फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   Amalaki Ekadashi on 20th, auspicious time from 12:30 am to 2:21 am the next night.

Rohtak News: आमलकी एकादशी 20 को, शुभ मुहूर्त रात्रि 12ः30 से अगली रात्रि 2ः21 बजे

Mon, 18 Mar 2024 03:18 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक Updated Mon, 18 Mar 2024 03:18 AM IST
विज्ञापन
Amalaki Ekadashi on 20th, auspicious time from 12:30 am to 2:21 am the next night.
17सीटीके20...पंडित सुनील शास्त्री। संवाद
रोहतक। फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी 20 मार्च को मनाई जाएगी। इस एकादशी को आमलकी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु, भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का बड़ा महत्व है। हिंदू धर्म में हर माह के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की एकादशी का बहुत महत्व माना जाता है। आमलकी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ शिव गौरी की भी पूजा का विधान है। मान्यता है कि आमलकी एकादशी का उपवास रखने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख समृद्धि और खुशहाली आती है।
विज्ञापन


आमलकी एकादशी शुभ-मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारंभ : 20 मार्च को रात्रि 12:30 बजे
समापन 21 मार्च रात्रि 2:21 बजे
व्रत पाणन का समय प्रात: 6:44 से सुबह 9:03 बजे तक।


विष्णु भगवान और माता लक्ष्मी की करें पूजा
आमलकी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर घर के मंदिर की सफाई करें और भगवान विष्णु का ध्यान करके उपवास का संकल्प लें। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। साथ ही ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का मानसिक रूप से जाप करते रहना चाहिए।
विज्ञापन


आंवले के पेड़ की करें पूजा
पंडित सुनील शास्त्री ने बताया कि आमलकी एकादशी के दिन आंवले के पेड़ की पूजा करनी चाहिए। रोली, चंदन, पुष्प, सुगंधित द्रव्य चढ़ाकर धूप दीप और कपूर से आरती करनी चाहिए। पूजा के दौरान विष्णु जी को आंवले का भोग लगाएं। आमलकी एकादशी व्रत से सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


एकादशी व्रत में पूजन सामग्री का करें प्रयोग
भगवान विष्णु की प्रतिमा गंगाजल, पंचामृत, रोली, चंदन, पुष्प, नारियल, सुपारी, फल, लौंग, इलाइची, धूप, दीप, घी, तुलसी जल, मिष्ठान, पीले वस्त्र फूलमाला व सुगंधित द्रव्य चढ़ाएं।

आमलकी एकादशी का महत्व
पंडित सुनील शास्त्री सामड़ ने बताया कि आमलकी का अर्थ आंवला होता है। भगवान विष्णु ने आंवले को आदि वृक्ष के रूप में प्रतिष्ठित किया था। इसलिए इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है।

वहीं इस दिन शिवजी व माता पार्वती की शादी के बाद पहली बार काशी लाए थे, इसलिए इस दिन महादेव को गुलाल अर्पित किया जाता है। इस दिन किसी भी धार्मिक स्थल और मंदिर में आंवले का पौधा लगाना चाहिए। उपवास के दिन फल, बिना अन्न से बनी मिठाई, गुड़, चीनी, पीले पुष्प, पीले वस्त्र और तिलों का दान करने से मनोकामना पूर्ण होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed