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बच्चों में बढ़ रही सीलिएक की समस्या : डॉ. मित्तल
Sat, 30 May 2026 05:43 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sat, 30 May 2026 05:43 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। पीजीआई के बाल रोग विभाग ने चिकित्सा अधीक्षक एवं शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. कुंदन मित्तल के मार्गदर्शन में शनिवार को ओपीडी में सीलिएक बीमारी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। मई को सीलिएक जागरूकता महीने के रूप में मनाया जाता है।
कार्यक्रम का उद्देश्य अभिभावकों, शिक्षकों व आमजन को बीमारी की जल्दी पहचान, जांच व इलाज के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम में 200 से ज्यादा अभिभावकों ने हिस्सा लिया। विभाग हर महीने ऐसी जागरूकता बैठक करेगा ताकि एक भी बच्चा बीमारी के कारण कुपोषण का शिकार न हो।
डॉ. कुंदन मित्तल ने कहा कि सीलिएक बीमारी अब बच्चों में तेजी से बढ़ रही है। यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है जो गेहूं, जौ में पाए जाने वाले ग्लूटेन प्रोटीन से होती है। पेट फूलना, लगातार दस्त, वजन न बढ़ना, लंबाई रुक जाना व खून की कमी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत जांच कराएं। पीजीआई में इसकी ब्लड जांच व बायोप्सी की सुविधा उपलब्ध है।
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उन्होंने कहा कि समय पर जांच व जीवनभर ग्लूटेन फ्री डाइट ही इसका इलाज है। इससे बच्चा सामान्य जीवन जी सकता है। बाल रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. अंजलि वर्मा ने अभिभावकों को फूड लेबल पढ़ने की बारीकियां समझाईं।
सर्वे में शामिल 50 प्रतिशत से ज्यादा अभिभावकों ने माना कि स्कूल की ऐसी गतिविधियों से उनके बच्चे का शुगर लेवल बिगड़ता है या पेट खराब होता है। कई बच्चों ने कहा कि वे अलग महसूस करते हैं क्योंकि वे सबके साथ नहीं खा सकते।
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रोहतक। पीजीआई के बाल रोग विभाग ने चिकित्सा अधीक्षक एवं शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. कुंदन मित्तल के मार्गदर्शन में शनिवार को ओपीडी में सीलिएक बीमारी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। मई को सीलिएक जागरूकता महीने के रूप में मनाया जाता है।
कार्यक्रम का उद्देश्य अभिभावकों, शिक्षकों व आमजन को बीमारी की जल्दी पहचान, जांच व इलाज के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम में 200 से ज्यादा अभिभावकों ने हिस्सा लिया। विभाग हर महीने ऐसी जागरूकता बैठक करेगा ताकि एक भी बच्चा बीमारी के कारण कुपोषण का शिकार न हो।
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डॉ. कुंदन मित्तल ने कहा कि सीलिएक बीमारी अब बच्चों में तेजी से बढ़ रही है। यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है जो गेहूं, जौ में पाए जाने वाले ग्लूटेन प्रोटीन से होती है। पेट फूलना, लगातार दस्त, वजन न बढ़ना, लंबाई रुक जाना व खून की कमी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत जांच कराएं। पीजीआई में इसकी ब्लड जांच व बायोप्सी की सुविधा उपलब्ध है।
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उन्होंने कहा कि समय पर जांच व जीवनभर ग्लूटेन फ्री डाइट ही इसका इलाज है। इससे बच्चा सामान्य जीवन जी सकता है। बाल रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. अंजलि वर्मा ने अभिभावकों को फूड लेबल पढ़ने की बारीकियां समझाईं।
सर्वे में शामिल 50 प्रतिशत से ज्यादा अभिभावकों ने माना कि स्कूल की ऐसी गतिविधियों से उनके बच्चे का शुगर लेवल बिगड़ता है या पेट खराब होता है। कई बच्चों ने कहा कि वे अलग महसूस करते हैं क्योंकि वे सबके साथ नहीं खा सकते।