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संवादः हैदराबाद कांड को लेकर गुस्सा, एनकाउंटर पर जताई खुशी

Mon, 09 Dec 2019 01:42 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 09 Dec 2019 01:42 AM IST
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Anger over Hyderabad scandal, expressed happiness over encounter
हैदराबाद में महिला चिकित्सक के साथ सामूहिक दुष्कर्म को अंजाम देने वाले हत्यारोपियों के एनकाउं?
अमर उजाला के कब तक निर्भया अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स के तहत रविवार को सिटी कार्यालय में हैदराबाद कांड पर संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस दौरान राष्ट्रीय जाट महिला मंच की महिलाओं ने हैदराबाद कांड पर गुस्सा जताया, जबकि एनकाउंटर पर खुशी जताई। कार्यक्रम में महिलाओं ने ऐसी घटनाओं पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दुष्कर्म के दोषियों को सजा कम कराने की अपील का हक नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने तेलंगाना में दुष्कर्म पीड़िता को जलाने की घटना को हैवानियत की हद बताया। वहीं, उन्होंने आरोपियों के एनकाउंटर पर पुलिस की सराहना की। महिलाओं ने कहा कि दुष्कर्म की घटनाओं को तभी रोका जा सकता है, जब सख्त कानून हो। कानून का इस कदर खौफ होना चाहिए कि अपराधी प्रवृत्ति के लोग किसी घटना को अंजाम देने से पहले 100 बार सोचें।
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कानून सख्त होना चाहिए। सिर्फ लड़कियाें को ही जागरूकता व संस्कार की जरूरत नहीं है, बल्कि लड़कों के स्कूलों में भी समय-समय पर काउंसिलिंग व सेमिनार होने चाहिए। ताकि उनकी मानसिकता को सुधारा जा सकें और लड़कियाें के प्रति संवेदनशील बनाया जा सकें। किसी भी दुष्कर्म के दोषी को अपील करने का हक नहीं मिलना चाहिए। बल्कि राष्ट्रपति के पास होने वाली अपील प्रक्रिया को ही बंद कर देना चाहिए। - सुनीता दलाल, असिस्टेंट प्रोफेसर
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दुष्कर्म जैसे मामलों में सबसे अधिक जवाबदेही अभिभावकों की ही होती है। इसलिए अभिभावकों को अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देते हुए उन्हें किशोरावस्था में ही सही गलत की पहचान करानी चाहिए। निर्भया कांड के दोषी जो पिछले सात साल से तिहाड़ में हैं, उनका एनकाउंटर भी हैदराबाद के आरोपियों की तरह किया जाना चाहिए। मानवाधिकार मानवता के लिए है, न कि हैवानों के लिए।
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- राजकला नरवाल, (महिला उद्यमी) सदस्य राष्ट्रीय जाट महिला मंच
ऐसे जघन्य अपराधियों को मारने के लिए हैदारबाद पुलिस को सलाम करती हूं। इसके लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना चाहिए। पहले पकड़ो, फिर जेल भेजो, फिर कोर्ट कचहरी, फिर कहीं जाकर सालों बाद सजा सुनाई जाती है। लेकिन ऑन द स्पॉट सजा देना सबसे बेहतर होगा, इससे अपराधी कोई भी ऐसा कांड करने से पहले सौ बार सोचेंगे। - निर्मला हुड्डा, (अर्थशास्त्र लेक्चरर) सदस्य राष्ट्रीय जाट महिला मंच
अगर ऐसे अपराधियों को तुरंत प्रभाव से मौत की सजा दी गई होती तो कई घटनाएं होती ही नहीं। सजा इतनी कठोर व भयंकर होनी चाहिए कि कोई भी ऐसा अपराध करने की हिम्मत तक न कर पाए। हैदराबाद पुलिस का काम काबिल-ए तारीफ है। इसके लिए उन्हें दिल से सलाम करते हैं। ऐसे अपराधियों के लिए इससे भी कोई भयंकर सजा हो तो वो देनी चाहिए। - मंजू सांगा, अध्यक्ष, राष्ट्रीय जाट महिला मंच
हमारे देश में भी ऐसे अपराधियों के लिए दुबई जैसा कानून होना चाहिए, जहां ऐसे अपराधियों को बीच चौराहे पर काट दिया जाए या फांसी पर लटका दिया जाए। वहीं देश की बहन-बेटियों के सर पर मंडराता खतरा हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। कहीं न कहीं हमारे देश का लचीला कानून कमजोर पड़ जाता है। -राजबाला कादियान, (पीजीआई नर्सिंग सिस्टर) सदस्य राष्ट्रीय जाट महिला मंच
मानवाधिकार के हियादती अब सड़कों पर उतर आए हैं। वे तब कहां चले गए थे जब देश की बहन-बेटियों के साथ इतना दुराचार हो रहा था। उनकी सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्याएं कर दी जा रही थीं। आज जब पहली बार पुलिस ने सही काम किया है तो उन्हें इस पर आपत्ति हो गई। ये मानवाधिकार नहीं अधिकारों का हनन करने वाले हैं। - रचना हुड्डा, सदस्य राष्ट्रीय जाट महिला मंच
ऐसे अपराधियों को फांसी या अन्य सजा दिलवाने के लिए समय ही नहीं देना चाहिए। इनके लिए तो सिर्फ शूट ऑन साइट के आर्डर पास कर देने चाहिए। आज हैदराबाद पुलिस ने सबसे बेहतरीन काम कर देश का उन पर गर्व करने को मजबूर कर दिया है। पूरे देश की पुलिस को ऐसा होना चाहिए। - सुशीला मलिक, (पीजीटी अंग्रेजी अध्यापिका) सदस्य राष्ट्रीय जाट महिला मंच
हैदराबाद की दुष्कर्म व इसके बाद जिंदा जलाकर निर्मम हत्या, अब उन्नाव में ऐसा ही कांड। आखिर कब तक ये खबरें सुर्खियों में रहेगी। आखिर कब तक निर्भया का नाम अन्याय के खिलाफ देश भर में चिल्लाता रहेगा। इसका समय आ गया है, सिर्फ सरकार व प्रशासन को सजा के नियमों को बदलना होगा। वरना स्थिति गंभीर हो सकती है। - राजेश कुमार, सदस्य राष्ट्रीय जाट महिला मंच
जब एकाउंटर की बात सुनी तो खुशी हुई कि बेटी के साथ न्याय हुआ। लेकिन सोचने का विषय है कि पुलिसकर्मियों ने कानून तोड़कर दोषियों को अंजाम तक पहुंचाया और हम लोग खुश है कानून टूटने से। लोग खुश है कानूनी प्रक्रिया की अवहेलना होने से इसका मतलब हमारी कानूनी प्रक्रिया कुछ ज्यादा ही लचीली और कमजोर हो चुकी है। कानून बनाएं तो आमजन की सुरक्षा के लिए जाते हैं, लेकिन आज एक बेटी कानूनी दाव पेंच और समाज के डर से शिकायत भी दर्ज नहीं करा पाती। - डॉ. पूनम हुड्डा, सहायक प्रोफेसर, अर्थशास्त्र

हैदराबाद पुलिस ने एनकांउटर नहीं, बल्कि वध किया है, जो बिल्कुल सही है। ऐसा करने वालों के साथ यही होना चाहिए। ये असत्य की सत्य पर जीत है। बेटी को पता नहीं कब तक न्याय मिलता लेकिन, हैदराबाद पुलिस ने उसे तुरंत प्रभाव से न्याय दिलवाने का काम किया है। इसके लिए हैदराबाद पुलिस को हमारा सलाम है। - नसीब कौर, सदस्य राष्ट्रीय जाट महिला मंच
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