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Rohtak News: बालकनाथ ने खत्म कराया विवाद, दादा काला पीर डेरे के महंत बने जताई नाथ
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26सीटीके52...पत्रकारों को जानकारी देते बाबा बालक नाथ व साथ है महंत शुकराई नाथ । स्रोत: मठ
माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। हिसार जिले के कौथ कलां स्थित दादा काला पीर डेरे के महंत जताई नाथ बनाए गए हैं। यहां के महंत शुकराई नाथ ने गद्दी छोड़ते हुए श्रद्धालुओं से प्रेम व शांति बनाए रखने की अपील की है।
इस गद्दी को लेकर काफी झगड़ा था, जिसे बाबा मस्तनाथ मठ के महंत बाबा बालकनाथ ने संतों की बैठक बुलाकर सोमवार को करा दिया। मठ परिसर में ही महंत बाबा बालकनाथ ने संतों व श्रद्धालुओं के फैसले की पत्रकारों को जानकारी दी।
कहा, कौथ कला डेरे का विवाद काफी गहराया हुआ था। इस मुद्दे पर मठ में संतों की बैठक के बाद इसे खत्म करा दिया है। डेरे के मौजूदा महंत शुकराई नाथ ने कहा कि मठ से संबंधित व कुछ शरारती तत्वों के कारण झगड़ा हुआ था। इसे शांत करा लिया है।
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सभी मानधारी व संतों ने यह निर्णय लिया है, जिसका वह सम्मान करते हैं। समाज को बड़े खून खराबे से बचाने के लिए गद्दी को छोड़ने का निर्णय लिया है। महंत शुकराई ने कहा कि गांव में दो पक्ष बन गए थे। इसमें कुछ गलती मेरी थी, कुछ दूसरे गुट की। जताई नाथ से भी मतभेद हो गया था। झगड़ा खत्म हो गया है। डेरे से जो जिम्मेदारी मिलेगी, उसे निभाऊंगा।
कहा, वर्ष 2018 में भी उनकी अपील पर लाखों लोग घर लौट गए थे, बड़ा झगड़ा टल गया था। अब भी लोग शांति बनाए रखें।
इस माैके पर नाथ संप्रदाय के मानधारी पीर, जिहाना से राजनाथ पीर महाराज, पेहवा से शेरनाथ पीर महाराज, सुंगल से शेरनाथ महाराज, धनौरी से पूर्णनाथ महाराज, 12 पंथ के महंत कृष्ण नाथ, 18 पंथ के महंत समुंद्र नाथ मौजूद रहे।
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रोहतक। हिसार जिले के कौथ कलां स्थित दादा काला पीर डेरे के महंत जताई नाथ बनाए गए हैं। यहां के महंत शुकराई नाथ ने गद्दी छोड़ते हुए श्रद्धालुओं से प्रेम व शांति बनाए रखने की अपील की है।
इस गद्दी को लेकर काफी झगड़ा था, जिसे बाबा मस्तनाथ मठ के महंत बाबा बालकनाथ ने संतों की बैठक बुलाकर सोमवार को करा दिया। मठ परिसर में ही महंत बाबा बालकनाथ ने संतों व श्रद्धालुओं के फैसले की पत्रकारों को जानकारी दी।
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कहा, कौथ कला डेरे का विवाद काफी गहराया हुआ था। इस मुद्दे पर मठ में संतों की बैठक के बाद इसे खत्म करा दिया है। डेरे के मौजूदा महंत शुकराई नाथ ने कहा कि मठ से संबंधित व कुछ शरारती तत्वों के कारण झगड़ा हुआ था। इसे शांत करा लिया है।
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सभी मानधारी व संतों ने यह निर्णय लिया है, जिसका वह सम्मान करते हैं। समाज को बड़े खून खराबे से बचाने के लिए गद्दी को छोड़ने का निर्णय लिया है। महंत शुकराई ने कहा कि गांव में दो पक्ष बन गए थे। इसमें कुछ गलती मेरी थी, कुछ दूसरे गुट की। जताई नाथ से भी मतभेद हो गया था। झगड़ा खत्म हो गया है। डेरे से जो जिम्मेदारी मिलेगी, उसे निभाऊंगा।
कहा, वर्ष 2018 में भी उनकी अपील पर लाखों लोग घर लौट गए थे, बड़ा झगड़ा टल गया था। अब भी लोग शांति बनाए रखें।
इस माैके पर नाथ संप्रदाय के मानधारी पीर, जिहाना से राजनाथ पीर महाराज, पेहवा से शेरनाथ पीर महाराज, सुंगल से शेरनाथ महाराज, धनौरी से पूर्णनाथ महाराज, 12 पंथ के महंत कृष्ण नाथ, 18 पंथ के महंत समुंद्र नाथ मौजूद रहे।

26सीटीके52...पत्रकारों को जानकारी देते बाबा बालक नाथ व साथ है महंत शुकराई नाथ । स्रोत: मठ