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Rohtak News: उम्मीदवार के खर्च की तीन बार होगी जांच, नींबू-पानी, समोसे, कचौरी की कीमत भी जोड़ी जाएगी खर्च में

Fri, 06 Sep 2024 06:27 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 06 Sep 2024 06:27 AM IST
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Candidate's expenses will be checked thrice, cost of lemon-water, samosas, kachori will also be added to the expenses
रोहतक। जिला निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार ने बताया कि विधानसभा चुनाव के दौरान चुनावी खर्च पर कड़ी निगाह रखी जाएगी। मतदान तक प्रत्याशी के खर्च का तीन बार अधिकारी जांच करेंगे। चुनावी खर्च में नींबू-पानी, समोसे, कचौरी से लेकर रोटी तक की कीमत जोड़ी जाएगी। वीरवार को अधिकारियों की बैठक में डीसी ने ये दिशा निर्देश दिए।
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लघु सचिवालय स्थित सभागार में चुनावी खर्च को लेकर सहायक खर्च पर्यवेक्षक, क्षेत्र अधिकारी व सूक्ष्म पर्यवेक्षको की बैठक को संबोधित करते हुए डीसी अजय कुमार ने कहा कि आयोग ने विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी के चुनावी खर्च की सीमा निर्धारित की है। एक प्रत्याशी 40 लाख रुपए तक चुनावी खर्च कर सकता है। उन्होंने कहा कि खर्च निगरानी सैल द्वारा प्रत्येक चुनावी खर्च का आंकलन करके उसे शैडो रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा। उपायुक्त ने कहा कि इसी प्रकार का रजिस्टर विधानसभा उम्मीदवार द्वारा भी लगाया जाएगा। नामांकन दाखिल होने से लेकर परिणाम घोषित होने तक तीन बार उम्मीदवारों के खर्च का आंकलन किया जाता है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तरीके से चुनाव करवाने के लिए चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशानुसार उम्मीदवारों के चुनावी खर्च पर पूरी निगरानी रखी जाएगी। इस संबंध में विभिन्न वस्तुओं के मूल्य भी निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों का आह्वान करते हुए कहा कि वह पूरी ईमानदारी व गंभीरता के साथ अपने कर्तव्य का निर्वहन करें।
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उम्मीदवार निर्धारित सीमा से अधिक न करें खर्च
उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार ने चुनाव लडऩे वाले उम्मीदवारों से भी आग्रह किया कि वे सभी खर्चों को उचित रूप से दर्ज करें और निर्धारित सीमा से अधिक खर्च करने से बचें। इस तरह के कदम चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि चुनावी मैदान में सभी उम्मीदवार समान अवसर प्राप्त करें।
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व्यय में क्या-क्या होता है शामिल
उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग खर्च को दो श्रेणियों में रखता है। पहला निर्वाचन व्यय है। इसमें जनसभा, पोस्टरों, बैनरों, वाहनों, प्रिंट या इलेट्रॉनिक मीडिया में विज्ञापनों जैसे प्रचार संबंधी मदों पर व्यय शामिल होता है।
दूसरी श्रेणी में उस खर्च को शामिल किया जाता है, जो गैर-कानूनी हैं। इसमें शराब, धन का वितरण आदि शामिल हंै। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के अधीन यह एक भ्रष्ट आचरण है। ऐसी मदों पर व्यय करना अवैध है। चुनाव आयोग प्रतिनियुक्त विज्ञापन और पेड न्यूज को भी चुनाव खर्च मानता है।

खर्च में शामिल होंगी विभिन्न वस्तुएं
उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार ने कहा कि चुनावी खर्च में चाय, पानी, मटन, चिकन, मिठाई, नींबू-पानी, समोसे, कचौरी, बिरयानी तंदूर, दाल-मखनी, मिक्स वेज, बटर नान, मिस्सी रोटी, सादी रोटी, काजू कतली, गुलाब जामुन आदि के खर्च को भी शामिल किया जाएगा। इसके अलावा उम्मीदवार का कार्यालय, रैली, टेंट, हेलीपैड, लक्जरी वाहन, फार्म हाउस, फूल माला, गुलदस्ते, कूलर, टॉवर, एसी, टोपी, झंडे और सोफा आदि का खर्च भी शामिल है। अगर प्रत्याशी इनका इस्तेमाल करता है तो खर्च उसके व्यय में जोड़ा जाएगा।
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