फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   Buses under kilometer scheme are in bad condition

Rohtak News: किलोमीटर स्कीम की बसें दुर्दशा का शिकार

Fri, 11 Jul 2025 02:37 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक Updated Fri, 11 Jul 2025 02:37 AM IST
विज्ञापन
Buses under kilometer scheme are in bad condition
रोहतक। किलोमीटर स्कीम की बसें निरंतर दुर्दशा का शिकार हो रही हैं। रोहतक बस अड्डे से चलने वाली इन बसों में सीटें डगमगा रही हैं, कवर फट चुके हैं। बसों में सफाई से लेकर संचालन तक पूरी तरह से प्रभावित है। सीटों के नीचे गंदगी का आलम है। समय पर इन बसों की मरम्मत नहीं हो रही है। इन बसों के सुधार में देरी की जा रही है। अधिकतर लंबे रूट पर लगाई गईं बसों की हालत 60 प्रतिशत से अधिक खराब हो चुकी। ऐसे में यात्रियाें को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है।
विज्ञापन

रोहतक डिपो के बेड़े में 43 किलोमीटर स्कीम (लीज) की बसें हैं। इनका संचालन रोहतक से दिल्ली, हिसार, सिरसा, चंडीगढ़ व जयपुर जैसे लंबे रूट पर किया जा रहा है। 2020 के बाद से रोडवेज लगातार इन बसों का संचालन करवा रहा है, लेकिन इनके रखरखाव व मरम्मत कार्य रोडवेज का नहीं है बल्कि संबंधित एजेंसी का है।
विज्ञापन

बसों के शीशे भी टूटे हुए हैं। ऐसे में यात्रियों के साथ कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है। यात्रियों का कहना है कि किलोमीटर स्कीम की बसों के संचालन में भी कमी है। समय पर स्टैंड पर नहीं पहुंच रही हैं। स्पीड प्रेशर भी काम नहीं कर रहे हैं। वहीं, अन्य जिलों के डिपो से पहुंचने वाली बसों की हालत भी सफर करने लायक नहीं है। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

---------------
30 रुपये प्रति किमी भुगतान देता है रोडवेज
रोडवेज अधिकारियों ने बताया कि किलोमीटर स्कीम की इन बसों को रोडवेज ने खरीद रखा है। इन बसों के चालक निजी हैं जबकि परिचालक रोडवेज के हैं। इन बसों का 12 हजार किलोमीटर प्रति माह का संचालन तय है, जिनको प्रतिदिन 400 किलोमीटर पर 12 हजार रुपये भुगतान किया जाता है। वहीं, 30 रुपये प्रति किलोमीटर निर्धारित है।
-----------
यूरो-4 तकनीक बसों का दिल्ली में है प्रवेश बंद
यूरो-4 तकनीक की बसों का संचालन दिल्ली में बंद है। रोडवेज बेड़े में लगभग किलोमीटर स्कीम यूरो-4 की बसें हैं जबकि दिल्ली एनसीआर में यूरो-6 तकनीक की बसों काे मान्य किया गया है। यूरो-4 की बसों में प्रदूषण आदि की समस्या रहती है, इन बसों में 52 सीट होती हैं।
यूरो-6 तकनीक की बसों में धुएं की क्षमता कम है। इंजन की क्षमता अधिक है और सीटें भी 58 हैं। रोडवेज अधिकारियों का दावा है कि डिपो में किलोमीटर स्कीम की यूरो-6 तकनीक की 20 से अधिक बसें हैं, शेष बसों में दिल्ली एनसीआर में न चलाकर अन्य मार्गों पर चला जा रहा है।
-----------
वर्जन
रोडवेज ने निजी मालिकों से किलोमीटर स्कीम की बसों को खरीद रखा है। बसों काे 10 साल के लिए परमिट दिया गया है। 2020 के बाद से इनके पांच साल अभी शेष हैं। इनकी सफाई व रखरखाव का कार्य मालिक का ही है। अगर बस अड्डे पर खराब स्थिति की बसें पहुंचती हैं, उनको नोटिस दिया जा रहा है। साथ ही, संचालन न करके वापस कर सुधार के लिए भेजा जा रहा है।
- सुरेंद्र सिवाच, कर्मशाला प्रबंधक, रोडवेज।
----------
फोटो : 14
किलोमीटर स्कीम की बसों की हालत बेहद खराब है। अधिकतर यात्री इन्हें रोडवेज की बस समझता है। इनमें सवार होने वाले यात्रियों को नुकीली पत्तियों से चोटिल होना पड़ता है।

- आकाश, यात्री।
---------
फोटो : 15
अगर रोडवेज ने इन बसों को परमिट दिया है तो सफाई और रखरखाव भी करवाना चाहिए। सीटों का बुरा हाल है। अधिकतर किलोमीटर स्कीम की बसों की पहचान उसकी गंदगी से ही हो जाती है।
- अनूप पांडे, यात्री।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed