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टूटी सड़कें, गंदे नाले की बदबू, गंदगी के ढेर
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ओमेक्स सिटी में निरीक्षण करने पहुंचे उपायुक्त व अन्य अधिकारी । संवाद न्यूज एजेंसी
शहर की नामी हाउसिंग सोसाइटी ओमेक्स सिटी के बाशिंदे इतने ज्यादा पैसे खर्च करने के बाद भी किन हालातों में रह रहे हैं, जिले के दो आला अधिकारियों ने इसकी बानगी खुद देखी। ओमेक्स सिटी में निवासियों और बिल्डर के लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच डीसी कैप्टन मनोज कुमार और निगम कमिश्नर प्रदीप गोदारा ने शुक्रवार को दौरा कर हालात का जायजा लिया। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने उन्हें मौके पर ले जाकर टूटी सड़कें, खुला नाला और कूड़े के ढेर दिखाए। उपायुक्त और निगम कमिश्नर ने मौके पर ही विभागीय अधिकारियों और कंपनी प्रतिनिधियों को निर्देश दिए।
ओमेक्स सिटी के निवासी लंबे समय से सुविधाओं की कमी का आरोप लगाते आ रहे हैं। यह मामला जिला कष्ट निवारण कमेटी से लेकर विधानसभा तक भी पहुंचा था। पिछले दिनों मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी परियोजना निदेशक डॉ. राकेश गुप्ता ने उपायुक्त और निगम कमिश्नर को निर्देश दिए थे कि मौके पर जाकर हालात का जायजा लें, ताकि इस सोसाइटी को निगम में शामिल करने के बारे में फैसला लिया जा सके। जिसके बाद दोनों अधिकारियों ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ मौके का मुआयना किया।
नाला खुला, बदबू ने किया बुरा हाल
अधिकारियों का काफिला सर्किट हाउस से सोसाइटी की तरफ चला, कुछ ही दूर पर रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान आशीष ने उन्हें वहां से गुजर रहा नाला दिखाया। नाले के किनारे कूड़े और मलबे के ढेर लगे हुए थे। आशीष ने उन्हें बताया कि नाला खुला होने के कारण इलाके में बदबू फैली रहती है, इसे ढकवाया जाए। निगम कमिश्नर गोदारा ने उन्हें आश्वासन दिया कि नाला जल्द ढकवा दिया जाएगा।
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मेन रोड टूटी, स्ट्रीट लाइट नहीं जलती
अधिकारियों का काफिला फिर आगे बढ़ा और सेक्टर 26-28 की डिवाइडिंग रोड पर आ गया। यह सड़क ओमेक्स सिटी को दो हिस्सों में बांटती है। आशीष ने उन्हें दिखाया कि सड़क की हालत बेहद खस्ता थी, यहां स्ट्रीट लाइटें भी नहीं जलती। हुडा के एक्सईएन ने अधिकारियों को बताया कि उन्होंने इसे बजट में शामिल कर लिया है, जल्द सड़क बनवा दी जाएगी।
गलत जगह कट से हो रहे हैं हादसे
आरडब्ल्यूए ने अधिकारियों को बताया कि एमडीयू रोड से ओमेक्स आने वाली सड़क पर एक ही कट है। वह काफी गलत जगह पर बनाया गया है, जिससे रोजाना हादसे होते रहते हैं। पहले सही जगह पर एक कट था, जिसे बंद कर दिया गया। यहां पर ऐसा कट बनाया जाए जिससे लोग आसानी से यू-टर्न ले सकें। अधिकारियों ने इस पर भी आश्वासन दिया।
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की समस्या
आरडब्ल्यूए प्रधान ने अधिकारियों को मौके पर ले जाकर बताया कि यहां का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट चालू नहीं है। उन्होंने कंपनी प्रतिनिधियों से पूछा तो जवाब मिला कि प्लांट चालू कर दिया गया, जो भी कमी रह गई है वह 17 मार्च को होने वाली जिला कष्ट निवारण कमेटी की बैठक से पहले दूर कर ली जाएगी।
पानी की किल्लत
स्थानीय निवासियों ने उपायुक्त और निगम कमिश्नर को बताया कि पहले तो यहां का पानी पीने लायक ही नहीं था। लेकिन अब हुडा से पानी आ रहा है, वह ठीक है। उनका कहना था कि रोजाना सिर्फ छह-सात घंटे ही पानी आता है। अगर अगले चार-पांच दिनों तक बारह घंटे सप्लाई कर दी जाए तो लोगों के घरों के अंडरग्राउंड टैंक भर जाएंगे। उसके बाद बेशक छह घंटे सप्लाई करें। अधिकारियों ने हुडा अधिकारियों को ऐसा करने के निर्देश दिए।
मेंटेनेंस चार्ज का पेंच
सेक्टर 28 ओमेक्स में डब्ल्यूटीपी के पीछे टूटी सड़क देखने के साथ दौरे का समापन हुआ। कंपनी प्रतिनिधियों से अधिकारियों से कहा कि 70 प्रतिशत सड़कें बन चुकी हैं, बाकी भी जल्द बन जाएंगी। समस्या यह आ रही है कि यहां सिर्फ तीस फीसदी लोग ही मेंटेनेंस चार्ज देते हैं। आरडब्ल्यू ने कहा कि इसका प्रावधान ही नहीं है। तब डीटीपी मनदीप सिहाग ने अधिकारियों को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा है कि लोगों को मेंटेनेंस चार्ज देना ही होगा।
कंपनी ने कहा, सब कुछ ठीक
ओमेक्स लिमिटेड के एजीएम अनिल गुप्ता ने कहा कि स्ट्रीट लाइटें सौ फीसदी चल रही हैं। पार्क और ग्रीन एरिया पूरी तरह विकसित हो चुका है। पानी हुडा से आ रहा है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट चल रहा है। सड़कों का 70 फीसदी काम हो चुका है, बाकी 31 मार्च तक पूरा हो जाएगा। जैसे-जैसे लोग बस रहे हैं, ट्रांसफार्मर लगाए जा रहे हैं।
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ओमेक्स सिटी के निवासी लंबे समय से सुविधाओं की कमी का आरोप लगाते आ रहे हैं। यह मामला जिला कष्ट निवारण कमेटी से लेकर विधानसभा तक भी पहुंचा था। पिछले दिनों मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी परियोजना निदेशक डॉ. राकेश गुप्ता ने उपायुक्त और निगम कमिश्नर को निर्देश दिए थे कि मौके पर जाकर हालात का जायजा लें, ताकि इस सोसाइटी को निगम में शामिल करने के बारे में फैसला लिया जा सके। जिसके बाद दोनों अधिकारियों ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ मौके का मुआयना किया।
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नाला खुला, बदबू ने किया बुरा हाल
अधिकारियों का काफिला सर्किट हाउस से सोसाइटी की तरफ चला, कुछ ही दूर पर रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान आशीष ने उन्हें वहां से गुजर रहा नाला दिखाया। नाले के किनारे कूड़े और मलबे के ढेर लगे हुए थे। आशीष ने उन्हें बताया कि नाला खुला होने के कारण इलाके में बदबू फैली रहती है, इसे ढकवाया जाए। निगम कमिश्नर गोदारा ने उन्हें आश्वासन दिया कि नाला जल्द ढकवा दिया जाएगा।
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मेन रोड टूटी, स्ट्रीट लाइट नहीं जलती
अधिकारियों का काफिला फिर आगे बढ़ा और सेक्टर 26-28 की डिवाइडिंग रोड पर आ गया। यह सड़क ओमेक्स सिटी को दो हिस्सों में बांटती है। आशीष ने उन्हें दिखाया कि सड़क की हालत बेहद खस्ता थी, यहां स्ट्रीट लाइटें भी नहीं जलती। हुडा के एक्सईएन ने अधिकारियों को बताया कि उन्होंने इसे बजट में शामिल कर लिया है, जल्द सड़क बनवा दी जाएगी।
गलत जगह कट से हो रहे हैं हादसे
आरडब्ल्यूए ने अधिकारियों को बताया कि एमडीयू रोड से ओमेक्स आने वाली सड़क पर एक ही कट है। वह काफी गलत जगह पर बनाया गया है, जिससे रोजाना हादसे होते रहते हैं। पहले सही जगह पर एक कट था, जिसे बंद कर दिया गया। यहां पर ऐसा कट बनाया जाए जिससे लोग आसानी से यू-टर्न ले सकें। अधिकारियों ने इस पर भी आश्वासन दिया।
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की समस्या
आरडब्ल्यूए प्रधान ने अधिकारियों को मौके पर ले जाकर बताया कि यहां का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट चालू नहीं है। उन्होंने कंपनी प्रतिनिधियों से पूछा तो जवाब मिला कि प्लांट चालू कर दिया गया, जो भी कमी रह गई है वह 17 मार्च को होने वाली जिला कष्ट निवारण कमेटी की बैठक से पहले दूर कर ली जाएगी।
पानी की किल्लत
स्थानीय निवासियों ने उपायुक्त और निगम कमिश्नर को बताया कि पहले तो यहां का पानी पीने लायक ही नहीं था। लेकिन अब हुडा से पानी आ रहा है, वह ठीक है। उनका कहना था कि रोजाना सिर्फ छह-सात घंटे ही पानी आता है। अगर अगले चार-पांच दिनों तक बारह घंटे सप्लाई कर दी जाए तो लोगों के घरों के अंडरग्राउंड टैंक भर जाएंगे। उसके बाद बेशक छह घंटे सप्लाई करें। अधिकारियों ने हुडा अधिकारियों को ऐसा करने के निर्देश दिए।
मेंटेनेंस चार्ज का पेंच
सेक्टर 28 ओमेक्स में डब्ल्यूटीपी के पीछे टूटी सड़क देखने के साथ दौरे का समापन हुआ। कंपनी प्रतिनिधियों से अधिकारियों से कहा कि 70 प्रतिशत सड़कें बन चुकी हैं, बाकी भी जल्द बन जाएंगी। समस्या यह आ रही है कि यहां सिर्फ तीस फीसदी लोग ही मेंटेनेंस चार्ज देते हैं। आरडब्ल्यू ने कहा कि इसका प्रावधान ही नहीं है। तब डीटीपी मनदीप सिहाग ने अधिकारियों को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा है कि लोगों को मेंटेनेंस चार्ज देना ही होगा।
कंपनी ने कहा, सब कुछ ठीक
ओमेक्स लिमिटेड के एजीएम अनिल गुप्ता ने कहा कि स्ट्रीट लाइटें सौ फीसदी चल रही हैं। पार्क और ग्रीन एरिया पूरी तरह विकसित हो चुका है। पानी हुडा से आ रहा है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट चल रहा है। सड़कों का 70 फीसदी काम हो चुका है, बाकी 31 मार्च तक पूरा हो जाएगा। जैसे-जैसे लोग बस रहे हैं, ट्रांसफार्मर लगाए जा रहे हैं।