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परिजनों ने खटखटाया पीएम का दरवाजा, 45 बार शिकायत करने के बाद भी सुनवाई नहीं करने का आरोप
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महिला कांस्टेबल पद की परीक्षा देने वाली क्षेत्र के सुनारियां कलां और चरखी दादरी की दो छात्राओं का दावा है कि 45 बार श्किायत करने के बाद भी उन्हें इंसाफ नहीं मिल पा रहा है। परीक्षा में उन्हें परिवार में किसी के भी सरकारी विभाग में नौकरी नहीं करने के बावजूद सरकार के दावे के अनुसार अतिरिक्त पांच नंबर नहीं दिए गए। पांच नंबर के स्थान पर जीरो दर्शाया गया। अब उन्हें चक्कर कटवाए जा रहे हैं। छात्राओं ने अब पीएम का दरवाजा खटखटाया है।
सुनारिया कलां गांव की रहने वाली पिंकी और चरखी दादरी की रहने वाली मीना जांगड़ा ने पीएम को भेजे पत्र में बताया कि उन्होंने हरियाणा पुलिस में महिला कांस्टेबल पद के लिए 23 दिसंबर 2018 को पेपर दिए थे। फिजिकल भी हो गया था। 3 अप्रैल 2019 को उनका रिजल्ट आया। इसमें पिंकी के 53.6 जबकि मीना के 53.4 नंबर दिए गए। आरोप लगाया कि दोनों को अतिरिक्त पांच-पांच नंबर नहीं दिए गए। जबकि सरकार ने दावा किया था कि यदि किसी के परिवार में कोई भी सरकारी नौकरी नहीं करता है तो उस परीक्षार्थी को अलग से पांच नंबर मिलेंगे। आवेदन के समय उन्होंने शपथ पत्र में भी परिवार के किसी भी सदस्य के सरकारी नौकरी नहीं करने का सर्टिफिकेट जमा कराया था। यदि उनके 54 नंबर आते तो दोनों पास हो जाते।
पिंकी के पिता दिलबाग सिंह ने बताया कि पांच नंबर की जगह जीरो दिखाया गया है। मामले की शिकायत 12 बार 33 बार स्टाफ सलेक्शन कमीशन के चेयरमैन जबकि 12 बार सीएम को की जा चुकी हैं मगर कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। अब पीएम से इंसाफ की गुहार लगाई है। दोनों छात्राओं का कहना है कि उनके साथ पक्षपात किया गया है। यदि उन्हें इंसाफ नहीं मिला तो उनका भविष्य भी बर्बाद हो जाएगा।
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सुनारिया कलां गांव की रहने वाली पिंकी और चरखी दादरी की रहने वाली मीना जांगड़ा ने पीएम को भेजे पत्र में बताया कि उन्होंने हरियाणा पुलिस में महिला कांस्टेबल पद के लिए 23 दिसंबर 2018 को पेपर दिए थे। फिजिकल भी हो गया था। 3 अप्रैल 2019 को उनका रिजल्ट आया। इसमें पिंकी के 53.6 जबकि मीना के 53.4 नंबर दिए गए। आरोप लगाया कि दोनों को अतिरिक्त पांच-पांच नंबर नहीं दिए गए। जबकि सरकार ने दावा किया था कि यदि किसी के परिवार में कोई भी सरकारी नौकरी नहीं करता है तो उस परीक्षार्थी को अलग से पांच नंबर मिलेंगे। आवेदन के समय उन्होंने शपथ पत्र में भी परिवार के किसी भी सदस्य के सरकारी नौकरी नहीं करने का सर्टिफिकेट जमा कराया था। यदि उनके 54 नंबर आते तो दोनों पास हो जाते।
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पिंकी के पिता दिलबाग सिंह ने बताया कि पांच नंबर की जगह जीरो दिखाया गया है। मामले की शिकायत 12 बार 33 बार स्टाफ सलेक्शन कमीशन के चेयरमैन जबकि 12 बार सीएम को की जा चुकी हैं मगर कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। अब पीएम से इंसाफ की गुहार लगाई है। दोनों छात्राओं का कहना है कि उनके साथ पक्षपात किया गया है। यदि उन्हें इंसाफ नहीं मिला तो उनका भविष्य भी बर्बाद हो जाएगा।
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