुपये तक के विकास कार्य की मंजूरी के लिए नहीं जाना होगा चंडीगढ़
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महम नगर परिषद, सांपला व कलानौर नगर पालिका प्रशासन को अब 50 लाख तक के विकास कार्य की मंजूरी के लिए चंडीगढ़ की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। रोहतक नगर निगम के आयुक्त ही यह मंजूरी दे सकेंगे। क्योंकि उनको सरकार ने जिला नगर आयुक्त का अतिरिक्त कार्यभार भी सौंपा है। इसी के चलते निगम आयुक्त ने अपने कार्यालय में महम नगर परिषद, कलानौर व सांपला नपा के अधिकारियों की मीटिंग ली और आवश्यक दिशा निर्देश दिए। पिछले सप्ताह सरकार की तरफ से उन जिलों में आईएएस या एचपीएस अधिकरियों को जिला नगर आयुक्त के तौर पर नियुक्त किया है, जहां नगर निगम नहीं हैं। जबकि रोहतक, पानीपत, सोनीपत, करनाल, हिसार, गुरुग्राम, फरीदाबाद व यमुनानगर में पहले से नगर निगम हैं, जहां आईएएस अधिकारी निगम आयुक्त के तौर पर कार्यरत हैं। सरकार ने अब हर जिले में एक नया पद सृजित किया है, जिसे जिला नगर आयुक्त का नाम दिया गया है। उक्त अधिकारी के पास जिले के सभी नगर निगम, नगर परिषद व नगर पालिकाओं की मॉनीटरिंग रहेगी। जहां निगम वहां, उनके आयुक्त ही यह जिम्मेदारी निभाएंगे। ऐसे में रोहतक निगम आयुक्त के पास अब निगम आयुक्त व वैश्य संस्था के प्रशासक के अलावा महम नगर परिषद, सांपला व कलानौर नगर पालिका का भी कार्यभार रहेगा।
निगम की तर्ज पर खोले जाएंगे कंट्रोल रूम, तीन घंटे में होगी सफाई
निगम आयुक्त ने तीनों निकाय के अधिकारियों की एक दिन पहले मीटिंग ली। मीटिंग में आयुक्त ने कहा कि रोहतक नगर निगम में अलग से एक कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां एक स्पेशल टीम तैनात रहती है। सफाई को लेकर जो कॉल आती है, कंट्रोल रूम के माध्यम से उसे रजिस्टर में दर्ज किया जाता है। संबंधित टीम को मौके पर जाकर तीन घंटे के अंदर सफाई करनी होती है। इसकी दोबारा से रजिस्टर में इंट्री करनी पड़ती है। इसी तर्ज पर महम, सांपला व कलानौर में भी कंट्रोल रूम खोले जाएं। आयुक्त ने आय व व्यय का ब्योरा भी तीनों निकाय के अधिकारियों से मांगा है।
स्पेशल प्रोजेक्ट ऑफिसर से अधिकारियों को दिलवाएंगे ट्रेनिंग
निगम के माध्यम से केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं को शहर में लागू किया जाता है। इसमें सफाई से लेकर प्रधानमंत्री आवास योजना, राजीव गांधी आवास योजना, स्ट्रीट वेंडर पॉलिसी, अमृत प्रोजेक्ट, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से लेकर प्रॉपर्टी टैक्स तक के कार्य शामिल है। निगम में इसके लिए स्पेशल प्रोजेक्ट ऑफिसर तैनात हैं, जिनके माध्यम से महम, सांपला व कलानौर के अधिकारियों को ट्रेनिंग दिलवाई जाएगी।
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महम, सांपला व कलानौर चेयरमैन के पास 15 लाख तक के विकास कार्य कराने का अधिकार है। इससे ऊपर के विकास कार्य के लिए अनुमति चंडीगढ़ या जिला मुख्यालय से लेनी होती थी। अब सरकार ने निगम आयुक्त को ही जिला नगर आयुक्त की जिम्मेदारी दी है। ऐसे में महम, सांपला व कलानौर में होने वाले 50 लाख तक के विकास कार्य की अनुमति रोहतक निगम आयुक्त कार्यालय से ली जा सकेगी। निगम की तर्ज पर जल्द तीनों निकाय में कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे। इसी के चलते तीनों निकाय के अधिकारियों की मीटिंग बुलाई गई थी।
प्रदीप गोदारा, आयुक्त, नगर निगम।
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निगम की तर्ज पर खोले जाएंगे कंट्रोल रूम, तीन घंटे में होगी सफाई
निगम आयुक्त ने तीनों निकाय के अधिकारियों की एक दिन पहले मीटिंग ली। मीटिंग में आयुक्त ने कहा कि रोहतक नगर निगम में अलग से एक कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां एक स्पेशल टीम तैनात रहती है। सफाई को लेकर जो कॉल आती है, कंट्रोल रूम के माध्यम से उसे रजिस्टर में दर्ज किया जाता है। संबंधित टीम को मौके पर जाकर तीन घंटे के अंदर सफाई करनी होती है। इसकी दोबारा से रजिस्टर में इंट्री करनी पड़ती है। इसी तर्ज पर महम, सांपला व कलानौर में भी कंट्रोल रूम खोले जाएं। आयुक्त ने आय व व्यय का ब्योरा भी तीनों निकाय के अधिकारियों से मांगा है।
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स्पेशल प्रोजेक्ट ऑफिसर से अधिकारियों को दिलवाएंगे ट्रेनिंग
निगम के माध्यम से केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं को शहर में लागू किया जाता है। इसमें सफाई से लेकर प्रधानमंत्री आवास योजना, राजीव गांधी आवास योजना, स्ट्रीट वेंडर पॉलिसी, अमृत प्रोजेक्ट, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से लेकर प्रॉपर्टी टैक्स तक के कार्य शामिल है। निगम में इसके लिए स्पेशल प्रोजेक्ट ऑफिसर तैनात हैं, जिनके माध्यम से महम, सांपला व कलानौर के अधिकारियों को ट्रेनिंग दिलवाई जाएगी।
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महम, सांपला व कलानौर चेयरमैन के पास 15 लाख तक के विकास कार्य कराने का अधिकार है। इससे ऊपर के विकास कार्य के लिए अनुमति चंडीगढ़ या जिला मुख्यालय से लेनी होती थी। अब सरकार ने निगम आयुक्त को ही जिला नगर आयुक्त की जिम्मेदारी दी है। ऐसे में महम, सांपला व कलानौर में होने वाले 50 लाख तक के विकास कार्य की अनुमति रोहतक निगम आयुक्त कार्यालय से ली जा सकेगी। निगम की तर्ज पर जल्द तीनों निकाय में कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे। इसी के चलते तीनों निकाय के अधिकारियों की मीटिंग बुलाई गई थी।
प्रदीप गोदारा, आयुक्त, नगर निगम।