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जीवन में पथ प्रदर्शन करती है पुस्तकें : कुलपति
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पुस्तक मेले में किताबें देखते कुलपति प्रो. राजबीर सिंह। अमर उजाला
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जीवन में पुस्तकें सच्चे मित्र की तरह पथ प्रदर्शन करती हैं। रचनात्मकता एवं महत्वपूर्ण सोच का रास्ता पुस्तकें प्रशस्त करती हैं। एमडीयू के कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने पुस्तकों से सक्रिय रूप से नाता जोड़ने का आह्वान छात्र कल्याण कार्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पुस्तक मेले में किया। वे सोमवार को टैगार सभागार में चौथे एमडीयू पुस्तक मेले का शुभारंभ कर रहे थे।
कुलपति ने कहा कि विद्यार्थियों को पाठ्य पुस्तकों के साथ अन्य विषयों की पुस्तकें पढ़नी चाहिए। पुस्तकों को पढ़ने से मन-मस्तिष्क के क्षितिज का विस्तारण होता है। कल्पनाशीलता में वृद्धि होती है। विश्वविद्यालय के विवेकानंद पुस्तकालय के विकास में प्रशासन की ओर से कुलपति ने हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। लाइब्रेरियन डॉ. सतीश मलिक व स्टाफ को इस आयोजन के लिए सराहा। लाइब्रेरियन ने कहा कि कार्यक्रम के आयोजन का उद्देश्य प्राध्यापकों, शोधार्थियों व विद्यार्थियों को उत्कृष्ट पुस्तकें उपलब्ध कराना है। पुस्तक मेले में 40 प्रतिष्ठित प्रकाशन समूह व पुस्तक विक्रेता भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम में डीन, एकेडमिक अफेयर्स प्रो. नवरतन शर्मा ने पुस्तकों के महत्व विशेष रूप से इसके प्रेरणादायी आयाम को रेखांकित किया। कुलसचिव प्रो. गुलशन लाल तनेजा ने पुस्तकों की जीवन में अहम भूमिका पर प्रकाश डाला। मंच संचालन निदेशक युवा कल्याण डॉ. जगबीर राठी ने किया। आभार प्रदर्शन अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. राजकुमार ने किया। इस तीन दिवसीय पुस्तक मेले का आयोजन राष्ट्रीय पुस्तक सप्ताह व आजादी का अमृत महोत्सव के तहत किया जा रहा है। टैगोर सभागार में आयोजित पुस्तक मेले में विश्वविद्यालय की प्रथम महिला डॉ. शरणजीत कौर की गरिमामयी उपस्थिति रही। विश्वविद्यालय के संकाय डीन, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, शोधार्थी, अधिकारी, सेवानिवृत्त प्राध्यापक, विद्यार्थी, शहर के पुस्तक प्रेमी पुस्तक मेले में उपस्थित रहे। विवेकानंद पुस्तकालय व छात्र कल्याण कार्यालय के स्टाफ सदस्यों ने आयोजन में सहयोग दिया।
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कुलपति ने कहा कि विद्यार्थियों को पाठ्य पुस्तकों के साथ अन्य विषयों की पुस्तकें पढ़नी चाहिए। पुस्तकों को पढ़ने से मन-मस्तिष्क के क्षितिज का विस्तारण होता है। कल्पनाशीलता में वृद्धि होती है। विश्वविद्यालय के विवेकानंद पुस्तकालय के विकास में प्रशासन की ओर से कुलपति ने हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। लाइब्रेरियन डॉ. सतीश मलिक व स्टाफ को इस आयोजन के लिए सराहा। लाइब्रेरियन ने कहा कि कार्यक्रम के आयोजन का उद्देश्य प्राध्यापकों, शोधार्थियों व विद्यार्थियों को उत्कृष्ट पुस्तकें उपलब्ध कराना है। पुस्तक मेले में 40 प्रतिष्ठित प्रकाशन समूह व पुस्तक विक्रेता भाग ले रहे हैं।
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कार्यक्रम में डीन, एकेडमिक अफेयर्स प्रो. नवरतन शर्मा ने पुस्तकों के महत्व विशेष रूप से इसके प्रेरणादायी आयाम को रेखांकित किया। कुलसचिव प्रो. गुलशन लाल तनेजा ने पुस्तकों की जीवन में अहम भूमिका पर प्रकाश डाला। मंच संचालन निदेशक युवा कल्याण डॉ. जगबीर राठी ने किया। आभार प्रदर्शन अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. राजकुमार ने किया। इस तीन दिवसीय पुस्तक मेले का आयोजन राष्ट्रीय पुस्तक सप्ताह व आजादी का अमृत महोत्सव के तहत किया जा रहा है। टैगोर सभागार में आयोजित पुस्तक मेले में विश्वविद्यालय की प्रथम महिला डॉ. शरणजीत कौर की गरिमामयी उपस्थिति रही। विश्वविद्यालय के संकाय डीन, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, शोधार्थी, अधिकारी, सेवानिवृत्त प्राध्यापक, विद्यार्थी, शहर के पुस्तक प्रेमी पुस्तक मेले में उपस्थित रहे। विवेकानंद पुस्तकालय व छात्र कल्याण कार्यालय के स्टाफ सदस्यों ने आयोजन में सहयोग दिया।
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