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एक्यूआई 300 पार, शनिवार-रविवार 600 से अधिक औद्योगिक इकाइयां रहेंगी बंद

Sun, 05 Dec 2021 01:54 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 05 Dec 2021 01:54 AM IST
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AQI crosses 300, more than 600 industrial units will remain closed on Saturday-Sunday
तिलियार के पास टूटी सड़क के कारण उड़ती धूल के बीच गुजरते वाहन चालक। अमर उजाला
ठंडे मौसम में 300 पार बने एक्यूआई ने सांस लेना मुश्किल कर दिया है। बेहद खराब स्तर पर बना प्रदूषण जिले के उद्योगपतियों को अरबों रुपये का झटका देगा। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अगले निर्देश तक औद्योगिक इकाइयों के पूरी तरह काम करने पर रोक लगाई है। इसके तहत प्रत्येक शनिवार व रविवार को सभी उद्योग आगामी आदेशों तक बंद रहेंगे।
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यही नहीं, प्रदूषण फैलाने वाली स्वीकृत प्राप्त जिले की 12 यूनिट भी दिन के समय आठ घंटे ही चालू रहेंगी। औद्योगिक क्षेत्र के सभी डीजी सेट (डीजल जनरेटर) पूरी तरह बंद रहेंगे। डीजी सेट बंद होने से जिले की करीब 90 प्रतिशत यानी करीब 600 से अधिक औद्योगिक इकाइयां प्रभावित होंगी। ये इकाइयां बिजली सप्लाई बाधित होने पर डीजी सेट पर ही निर्भर हैं। ऐसे में औद्योगिक इकाइयों का निरंतर काम करना नामुमकिन है। इससे कंपनियों की माल की पूर्ति मुश्किल होगी। बोर्ड के इस फैसले से आहत उद्योगपतियों ने इसे बगैर सोचे-समझे उठाया गया कदम बताते हुए उद्योगपतियों से चर्चा किए जाने की आवश्यकता जताई है। बता दें कि शुक्रवार को औसत एक्यूआई 359 रहा।
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प्रदूषण बोर्ड ने बढ़ते प्रदूषण के चलते एनसीआर इलाके में बिगड़ रही हवा की गुणवत्ता को सुधारने की ओर कदम उठाया है। इसके तहत सभी औद्योगिक इकाइयों को पत्र जारी करते हुए वायु प्रदूषण नियंत्रित करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत बोर्ड से स्वीकृति प्राप्त जिले की करीब 12 इकाइयों समेत डीजी सेट पूरी तरह बंद रखने के लिए कहा गया है। इस फैसले से जिले की लगभग सभी औद्योगिक इकाइयां प्रभावित होंगी। जिले में 600 से अधिक इकाइयां डीजी सेट यानी डीजल जेनरेटर पर निर्भर हैं। अपना उत्पाद तैयार करने के लिए निर्बाध रूप से ऊर्जा का यही स्रोत है। ये डीजी सेट बंद होने लगातार बिजली सप्लाई नहीं मिलेगी। इससे काम व उत्पादन प्रभावित होगा।
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जिले में हैं 50 से ज्यादा प्रदूषण वाली इकाइयां
जिले की औद्योगिक इकाइयों में प्रदूषण फैलाने वाली 50 से ज्यादा इकाइयां हैं। इनमें से मुश्किल से 12 के पास ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मंजूरी प्राप्त हैं। शेष बगैर मंजूरी के धड़ल्ले से प्रदूषण फैला रही हैं। इसके अलावा दिनभर चलने वाले जेनरेटर भी बड़े स्तर पर प्रदूषण की बड़ी वजह है। उद्योगों के अलावा शहरों में भी बड़े शोरूम, मॉल, थियेटर, बहुमंजिला इमारतों व अन्य जगहों पर इनका प्रयोग किया जा रहा है।
359 के स्तर तक पहुंचा एक्यूआई
प्रदूषण का स्तर जिले में खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। पिछले कुछ दिनों से एक्यूआई 300 पार दर्ज किया जा रहा है। शनिवार को यह अधिकतम 359 के स्तर तक पहुंचा। यह औसत 260 दर्ज किया गया। शुक्रवार को भी लगभग यही स्थिति बनी हुई थी। अभी इसमें सुधार की गुंजाइश नजर नहीं आ रही है। पश्चिमी विक्षोभ के चलते बारिश होने के बाद ही प्रदूषण के स्तर में कमी आने की आस है। जिले में शनिवार को अधिकतम तापमान 25.8 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 10.4 डिग्री रहा। इसमें एक दो दिन में और कमी आने की संभावना है। इससे ठंड खासकर रात के समय बढ़ेगी।
जर्जरहाल सड़कें बढ़ा रहीं प्रदूषण
उद्योगों व पराली के अलावा भी प्रदूषण की कई बड़ी वजह हैं। इनमें जर्जर हाल सड़कें व निर्माण कार्य मुख्य हैं। शहर के दिल्ली रोड की जर्जरहाल सड़कें लोगों की परेशानी का सबब बनी हुई है। यहां दिनभर धूल हर समय उड़ती रहती है। यह धूल न केवल वातावरण को प्रदूषित करती है, बल्कि वहां से गुजरने वालों के लिए सांस लेना तक मुश्किल बना रही है। यहां पानी का छिड़काव नहीं होने से धूल का उड़ना दिनभर जारी रहता है। इससे आसपास के लोग परेशान हैं।
सड़कों पर दौड़ रहे वाहन, धुआं है बड़ी वजह
सड़कों पर दौड़ती वाहनों की भीड़ से प्रदूषण की बड़ी वजह है। इनसे निकलता धुआं पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है। डीजल वाहन इनमें सबसे ज्यादा नुकसानदायक हैं। वाहनों पर रोक लगाकर प्रदूषण के स्तर को कम किया जा सकता है। कोरोना के कारण लागू हुए लॉकडाउन के समय प्रदूषण के स्तर में व्यापक स्तर पर सुधार दर्ज किया गया था। इस दौरान हवा बेहद साफ व शुद्ध होने के साथ शांति का माहौल पर्यावरण ही नहीं जीव-जंतुओं के लिए राहत भरा रहा। यही वजह थी कि गंगा में डॉलफिन दिखाई दी तो शहर के लघु चिड़ियाघर का परिवार बढ़ पाया।

- प्रो. राजेश धनखड़, अध्यक्ष, पर्यावरण विज्ञान विभाग, एमडीयू
उद्योग बंद होने से अरबों का होगा नुकसान
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदूषण के चलते उद्योगों पर रोक लगाई है। औद्योगिक इकाइयों के डीजी सेट पूरी तरह बंद रखने को कहा गया है। ऐसा नहीं करने पर दस लाख रुपये जुर्माना लगाया जाएगा। प्रदूषण फैलाने वाली स्वीकृत इकाइयां भी आठ घंटे ही चलेंगी। इससे काम प्रभावित होगा। कंपनी का लिया ऑर्डर समय पर नहीं देने से आर्थिक नुकसान होगा। इसके साथ ही कर्मचारियों का वेतन, माल खराब होना व दूसरे छिपे हुए खर्चे भी वहन करने होंगे। बोर्ड को यह फैसला उद्योग संचालकों से बातचीत के बाद लेना चाहिए था। प्रदूषण की बड़ी वजह उद्योगों से ज्यादा वाहन हैं। इन पर रोक लगाने की जरूरत है। उद्योगपतियों को परेशान करना गलत है। बोर्ड के निर्देशों के चलते फिलहाल काम बंद कर दिया गया है।
- एसके खटोड, प्रधान, रोहतक आईडीसी इंडस्ट्रियल एसोसिएशन
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