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Rohtak News: अमित सरोहा ने इंडियन ओपन इंटरनेशनल चैंपियनशिप में जीता कांस्य पदक
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फोटो ::अमित सरोहा।
सोनीपत। गांव बैंयापुर निवासी अंतरराष्ट्रीय क्लब थ्रोअर एवं अनुभवी पैरा एथलीट अमित सरोहा ने दो वर्ष तक कंधे की चोट से जूझने के बाद 8वीं इंडियन ओपन इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शानदार वापसी की है। उन्होंने क्लब थ्रो स्पर्धा में 29.20 मीटर की थ्रो के साथ सीजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया।
बंगलूरू के श्री कांतिरावा स्टेडियम में 25 से 28 मई तक आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में दस देशों के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। क्लब थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा रहा, जिसमें प्रणव ने स्वर्ण पदक और धर्मवीर नैन ने रजत पदक जीता। अमित सरोहा ने कहा कि चोट के बाद इस स्तर की प्रतियोगिता में वापसी उनके लिए बेहद खास है। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक कंधे की चोट के कारण वह नियमित अभ्यास से दूर रहे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लगातार प्रयास जारी रखा।
जिस क्लब थ्रो स्पर्धा की शुरुआत उन्होंने 16 वर्ष पहले भारत में की थी, आज उसी स्पर्धा में भारत दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में शामिल है। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य आने वाली प्रतियोगिताओं में और बेहतर प्रदर्शन करना है तथा युवा खिलाड़ियों को भी किसी भी परिस्थिति में हार न मानने की सीख लेनी चाहिए।
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2014 में एशियाई पैरा खेलों में देश को दिलाया गोल्ड
अमित सरोहा को भारत में क्लब थ्रो स्पर्धा का अग्रदूत माना जाता है। उन्होंने वर्ष 2010 में इस खेल की जानकारी मिलने के बाद विदेश से उपकरण मंगवाकर अभ्यास शुरू किया था। कठिन परिस्थितियों में लगातार मेहनत के बाद वर्ष 2014 में उन्होंने एशियाई पैरा खेलों में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया।
बाक्स
सड़क दुर्घटना ने बदला जीवन
वर्ष 2007 की सड़क दुर्घटना ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया था। खेल से दूरी और कठिन दौर के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। परिवार के सहयोग और आत्मविश्वास के सहारे उन्होंने खुद को दोबारा तैयार किया और पैरा खेलों में वापसी की।
बाक्स
चोट से जूझते हुए भी नहीं मानी हार
अमित सरोहा पिछले दो वर्षों में चोट के कारण अभ्यास नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने हार नहीं मानी और फिटनेस पर लगातार काम किया। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वापसी आसान नहीं था। इस प्रदर्शन से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और आगे की प्रतियोगिताओं के लिए वे पूरी तरह तैयार हैं।
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बंगलूरू के श्री कांतिरावा स्टेडियम में 25 से 28 मई तक आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में दस देशों के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। क्लब थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा रहा, जिसमें प्रणव ने स्वर्ण पदक और धर्मवीर नैन ने रजत पदक जीता। अमित सरोहा ने कहा कि चोट के बाद इस स्तर की प्रतियोगिता में वापसी उनके लिए बेहद खास है। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक कंधे की चोट के कारण वह नियमित अभ्यास से दूर रहे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लगातार प्रयास जारी रखा।
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जिस क्लब थ्रो स्पर्धा की शुरुआत उन्होंने 16 वर्ष पहले भारत में की थी, आज उसी स्पर्धा में भारत दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में शामिल है। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य आने वाली प्रतियोगिताओं में और बेहतर प्रदर्शन करना है तथा युवा खिलाड़ियों को भी किसी भी परिस्थिति में हार न मानने की सीख लेनी चाहिए।
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2014 में एशियाई पैरा खेलों में देश को दिलाया गोल्ड
अमित सरोहा को भारत में क्लब थ्रो स्पर्धा का अग्रदूत माना जाता है। उन्होंने वर्ष 2010 में इस खेल की जानकारी मिलने के बाद विदेश से उपकरण मंगवाकर अभ्यास शुरू किया था। कठिन परिस्थितियों में लगातार मेहनत के बाद वर्ष 2014 में उन्होंने एशियाई पैरा खेलों में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया।
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सड़क दुर्घटना ने बदला जीवन
वर्ष 2007 की सड़क दुर्घटना ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया था। खेल से दूरी और कठिन दौर के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। परिवार के सहयोग और आत्मविश्वास के सहारे उन्होंने खुद को दोबारा तैयार किया और पैरा खेलों में वापसी की।
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चोट से जूझते हुए भी नहीं मानी हार
अमित सरोहा पिछले दो वर्षों में चोट के कारण अभ्यास नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने हार नहीं मानी और फिटनेस पर लगातार काम किया। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वापसी आसान नहीं था। इस प्रदर्शन से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और आगे की प्रतियोगिताओं के लिए वे पूरी तरह तैयार हैं।