Rohtak News: दीवारों पर अरबी आयतें, हॉल में गुरु ग्रंथ साहिब विराजमान
रवि संबरवाल
अब तो मजहब कोई ऐसा भी चलाया जाए, जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए।
जिसकी खुशबू से महक जाए पड़ोसी का भी घर, फूल इस किस्म का हर सम्त खिलाया जाए।
रोहतक। गीतकार पद्मभूषण गोपालदास नीरज ने जिस इंसानी धर्म की ख्वाहिश रची थी, वह महम की पुरानी जामा मस्जिद में जीवंत दिख रही है। यहां की दीवारों पर अरबी आयतें लिखी हैं तो हॉल में गुरु ग्रंथ साहिब विराजमान। सिंह सभा बड़ा गुरुद्वारा बनकर सांझी विरासत को सींच रही यह इमारत मूल रूप में ही सुरक्षित-संरक्षित है।
जामा मस्जिद का निर्माण हुमायूं ने 1531 ईस्वी के आसपास कराया था। औरंगजेब ने 1667-68 में जीर्णोद्धार कराया था। इसके साक्ष्य अरबी शिलालेखों में मिलते हैं। मुगल शैली में तामीर मस्जिद के मुख्य भवन का विशाल गुंबद दूर से ही दिखाई देता है।
मुख्य प्रवेश द्वार पर नक्काशीदार मेहराब और डिजाइन भवन को अलग पहचान देते हैं। अंदर के हॉल में कभी नमाज पढ़ी जाती थी। गुरुद्वारा बनने के बाद गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ होने लगा है। सैकड़ों श्रद्धालु रोजाना मत्था टेकने आते हैं।
दो गुरुद्वारे और भी चल रहे मस्जिदों में
महम में भाई आया सिंह गुरुद्वारा और बंदा बहादुर गुरुद्वारा भी मस्जिदों में ही संचालित हैं। परिसर को विकसित करके सुुंदर बना दिया गया है। ये गुरुद्वारे धार्मिक-सामाजिक कार्यक्रमों का केंद्र बन चुके हैं।
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25 साल पहले यहां कुआं, खुला मैदान और घने पेड़ होते थे
सिंह सभा बड़ा गुरुद्वारा महम के प्रधान सुरेंद्र गिरौत्रा बताते हैं कि 25 साल पहले सभा से जुड़े थे। साल 2000 में मस्जिद के आसपास का मैदान, कुआं और कीकर के पेड़ साफ कराए थे। यहां के कम्युनिटी हॉल में शादी व अन्य सामाजिक कार्यक्रम भी होते हैं।
5 साल पहले गुंबद से टपकता था पानी
गुरुद्वारे के महासचिव राजेंद्र सिंह ढींगड़ा बताते हैं कि करीब पांच साल पहले गुंबद से पानी टपकने और मलबा गिरने पर मरम्मत कराई गई थी। मस्जिद का स्वरूप पुराना ही है। पंजाबी समाज के लोग मिल-जुलकर सभी गुरुद्वारे चलाते हैं।
कई बार दौरा कर चुकी वक्फ बोर्ड की टीम
स्थानीय निवासी तजिंदर पाल बताते हैं कि महम के सेशन जज रहे डॉ. अब्दुल कई बार गुरुद्वारे में मत्था टेकने आए थे। पुरानी मस्जिद की अच्छी देखभाल की सराहना भी की थी। वक्फ बोर्ड की टीम भी यहां कई बार आ चुकी है।
अपना देश सौहार्द और साझी विरासत की भूमि रहा है। बंटवारे के बाद भी ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों को संभालकर रखना हमारे सामाजिक सद्भाव की बड़ी मिसाल है। -प्रो. जयवीर सिंह धनखड़, इतिहास विभाग, एमडीयू

बड़ा गुरुद्वारा महम में सुशोभित गुरु ग्रंथ साहिब। अमर उजाला- फोटो : बड़ा गुरुद्वारा महम में सुशोभित गुरु ग्रंथ साहिब। अमर उजाला

बड़ा गुरुद्वारा महम में सुशोभित गुरु ग्रंथ साहिब। अमर उजाला- फोटो : बड़ा गुरुद्वारा महम में सुशोभित गुरु ग्रंथ साहिब। अमर उजाला

बड़ा गुरुद्वारा महम में सुशोभित गुरु ग्रंथ साहिब। अमर उजाला- फोटो : बड़ा गुरुद्वारा महम में सुशोभित गुरु ग्रंथ साहिब। अमर उजाला

बड़ा गुरुद्वारा महम में सुशोभित गुरु ग्रंथ साहिब। अमर उजाला- फोटो : बड़ा गुरुद्वारा महम में सुशोभित गुरु ग्रंथ साहिब। अमर उजाला

बड़ा गुरुद्वारा महम में सुशोभित गुरु ग्रंथ साहिब। अमर उजाला- फोटो : बड़ा गुरुद्वारा महम में सुशोभित गुरु ग्रंथ साहिब। अमर उजाला

बड़ा गुरुद्वारा महम में सुशोभित गुरु ग्रंथ साहिब। अमर उजाला- फोटो : बड़ा गुरुद्वारा महम में सुशोभित गुरु ग्रंथ साहिब। अमर उजाला